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‘बे’कार मरता, क्या-क्या करता...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली NCR में डीजल कार नहीं चलने देंगे. अब सुप्रीम कोर्ट तो सुप्रीम ही है. लॉर्डशिप सर-आंखों पर. तो पेट्रोल कार खरीद ली.

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पेट्रोल से इलेक्ट्रिक कार तक परेशान आम आदमी (Photo: ITG)
पेट्रोल से इलेक्ट्रिक कार तक परेशान आम आदमी (Photo: ITG)

पेट्रोल मंत्री ने पेट्रोल का अधिकार सड़क मंत्री को दे दिया है, जो असल में गन्ना मंत्री हैं. दोनों ने कहा शुद्ध पेट्रोल नहीं देंगे. पेट्रोल में मिलाने के लिए एथनॉल कम पड़ेगा तो आयात कर लेंगे. कच्चे तेल का आयात कम करके जो डॉलर बचाया, उससे सड़ा अनाज आयात कर लेंगे. पर पेट्रोल तो 20% मिलावट वाला ही देंगे. इसलिए E20 पेट्रोल कार खरीद ली. 

अब इस नए पेट्रोल में मिलावट इतनी है कि फ्यूल पंप ख़राब हो गया. गाड़ी का इंजन खराब हो गया. लोग पेट्रोल पंप वाले को गरिया रहे हैं, वो टैंकर वाले को गरिया रहा है. पेट्रोल पंप के भूमिगत टैंक में जंग लग रहा है क्योंकि उसमें पानी चला जा रहा है. कार अलग सुबक रही है. कसम से, किच्चान मची है.

इतनी बड़ी चेन में कौन पकड़ेगा, किसको पकड़ेगा? चलो, झंझट खतम करो और नई इलेक्ट्रिक कार ले लो. पर बला ऐसे कहां टलती है. आफत फिर भी सिर उठाए, मुंह बाए हमारे हिस्से खड़ी मिली. हाउसिंग सोसाइटी ने कहा चार्जिंग सिस्टम नहीं लगेगा, उससे आग लग जाती है. सोसाइटी वाले कह रहे हैं कहीं और नया घर ले लो. 

इधर पेट्रोल वाली गाड़ी कहीं भी खड़ी हो जा रही. फिर उसे हटाने के लिए टो-अवे वाली गाड़ी बुलानी पड़ रही. ढुलाई की गई गाड़ी अब सर्विस सेंटर में खड़ी रह रही. इस तरह पेट्रोल की बचत हो रही है. मोदीजी आह्वान करते, उसके पहले ही गडकरी जी ने इंतजाम कर दिया. ऐसी दूरदर्शिता से ही देश चलेगा. 

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दादा कोंडके कहे रहे आगे की सोच. काहे कि, तुम्हारे पीछे क्या हो रहा है, देख लोगे तो तन बदन में आग लग जाएगी. सदन में नहीं लगेगी. वहां ठण्डक बनी रहती है. शोर कितना भी हो, सेंट्रलाइज्ड कूलिंग सबका निवारण कर देती है. कुहुकता हुआ कुकर आखिर ठंडा पड़ ही जाता है. वहां आपके चुने गए चन्द्रवदन कोई क्रंदन नहीं करेंगे. क्योंकि चंद्रवदन तेल का पंप चलाते हैं, गाड़ी तो सरकार चलाती है. 

अरे क्रंदन तो आपके माथे पर लिखा है जिसे वो पढ़ चुका है. तीन आखर का ही है वो भी. कोई आखर आपको नहीं अखरेगा. आप यूज़्ड टू हैं. जो लिखा है कपार पर, नहीं बदलेगा. आपका भाग्य, बाबासाहब का संविधान, और सरकार की नीतियां. सरकारें आएंगी, जाएंगी. पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी. मगर ये देश रहना चाहिए. गाड़ियां आएंगी, जाएंगी, पॉलिसियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर इथेनॉल रहना चाहिए. 

काहे कि, एक बार हमने कमिटमेंट कर दी तो अपने आप की भी नहीं सुनते. किसी के बाप की नहीं सुनते. जनता का फीडबैक घंटा सुनेंगे, मीटिंग की मिनिट्स लेंगे और एक सेकंड में एंटी नेशनल कहकर खारिज़ कर देंगे. सब सहन करो. अपने कर्मों का फल वहन करो. वाहन हो गारत, बोलो जय भारत. देश के लिए इतना नहीं कर सकते. तुम पर लाख लानत.

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