अजित पवार के एयर क्रैश के शिकार हुए करीब तीन हफ्ते बीत चुके हैं. और, पवार परिवार के शक की सूई अब महज हादसे से साजिश की तरफ घूमने लगी है. 28 जनवरी के हादसे के बाद से परिवार के अंदर से कई तरह की राय सामने आ चुकी है - अब तो उनकी पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को भी साजिश का शक होने लगा है.
हादसे के बाद इस मामले पर सबसे पहले शरद पवार का रुख सामने आया था. शरद पवार का कहना था कि यह महज हादसा है, और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. सुनेत्रा पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ तो ले ली थी, लेकिन इस मामले में खामोशी अख्तियार किए हुए थीं.
शरद पवार के बाद इस मामले में उनके विधायक पोते रोहित पवार की अलग राय सामने आई. रोहित पवार ने चाचा अजित पवार केस में साजिश का शक जताते हुए कई सवाल भी उठाए थे. एक बार फिर उनका बयान आया है, जिसमें वह स्पष्ट कर रहे हैं कि जांच एजेंसियों के काम से तो नहीं, लेकिन जिस धीमी गति से काम हो रहा है वह उनको संदेहास्पद लग रहा है.
महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी की सुबह हुए हादसे में तत्कालीन डिप्टी सीएम अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी.
अजित पवार के दुर्घटनाग्रस्त प्लेन का ब्लैक बॉक्स बना पहेली, कौन है असली गुनहगार
शुरुआती जानकारी में संकेत मिला है कि जिस इलाके में हादसा हुआ, वहां विजिबिलिटी कम थी और वह भी हादसे की एक वजह हो सकती है. विमान के ब्लैक बॉक्स से मिले डाटा और मलबे की जांच से हादसे से पहले की घटनाओं को दोबारा समझने और उसे निश्चित क्रम में जोड़कर समझने में मदद मिलने की उम्मीद है.
ब्लैक बॉक्स का रिकॉर्डर तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और पानी से सुरक्षित रखने के लिए खास तरह से बनाया जाता है. ब्लैक बॉक्स विमान के पिछले हिस्से में लगाए जाते हैं, क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में इस हिस्से पर आमतौर पर सबसे कम असर पड़ता है. ज्यादातर विमानों में दो ब्लैक बॉक्स लगाना अनिवार्य होता है - CVR यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR).
CVR कॉकपिट के अंदर की आवाजें रिकॉर्ड करता है, जिनमें रेडियो संदेश, पायलटों के बीच बातचीत और इंजन की आवाज भी शुमार होती है. FDR उड़ान से जुड़े कई तकनीकी आंकड़े रिकॉर्ड करता है. मसलन, ऊंचाई, रफ्तार, ऊपर-नीचे होने की गति और ऑटोपायलट की स्थिति. FDR से मिले डेटा की मदद से जांचकर्ता उड़ान की प्रक्रिया को रीकन्स्ट्रक्ट करते हैं और एक वीडियो सिमुलेशन तैयार किया जाता है, ताकि हर सूक्ष्म विवरण अच्छे से समझा जा सके.
12 जून, 2025 को अहमदाबाद में एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही क्रैश हो गया था. हादसे में कुल 260 लोग मारे गए, जिनमें विमान में सवार पैसेंजर और मेडिकल स्टूडेंट्स के हॉस्टल के अंदर मौजूद लोग शामिल थे, जिस पर एयरक्राफ्ट गिरा था. हादसे में सिर्फ एक यात्री की जान बच पाई थी.
एअर इंडिया फ्लाइट क्रैश के जांचकर्ताओं का मानना है कि यह हादसा किसी टेक्निकल खराबी की वजह से नहीं, बल्कि यह जानबूझकर की गई हरकत का नतीजा था. इटली के दैनिक डेली अखबार Corriere della Sera ने सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की है. DGCA की आधिकारिक रिपोर्ट का अभी इंतजार है.
जुलाई, 2025 में एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की तरफ से जारी शुरुआती रिपोर्ट में एक पायलट के फ्यूल कंट्रोल बंद करने को लेकर कॉकपिट में आखिरी बातचीत का जिक्र किया गया था. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में, एक पायलट को पूछते हुए सुना गया, 'तुमने (फ्यूल) क्यों बंद किया? जिस पर दूसरे ने जवाब दिया, 'मैंने ऐसा नहीं किया.'
