मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है. कहानी दो नर चीतों की है. एक भारत में पैदा हुआ और दूसरा हजारों किलोमीटर दूर बोत्सवाना से भारत लाया गया. दोनों अलग देशों से हैं, अलग परिस्थितियों में पले-बढ़े हैं और आपस में भाई भी नहीं हैं. लेकिन कूनो में दोनों के बीच ऐसी दोस्ती हुई कि वे एक-दूसरे की मौजूदगी में सहज नजर आने लगे.
ये दोनों चीते हैं भारत में जन्मा 16 महीने का KNG-23 और बोत्सवाना से आया 2 साल का CCB-4... इस कहानी की शुरुआत 30 मई 2026 से होती है. मादा चीता निर्वा और उसके शावकों को मार्च में खुले जंगल में छोड़ा गया था. कुछ समय बाद KNG-23 अपनी मां, एक भाई और एक बहन से अलग हो गया. खुले जंगल में रहने के दौरान KNG-23 घायल भी हो गया. इलाज के लिए उसे वापस एक बाड़े में शिफ्ट किया गया. इसी बाड़े में पहले से बोत्सवाना से आया नर चीता CCB-4 मौजूद था.
CCB-4 को 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से भारत लाया गया था. उसकी दोनों बहनों को पहले ही खुले जंगल में रिलीज किया जा चुका था. यानी वह भी उस समय अकेला था. फिर कूनो में दोनों की मुलाकात हुई.
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आमतौर पर दो नर चीतों का एक-दूसरे के साथ व्यवहार कई बातों पर निर्भर करता है. लेकिन KNG-23 और CCB-4 के बीच जो देखने को मिला, वह कूनो प्रबंधन के लिए खास था. दोनों एक-दूसरे की मौजूदगी में सहज रहने लगे. उनके बीच आक्रामकता देखने को नहीं मिली. किसी ने दूसरे को भगाने की कोशिश नहीं की. सबसे खास बात यह रही कि दोनों ने शांतिपूर्वक भोजन भी साझा किया.
यानी जहां टकराव की उम्मीद हो सकती थी, वहां दोनों के बीच दोस्ताना व्यवहार देखने को मिला. इस कहानी को खास बनाने वाली बात सिर्फ यह नहीं है कि दो नर चीते साथ रह रहे हैं. असल बात यह है कि दोनों का बैकग्राउंड बिल्कुल अलग है. KNG-23 भारत में पैदा हुआ है, जबकि CCB-4 बोत्सवाना से भारत लाया गया है. दोनों भाई नहीं हैं. उनका पालन-पोषण भी साथ-साथ नहीं हुआ. दोनों प्रोजेक्ट चीता के तहत अलग-अलग जगहों और परिस्थितियों से कूनो पहुंचे हैं.
इसके बावजूद दोनों के बीच ऐसा व्यवहार सामने आया है, जिसे कूनो प्रबंधन बेहद खास मान रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, अगर यह रिश्ता आगे चलकर एक स्थिर गठबंधन में बदलता है, तो यह प्रोजेक्ट चीता के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल हो सकता है. अधिकारियों का यह भी कहना है कि अलग-अलग देशों से आए दो असंबंधित नर चीतों के बीच इस तरह के गठबंधन का यह पहला मामला हो सकता है.
कूनो में अभी कितने चीते हैं?
प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक, कूनो में फिलहाल कुल 49 चीते हैं. इनमें 17 चीते खुले जंगल में हैं, जिनमें 10 नर और 7 मादा चीते शामिल हैं. वहीं 32 चीते सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में हैं. इनमें 5 नर, 8 मादा और एक साल से कम उम्र के 19 शावक शामिल हैं. उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक, पिछले चार साल में प्रजनन करने वाली मादाओं की स्थापना और दूसरी पीढ़ी के शावकों का सफलतापूर्वक जीवित रहना इस बात के संकेत हैं कि प्रोजेक्ट चीता अब अपने सुदृढ़ीकरण में आगे बढ़ रहा है.
इसी सफर के बीच KNG-23 और CCB-4 की दोस्ती कूनो की कहानी में एक नया अध्याय जोड़ रही है. दो अलग देशों से आए दो नर चीते, जो न भाई हैं और न साथ पले-बढ़े, लेकिन फिलहाल एक-दूसरे के साथ सहज हैं और भोजन तक साझा कर रहे हैं.