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कर्नाटक हेट स्पीच बिल: नफरत के नाम पर बना विधेयक कड़वाहट का सबब बन गया?

कर्नाटक सरकार का हेट स्पीच बिल अब राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने यह बिल दिसंबर, 2025 में विधानसभा से पास किया था, लेकिन राज्यपाल को बिल के कई प्रस्तावों पर आपत्ति है. अब राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार है.

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सिद्धारमैया के हेट स्पीच बिल को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राष्ट्रपति के पास भेज दिया है. (Photo: PTI)
सिद्धारमैया के हेट स्पीच बिल को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राष्ट्रपति के पास भेज दिया है. (Photo: PTI)

कर्नाटक के 'हेट स्पीच बिल, 2025' को राज्यपाल ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया है. राज्यपाल थावरचंद गहलोत का कहना है कि नफरत रोकना जरूरी है, लेकिन उसके लिए अभिव्यक्ति की आजादी की बलि नहीं दी जा सकती. राज्यपाल का मानना है, नफरत रोकने के नाम पर स्वतंत्रता को खत्म करना समाधान नहीं है. 

दिसंबर, 2025 में कर्नाटक विधानसभा से पास बिल के खिलाफ करीब 40 संगठनों ने राजभवन में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. कर्नाटक में विपक्षी बीजेपी ने भी बिल को असंवैधानिक बताया था. बीजेपी का कहना था, यह बिल संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है. बीजेपी नेताओं ने आशंका जताई थी, हेट स्पीच की व्यापक परिभाषा से सामान्य आलोचना या व्यंग्य को भी अपराध माना जा सकता है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है.

बिल में हेट स्पीच की जो परिभाषा बताई गई है उसके मुताबिक - शब्दों, संकेतों, विजुअल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की गई कोई भी ऐसी अभिव्यक्ति, जो किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ घृणा, शत्रुता, द्वेष या वैमनस्य पैदा करने का इरादा रखती हो, हेट स्पीच मानी जाएगी.

बिल पर राज्यपाल की आपत्ति

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1. राज्यपाल थावरचंद गहलोत का मानना है कि हेट स्पीच बिल संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन है. उनका कहना है कि यह बिल नागरिकों के मौलिक अधिकारों और ‘स्वतंत्र समाज’ की अवधारणा पर बुरा असर डाल सकता है. 

2. कर्नाटक के राज्यपाल के अनुसार बिल के कानून बन जाने पर प्रशासन को जो पावर दिए जाने हैं, वे तानाशाही की तरफ इशारा करते हैं, और इनका बेजा इस्तेमाल मुमकिन है.

3. राज्यपाल ने आगाह किया है कि हेट स्पीच बिल की धारा 2(1) में हेट स्पीच की परिभाषा इतनी अस्पष्ट है कि सामान्य भाषण भी इसके तहत अपराध की कैटेगरी में आ सकता है.

बिल में हेट स्पीच की परिभाषा

बिल में हेट स्पीच की जो परिभाषा बताई गई है उसके मुताबिक, कोई भी अभिव्यक्ति (मौखिक रूप से, लिखित तौर पर, इलेक्ट्रॉनिक या किसी और माध्यम से) जो किसी व्यक्ति, समूह या संगठन के खिलाफ नफरत, दुश्मनी या बीमार मानसिकता को जन्म देती हो, और जो धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, भाषा या विकलांगता जैसे पूर्वाग्रहों पर आधारित हो. हालांकि, यह सार्वजनिक रूप से प्रसारित होनी चाहिए. 

और अपराध के हिसाब से सजा प्रावधान भी किया गया है - 

1. पहली बार अपराध किए जाने पर 1 से 7 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माना हो सकता है. दोबारा अपराध किए जाने पर 2 से 10 साल की कैद और 1 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है. पीड़ित को मुआवजा भी दिया जा सकता है. 

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2. हेट स्पीच को बिल में संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बताया गया है. मतलब, पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है. 

3. कार्यकारी मजिस्ट्रेट या सक्षम पुलिस अधिकारी (DSP स्तर से ऊपर) जांच के बाद शांति बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर सकते हैं.

4. राज्य सरकार की तरफ से नामित अधिकारी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को ब्लॉक कर सकते हैं या हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं. 

5. हालांकि, यह कानून विज्ञान, साहित्य, कला या धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर लागू नहीं होगा, बशर्ते वह सार्वजनिक हित में हो. 

कर्नाटक हेट स्पीच बिल भारतीय न्याय संहिता, 2023 और आईटी एक्ट, 2000 के साथ मिलकर काम करेगा, लेकिन अन्य कानूनों को प्रभावित नहीं करेगा.

वैसे बिल को लेकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की तरफ से साफ करने की कोशिश की गई है कि यह बिल किसी खास राजनीतिक दल या समुदाय को निशाना नहीं बनाता है. बल्कि बिल लाए जाने का मकसद राज्य में सामाजिक सामंजस्य बनाए रखना, और नफरत फैलने से रोकना है - और, यह कानून भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार के आने पर लागू होगा.

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