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कठघरे में ममता बनर्जी का 'हल्‍ला बोल', सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर बंगाल चुनाव की राजनीति तक

मुख्‍यमंत्री रहते ममता बनर्जी अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सड़क पर उतर जाती हैं. मामला बिगड़ता है तो अदालत में भी उनकी टीम समय रहते पहुंच जाती है. लेकिन, I-PAC छापेमारी केस में हाई कोर्ट से याचिका खारिज हो जाने के बाद ममता बनर्जी की स्थिति उतनी मजबूत नहीं लग रही है. सुप्रीम कोर्ट का आने वाला फैसला अप्रैल में होने वाले बंगाल चुनाव तक असर डालेगा.

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ममता बनर्जी के खिलाफ शुभेंदु अधिकारी के हमलावर होने का मौका मिल गया है. (Photo: PTI)
ममता बनर्जी के खिलाफ शुभेंदु अधिकारी के हमलावर होने का मौका मिल गया है. (Photo: PTI)

ममता बनर्जी खुद को स्ट्रीट फाइटर कहती हैं. और, सड़क पर उतर कर मिसाल भी पेश करती रही हैं. लेकिन, उनकी स्ट्रीट फाइट धीरे धीरे छापामार राजनीति में तब्दील होती जा रही है. अब तक तो यही देखा गया है कि मसला कोई भी हो, ममता बनर्जी सड़क पर उतर कर माहौल अपने मनमाफिक कर लेती हैं - और आगे चलकर चुनावी फायदा भी मिल जाता है.

I-PAC मामले में दांव उलटा पड़ गया है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी है. मामले में तात्कालिक चिंता की बात इसलिए नहीं है, क्योंकि सुनवाई भी स्थगित कर दी गई है. क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय ने अर्जी दी है, और ममता बनर्जी की तरफ से कैविएट दाखिल की गई है. ताकि, उनका भी पक्ष सुना जाए.

सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने ममता बनर्जी सहित कई आला पुलिस अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गिरफ्तार करने की मांग की है. साथ ही, उनके जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कोयला घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाने को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ने का भी ऐलान किया है. 

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कलकत्ता हाई कोर्ट में क्या हुआ

कलकत्ता हाई कोर्ट में ईडी की तरफ से पेश ASG एसवी राजू की एक ही दलील भारी पड़ी. अदालत को एसवी राजू की दलील सही लगी, और पूरे मामले का रुख ही पलट गया. और, जस्टिस शुभ्रा घोष ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका उसी वक्त खारिज कर दी.

टीएमसी की वकील मेनका गुरुस्वामी कह रही थीं, 'माय लॉर्ड, बस दो मिनट… मुझे दो मिनट दीजिए.' 

तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ED के अफसरों ने 8 जनवरी को I-PAC के दफ्तर से उनका निजी डेटा और जरूरी दस्तावेज जब्त किया है. तृणमूल कांग्रेस की मांग थी कि उनके डेटा को सुरक्षित रखा जाए, और ईडी को उसके इस्तेमाल से रोका जाए.

सुनवाई के दौरान ईडी के वकील का कहना था, हमने वहां से कुछ भी जब्त नहीं किया है... जो भी रिकॉर्ड, डिवाइस या दस्तावेज वहां थे, ईडी ने नहीं बल्कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके साथ आए अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया... और अपने साथ ले गए.

ED के वकील की बात सुनते ही कोर्ट ने कहा, जब ED ने कुछ भी जब्त न करने की बात कही है, तो इस मामले पर अब सुनवाई के लिए कुछ बचना ही नहीं. याचिका खारिज की जाती है.

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ये बात रिकॉर्ड पर आते ही जस्टिस शुभ्रा घोष ने मामले का निस्तारण कर दिया. टीएमसी की वकील मेनका गुरुस्वामी की दो मिनट देने की अपील भी बेअसर रही. 

और, इसके साथ ही हाई कोर्ट ने ईडी की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई भी टाल दी. हाई कोर्ट का कहना था कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहले ही याचिका लगाई जा चुकी है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट में क्या स्थिति है

सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय ने ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों पर कोलकाता में I-PAC रेड के दौरान रुकावट डालने का गंभीर आरोप लगाया है. ममता बनर्जी की तरफ से 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है, जिसमें मांग की गई है कि उनका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए.

अपनी याचिका में ED ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के आला पुलिस अफसरों पर 17 अपराध करने का इल्जाम लगाया है. इनमें डकैती, लूट और चोरी जैसे आरोपों के साथ सरकारी काम में लगे अधिकारियों का रास्ता रोकने, सबूत छिपाने या नष्ट करने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.

15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कोलकाता में आईपैक के दफ्तर पर ईडी के छापे वाले मामले में सुनवाई है.

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ममता के खिलाफ मानहानि केस की तैयारी

प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि कोलकाता में आईपैक के दफ्तर पर छापेमारी भी कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में ही हुई है. हालांकि, ममता बनर्जी की तरफ से ईडी पर आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने टीएमसी की चुनावी रणनीति से जुड़े निजी दस्तावेज हासिल करने के लिए छापा डाला था. 

कोयला घोटाले पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला काफी आगे बढ़ गया है. और, ममता बनर्जी कोयला घोटाले के आरोपों के दायरे में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के बहाने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक को निशाना बना डाला है. ममता बनर्जी का गंभीर आरोप है कि कोयला घोटाले की रकम शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेताओं के जरिए अमित शाह तक पहुंचाई गई.

ममता बनर्जी का बयान आने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने उनको कानूनी नोटिस भेजकर 72 घंटे में सबूत पेश कर ये साबित करने को कहा था कि वो कोयला घोटाले में शामिल हैं. शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो वो दीवानी और फौजदारी दोनों तरह की मानहानि का केस करेंगे.

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल साइट X पर लिखा है, 

ममता बनर्जी पूरी तरह असहज नजर आ रही हैं. मेरी ओर से मानहानि नोटिस के तहत दिया गया समय खत्म हो चुका है, और उलझन में होने के कारण वो जवाब देने में असफल रही हैं. अपने आचरण से मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि मुझे कथित कोयला घोटाले से जोड़ने के उनके आरोप पूरी तरह काल्पनिक हैं, और उनकी अस्वस्थ मानसिकता की उपज हैं... ममता बनर्जी, अब आपसे अदालत में मुलाकात होगी.

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी हो, चुनाव पर असर तो होगा ही

विरोधियों पर चौतरफा हमले करने वाली ममता बनर्जी अबकी बार खुद हर तरफ से घिर गई हैं. ईडी रेड पर छापा मारकर ममता खुद कैमरे के सामने आईं और खुद को पीडि़त बताया. फिर अदालत में कह दिया कि वे मुख्‍यमंत्री नहीं, टीएमसी नेता के तौर पर गई थीं. इधर, अमित शाह की मानहानि को लेकर बीजेपी ने भी मोर्चाबंदी कर ली है. ऐसे में सारा दारोमदार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है. यदि, फैसला ममता के पक्ष में आता है तो वे खुद को 'पीड़‍ित' बताने का मुद्दा बंगाल चुनाव तक लेकर जाएंगी. और यदि फैसला उनके खिलाफ आता है. नौबत ममता पर एफआईआर तक पहुंचती है, तो उनकी सरकार पर भी गंभीर संकट आ सकता है. जाहिर है फिर तो वह बंगाल चुनाव का मुद्दा होगा ही.

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