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इंदौर में गंदे पानी से मौत का मामला BJP ने और 'गंदा' किया, क्या कांग्रेस हिसाब साफ कर पाएगी?

इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों पर राजनीति तेज हो गई है. मौत के आंकड़ों को लेकर मध्‍यप्रदेश की भाजपा सरकार सवाल टालने की कोशिश कर रही है, तो पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए कांग्रेस न्याय यात्रा निकालने की तैयार कर रही है. बताया गया है कि राहुल गांधी भी न्याय यात्रा में शामिल हो रहे हैं.

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महिला कांग्रेस के कैंडल मार्च के बाद राहुल गांधी इंदौर न्याय यात्रा में हिस्सा लेंगे. (Photo: PTI)
महिला कांग्रेस के कैंडल मार्च के बाद राहुल गांधी इंदौर न्याय यात्रा में हिस्सा लेंगे. (Photo: PTI)

इंदौर के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए कांग्रेस न्याय यात्रा निकालने जा रही है. कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी भी 11 जनवरी को प्रस्तावित न्याय यात्रा में शामिल होंगे. 2024 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस की तरफ से एक लंबी न्याय यात्रा निकाली गई थी, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी ने किया था. 

देश के सबसे साफ सुथरे शहर का सात बार खिताब जीत चुका इंदौर फिलहाल गंदे पानी की वजह से हुई मौतों को लेकर चर्चा में है. सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मौतें भी आंकड़ों में उलझकर रह गई हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव कह रहे हैं कि एक भी मौत दुखदायी होती है, तो राहुल गांधी का कहना है, ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, जवाबदेही की मांग है. 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ऐसे मौकों पर अक्सर लोगों के बीच पहुंचते हैं. मध्य प्रदेश में किसानों की मौत का मामला हो, या यूपी के हाथरस में हुई भगदड़ में मौतों का मामला - राहुल गांधी पहुंचते जरूर हैं. और फिर, मामले को संसद में उठाने का वादा भी करते हैं. इंदौर की घटना भी उसी कड़ी में शामिल होने जा रही है.

इंदौर में कांग्रेस की न्याय यात्रा

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इंदौर में कांग्रेस की न्याय यात्रा की तैयारी जोर शोर से चल रही है. मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने यात्रा की कमान अपने हाथ में ले रखी है. इंदौर के गांधी भवन में पिछले हफ्ते जीतू पटवारी ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक भी की थी. बताते हैं, न्याय यात्रा में शामिल होने के लिए पूरे प्रदेश से कांग्रेस कार्यकर्ता इंदौर पहुंचने वाले हैं. सुना है इंदौर में कांग्रेस की बड़े प्रदर्शन की तैयारी है. 

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्‍जन वर्मा का कहना है कि राहुल गांधी भी इंदौर न्याय यात्रा में शामिल हो सकते हैं. ये भी सुनने में आया है कि राहुल गांधी भागीरथपुरा जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने की भी कोशिश करेंगे. 

राहुल गांधी बोले, ‘फोकट’ सवाल नहीं, जवाबदेही की मांग है

इंदौर में हुई मौतों के मामले में राहुल गांधी का बयान पहले ही आ चुका है. सोशल साइट X पर राहुल गांधी ने एक बड़ी पोस्ट लिखी थी, और मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार के साथ साथ गैर-जिम्मेदाराना बयान देने वाले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी कठघरे में खड़ा किया था. 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंदौर की घटना के लिए बीजेपी की डबल इंजन सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्ण की नींद में सोता रहा. राहुल गांधी ने कहा, घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं - और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान... जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया.

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इंदौर में हुई मौतों पर राहुल गांधी के कई सवाल हैं, सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?

और फिर कैलाश विजयवर्गीय के रिएक्शन पर कटाक्ष के साथ राहुल गांधी का कहना है, ये ‘फोकट’ सवाल नहीं... ये जवाबदेही की मांग है. साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है. 

असल में, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में दूषित जल से हुई मौतों पर एक पत्रकार के सवाल पर कहा था, फोकट का सवाल मत पूछो. बाद में जब बवाल ज्यादा होने लगा तो कैलाश विजयवर्गीय ने माफी भी मांग ली थी.

सवाल अब भी कायम, आखिर इंदौर कितनी मौतें हुईं?

24 दिसंबर, 2025 से 6 जनवरी, 2024 के बीच इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हुई मौतों की वजह दूषित पानी को माना गया. जांच अब भी जारी है, और अलग अलग ऐंगल से वजह जानने की कोशिश हो रही है. शुरू में तो यही बताया गया कि शौचालय का गंदा पानी मिल जाने की वजह से पीने का पानी दूषित हो गया, और जानलेवा साबित हुआ. लेकिन, अब जांच इस हिसाब से भी की जा रही है कि कहीं स्थानीय बोरवेल कनेक्शन के कारण पानी दूषित तो नहीं हुआ.

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मौतों की वजह अपनी जगह है, लेकिन बड़ा सवाल ये भी उठाया जा रहा है कि कितने लोगों की मौत हुई है? 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से बताया गया है कि कुल 8 लोगों की मौत हुई है, लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने अलग सवाल खड़ा कर दिया है. सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि मौत के शिकार लोगों के 18 परिवारों को 2-2 लाख का मुआवजा दिया गया है. 

फिर तो सवाल ये भी है कि अगर 8 लोगों की ही मौत हुई है, तो जिला प्रशासन ने 18 लोगों को मुआवजा क्यों दे दिया? ये 10 और लोग कौन हैं, जिनको मुआवजा दिया गया है? रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन पीड़ित परिवारों को बैंक खाते खुलवाने और जरूरी कागजी खानापूर्ति में मदद भी कर रहा है. 

सवाल उठने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव राजनीतिक तरीके से समझाने की कोशिश करते हैं. कहते हैं, एक भी जीवन का नुकसान हमारे लिए बेहद पीड़ादायक है.

अपनी दलील आगे बढ़ाते हुए मोहन यादव कहते हैं, हम आंकड़ों में नहीं जाते... प्रशासन अपनी प्रक्रियाओं का पालन करता है... आम तौर पर, केवल उन्हीं मामलों को वैध आंकड़ों में माना गया, जिनमें पोस्टमॉर्टम किए गए थे.

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रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से ये भी बताया गया है कि कुछ परिवारों ने पोस्टमॉर्टम नहीं कराया. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी मौत के आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई है. सरकार की तरफ से ये समझाने की कोशिश हो रही है कि मेडिकल बोर्ड मृतकों की अभी गिनती कर रहा है. तर्क ये है कि प्राकृतिक मौतों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की कमी के कारण प्रक्रिया जटिल हो जाती है.

अधिकारी के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर ये फैसला लिया गया था कि फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही मौत के जो भी मामले रिपोर्ट किए गए हैं, चेक दे दिए जाएं. फैसले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी शामिल बताया गया है. मौतों की सही संख्या आधिकारिक तौर पर डेथ ऑडिट रिपोर्ट के बाद ही बताई जाएगी. आपको याद होगा, शुरू में चेक लेकर पहुंचे कैलाश विजयवर्गीय को विरोध के कारण बैरंग लौटना पड़ा था.

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