एअर इंडिया फ्लाइट में कैप्टन सुमीत सभरवाल पायलट-इन-कमांड थे, जबकि फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर को-पायलट थे. इटली के अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जांच करने वालों का अब मानना है कि पायलटों में से एक ने इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद कर दिया था, जिससे एयरक्राफ्ट की पावर चली गई और वह जमीन पर गिर गया.
फाइनल रिपोर्ट आने तक कुछ भी सोचना समझना सही नहीं होगा, लेकिन अजित पवार केस में रोहित पवार भी पायलट की भूमिका पर ही शक जाहिर कर रहे हैं, और उसमें भी किसी और की भूमिका की तरफ इशारा करने की कोशिश कर रहे हैं.
बेटे जय पवार और भतीजे रोहित के सवाल
अजित पवार के बेटे जय ने सवाल उठाया है कि हादसे के इतने दिन बीत जाने के बावजूद ब्लैक बॉक्स का डेटा क्यों नहीं हांसिल किया जा सकता? एयर क्रैश के सामान्य हादसा होने पर सबसे पहले भतीजे रोहित पवार ने ही सवाल उठाया था. हवाई हादसे को लेकर कई तरह के सवाल उठाते हुए रोहित पवार ने कहा था, हमें डर है कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जाएगी... हम सिर्फ रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर सकते... हमें सभी CCTV फुटेज और टेक्निकल रिकॉर्ड चाहिए. अपनी मांग दोहराते हुए रोहित पवार कह रहे हैं, कुछ दिन पहले हमने मुंबई और दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी... उसके बाद जांच संस्थाएं काम कर रही हैं. लेकिन जिस गति से काम कर रही हैं, उस पर हमारा सवाल है.
1. फ्यूल टैंक पर सवाल उठाते हुए रोहित पवार का कहना है, विमान का फ्यूल टैंक पूरा भरा हुआ था... फ्यूल टैंक पूरा भरने की जरूरत क्या थी? विंग्स में टैंक थे, वे भी भरे हुए थे.
2. संदेह जाहिर करते हुए रोहित पवार का कहना है कि पायलट का इस्तेमाल कर इस घटना को अंजाम दिया गया होगा... विमान को जानबूझकर नीचे गिराया गया.
3. ब्लैक बॉक्स के जलने की बात पर रोहित पवार का कहना है, जानकारों के मुताबिक ब्लैक बॉक्स तभी खराब हो सकता है जब वह 1100 डिग्री सेल्सियस पर एक घंटे तक जले, जबकि पानी में वह एक महीने तक रह सकता है.
4. विमान के कंडीशन पर सवाल उठाते हुए रोहित पवार ने कहा, विमान की खराब स्थिति और विमान की इंश्योरेंस वैल्यू 55 करोड़ रुपये थी, जबकि उसकी कुल लाएबिलिटी 210 करोड़ रुपये थी.
रोहित पवार का कहना है कि विमान की बॉडी एल्युमीनियम और बाहरी हिस्सा टाइटेनियम से बना होता है, ऐसे में तकनीकी खामियों को छिपाना मुश्किल है - पूरे मामले के पीछे कौन है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए... महज कागजी कार्यवाही पर भरोसा न करके डिजिटल सबूतों की जांच की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
पत्नी सुनेत्रा और पार्टी अध्यक्ष सुनील तटकरे क्यों कर रहे हैं सीबीआई जांच की मांग
महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार और एनसीपी (एपी) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने अजित पवार की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. मीडिया से बात करते हुए सुनील तटकरे ने कहा कि पार्टी और परिवार इस मामले में पारदर्शिता चाहते हैं - घटना के पीछे की सच्चाई सामने आना जरूरी है.
अजित पवार की मौत को लेकर उपजे संदेहों के चलते सुनेत्रा पवार और सुनील तटकरे ने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की जरूरत बताई है. हादसे की सीबीआई जांच के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने एक प्रेजेंटेशन दिखाया गया. एनसीपी प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल, डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुनेत्रा पवार, सुनील तटकरे, हसन मुश्रीफ और अजित पवार के बेटे पार्थ पवार मौजूद थे.प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सीबीआई जांच की मांग वाला एक पत्र भी सौंपा है.
बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस बारे में बात करेगी. सुनील तटकरे ने कहा, हमें लगता है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच पूरी होगी... एनसीपी विधायक दल पूरी तरह सुनेत्रा पवार के साथ है, और कोई असहमति नहीं है.