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भोजशाला की सरस्वती मूर्ति की वापसी सिर्फ दावा? RTI में खुलासा- ASI के पास कोई रिकॉर्ड नहीं

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर की देवी सरस्वती की मूर्ति को लंदन से भारत वापस लाने के प्रयासों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. ASI ने RTI के जवाब में बताया कि उनके पास ब्रिटिश म्यूजियम से मूर्ति वापसी के कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड नहीं हैं. बता दें कि लंबे समय से मूर्ति की वापसी को लेकर मांगें चल रही हैं, लेकिन ASI के मुताबिक इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बातचीत दर्ज नहीं हैं.

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माता सरस्वती की मूर्ति को ब्रिटिश लंदन ले गए थे. (Photo: ITG)
माता सरस्वती की मूर्ति को ब्रिटिश लंदन ले गए थे. (Photo: ITG)

मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर की देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति को लंदन से भारत वापस लाने को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बताया है कि उसके पास लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से इस मूर्ति को वापस लाने की कोशिशों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. ASI ने एक RTI के जवाब में इसका खुलासा किया है.

ये खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही हफ्ते पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मूर्ति को वापस लाने पर विचार करने का सुझाव दिया था.

इंडिया टूडे ने एएसआई से इस मामले में चार जानकारियां मांगी थीं. इनमें मूर्ति वापसी के प्रयासों की मौजूदा स्थिति, ब्रिटिश म्यूजियम के साथ हुआ पत्र-व्यवहार, इस मुद्दे पर हुई बैठकें और भारत के दावे की कानूनी और राजनयिक स्थिति की जानकारी शामिल थी.

ASI के पास कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं

RTI के जवाब में एएसआई के भोपाल सर्कल ने जवाब दिया, 'लंदन म्यूजियम से सरस्वती की मूर्ति वापस लाने से संबंधित कोई पत्र-व्यवहार नहीं हुआ है. इसलिए इससे जुड़ा कोई भी दस्तावेज या जानकारी मौजूद नहीं है.' इस जवाब से साफ है कि एएसआई के पास इस मामले पर बातचीत या बैठकों का कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं है.

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हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा था दबाव

ये आरटीआई जवाब इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि धार के भोजशाला-कमल मौला परिसर पर 15 मई को ही हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है. अदालत ने अपने फैसले में भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया था. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति को वापस लाने की मांगों पर विचार कर सकती है. 

हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद इस मामले के मुख्य याचिकाकर्ता 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा था. संस्था ने मांग की थी कि इस मूर्ति को वापस लाने के लिए कानूनी कदम उठाए जाएं. उन्होंने दलील दी कि ये मूर्ति सिर्फ एक पुरातात्विक कलाकृति नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है.

सालों से उठ रही है मूर्ति वापसी की मांग

वाग्देवी की मूर्ति 11वीं सदी की मानी जाती है, जिसका संबंध राजा भोज के काल से है. हिंदू संगठनों का कहना है कि ब्रिटिश शासन के दौरान अंग्रेज इसे अपने साथ ले गए थे. साल 2022 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान इस मूर्ति को वापस लाने के लिए कोशिश करने का भरोसा दिया था.

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इससे पहले जुलाई 2003 में ये मामला संसद में भी उठा था, तब तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री विनोद खन्ना ने कहा था कि सांस्कृतिक संपत्तियों को वापस लाने के लिए द्विपक्षीय स्तर पर कोशिश की जा रही है.

यह भी पढ़ें: धार में बनेगा भव्य 'मां सरस्वती लोक', आंदोलन के शहीदों को 5-5 लाख... CM मोहन यादव ने भोजशाला में की आरती

कैसे लंदन पहुंची माता सरस्वती की मूर्ति?

इतिहास और दस्तावेजों के मुताबिक, साल 1875 में धार के भोजशाला परिसर के पास खुदाई के दौरान ये वाग्देवी की मूर्ति मिली थी. इसके बाद साल 1880 में एक ब्रिटिश अधिकारी इस ऐतिहासिक मूर्ति को अपने साथ इंग्लैंड ले गया. बाद में ये लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम का हिस्सा बन गई.

ब्रिटिश म्यूजियम के रिकॉर्ड की मानें तो ये मूर्ति उन्हें एक ब्रिटिश अधिकारी ने तोहफे में दी थी, जिसे ये भोजशाला के पास खंडहरों से मिली थी. वहीं, अब इस आरटीआई खुलासे के बाद मूर्ति की घर वापसी के सरकारी दावों पर नए सवाल खड़े हो गए हैं.

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