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जंग से पार पा लेंगे या लगेगा हाफ लॉकडाउन? 6 साल पहले भी ऐसा ही मार्च था

होर्मुज संकट के बीच देश में 2020 जैसे हालात की चर्चा तेज हो गई है, जहां पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी कतारें और गैस की मारामारी पैनिक बढ़ा रही है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्लाई सामान्य रहने का भरोसा दिया है, लेकिन सवाल बना हुआ है कि क्या हालात काबू में रहेंगे या आंशिक लॉकडाउन की नौबत आएगी?

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यूपी के प्रयागराज में पेट्रोल-पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं. (File Photo-PTI)
यूपी के प्रयागराज में पेट्रोल-पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं. (File Photo-PTI)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर छाए संकट ने मार्च 2020 की याद दिला दी है. सोशल मीडिया हो या ऑफिस, घर हो या बाजार, हर जगह यही चर्चा है. आज से ठीक 6 साल पहले यही महीना था. हर रोज जनता को आश्वस्त किया जा रहा था कि सब कुछ नियंत्रण में है. ठीक आज की तरह सर्वदलीय बैठकें हो रही थीं, बार-बार जनता को आश्वस्त किया जा रहा था कि सब कुछ सरकार के नियंत्रण में है. काला बाजारी करने वालों पर सख्त एक्शन की धमकी दी जा रही थी, पर जब कोविड अपने चरम पर पहुंचा तो जैसे सब कुछ ठप पड़ गया. 

अस्पतालों में आक्सीजन सिलिंडर नहीं था. पर ताकतवर और प्रभावशाली लोगों के घरों में सिलिंडर हो या रैमडेसियर जैसी मेडिसिन के स्टॉक भरे पड़े थे. जिसको जरूरत थी उसे न सिलिंडर मिल रहा था और न ही जीवनरक्षक दवाएं मिल रहीं थीं. जाहिर है कि ईरान संकट अगर कुछ दिन और चला तो भयंकर मंदी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.  इसके साथ आंशिक लॉकडाउन भी हो सकता है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कह रहे हैं कि कोविड की तरह इस बार भी हर समस्या से पार पा लेंगे. 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकार एक फिर इस समस्या से भी पार पा लेगी. लेकिन कोविड से पार पाने में देश, समाज और लोगों ने बहुत कुछ खोया था. किसी भी तरह का आश्वासन लोगों के डर को कम नहीं कर पा रहा है. अभी तो फिलहाल छिटपुट रूप से देश भर में गैस और तेल की मारा-मारी की खबरें सामने आ रही हैं. जाहिर है कि अगर यह भेड़ चाल पूरे देश को अपने चपेट में ले लेगा. हालांकि जनता में इस बार जनता 2020 वाला भय नहीं. पर भीड़ के पैनिक को रोकना बहुत जरूरी है. 

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चाहे सरकार हो या समाज दोनों का यह कर्तव्य बनता है कि लोगों को आश्वस्त किया जाए कि देश में गैस हो या तेल किसी भी कीमत पर कमी नहीं होने दी जाएगी. किसी भी कीमत पर हमें पैनिक खरीदारी शुरू करनी होगी. अगर थोड़ी भी देर होती है तो यह समस्या विकराल बन जाएगी. ऐसा नहीं है कि कोविड के समय आक्सीजन इतना नहीं था कि हर बीमार को न मिल सके. पर पैनिक के चलते समाज के मुट्ठी भर लोगों ने समस्या इतना विकराल बना दिया कि सरकार भी कुछ न कर सकी. 

पेट्रोल-डीजल पंपों पर लंबी कतारें, रसोई के बर्तनों में डीजल भरकर लेकर ले जाने  वाली तस्वीरें बताती हैं कि पैनिक बढ़ता जा रहा है. सरकार चेतावनी पर चेतावनी दे रही है पर कोई असर नहीं हो रहा है.पेट्रोलियम मंत्रालय ने 24x7 कंट्रोल रूम सक्रिय किया, 2700 से ज्यादा छापे मारे गए और 2000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं.सर्वदलीय बैठक में रक्षा मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री ने विपक्ष को आंकड़े दिखाकर भरोसा दिलाया है कि पेट्रोल-डीजल और घरेलू एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध है. विपक्ष को भी जिम्मेदार रवैया दिखाना होगा. जगह गैस सिलिंडरों के धरना प्रदर्शन से बचना होगा.

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