इंदौर के भागीरथपुरा में पीने के पानी में सीवरेज मिलने से फैले डायरिया ने महामारी का रूप ले लिया है. बुधवार को 62 वर्षीय खूबचंद बंधैया की मौत के बाद क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है. परिजनों का आरोप है कि समय पर एम्बुलेंस और इलाज न मिलने के कारण उनकी जान गई.
इस मामले को मिलाकर स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि इलाके में एक महीने पहले शुरू हुए दूषित पीने के पानी से फैले डायरिया के कारण अब तक 29 लोगों की जान जा चुकी है.
हालांकि, राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच को सौंपी गई डेथ ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत पानी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या के कारण हो सकती है.
मृतक के परिवार वालों के अनुसार, भागीरथपुरा के रहने वाले खूबचंद बंधैया का उल्टी और डायरिया का इलाज चल रहा था. उनका अंतिम संस्कार बुधवार को किया गया.
बंधैया के बेटे रोहित ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, "मेरे पिता पिछले 15-20 दिनों से दूषित पीने के पानी के कारण उल्टी और डायरिया से पीड़ित थे. हम उन्हें भागीरथपुरा के अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर ले गए, जहां उन्हें दवा दी गई. मंगलवार को हमारे घर पर उनकी मौत हो गई."
रोहित ने दावा किया कि उसने हेल्थ सेंटर के अधिकारियों से अपने पिता को अस्पताल में भर्ती करने का अनुरोध किया था, लेकिन उनके घर एंबुलेंस नहीं भेजी गई.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भागीरथपुरा पानी के मुद्दे की न्यायिक जांच के लिए हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है.
हाई कोर्ट ने आयोग को न्यायिक जांच शुरू होने की तारीख से चार हफ्तों के भीतर एक अंतरिम रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है.
भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी के कारण उल्टी और डायरिया का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था.
अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में 51 ट्यूबवेल में दूषित पानी पाया गया और टेस्ट में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई. इस बैक्टीरिया के कारण भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला.
उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में नगर निगम की पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज हो गया था, जिससे एक शौचालय का गंदा पानी पानी की सप्लाई में मिल गया था.