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साहित्य आज तक में मशहूर दास्तानगो दारेन शाहिदा से सुनें दिलचस्प किस्से...

यदि आपको किस्से कहानियां सुनने-सुनाने का शौक है तो साहित्य आज तक द्वारा कराए गए दास्तानगोई में जरूर आएं. इस कार्यक्रम में दाखिला बिल्कुल मुफ्त है. जानें आखिर क्या है दास्तानगोई और आप यहां क्यों जाएं...

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Darain Shahidi
Darain Shahidi

उर्दू में लंबी कहानियां सुनाने की विधा को दास्तानगोई कहा जाता है. हमनें भी अपनी दादी-नानी से किस्से और कहानियां खूब सूनीं. हालांकि उसे दास्तानगोई के बजाय किस्सागोई कहना ज्यादा उचित होगा. हम अपने बुजुर्गों से कहानियां सुनते-सुनते ही लुढ़क जाया करते, मगर बचपने में सुनी गई उन कहानियों की याद अब भी धुंधली नहीं हुई है. हम अपने संगी-साथियों और जूनियर्स के साथ उन्हीं किस्सों को तो बार-बार याद करते रहते हैं. पुरानी किस्से-कहानियों को कुरेदना ही तो नोस्टैलजिया है.

यह विधा जहां एक तरफ धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर है वहीं दूसरी तरफ कुछ जहीन लोग इसमें फिर से जान फूंकने की कवायद में लग गए हैं. इस अजीम-ओ-शान कला ने बीते साल अपने पुनरुत्थान के दस साल पूरे कर लिए हैं. इस भूला दी गई विधा को फिर से स्थापित करने में जहां कुछ युवा पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. वहीं सामान्य जन भी तेजी से इस ओर मुड़े हैं. लोग ऐसे कार्यक्रमों में भारी संख्या में शरीक हो रहे हैं और साथ-ही-साथ इन्हें यू ट्यूब जैसे माध्यमों पर भी खूब पसंद किया जा रहा है.

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यहां हम आपको फिर से बताते चलें कि दास्तानगोई उर्दू में दास्तान यानी लंबी कहानियां सुनाने की कला है. उर्दू में अलिफ लैला, हातिमताई वगैरह कई दास्तानें सुनाई जाती रहीं मगर इनमें सबसे मशहूर हुई ‘दास्ताने अमीर हमजा’, जिसमें हजरत मोहम्मद के चचा अमीर हमजा के का बयान होता है. मुगलों के जमाने में हिंदुस्तान आई ये कला 18वीं और 19वीं शताब्दी में अपने चरम पर थी. बाद के सालों में इसमें गिरावट आई और 1928 में आखिरी दास्तानगो मीर बाकर अली के इंतकाल के साथ ही ये कला पूरी तरह मिट गई.
हालांकि इस विधा को फिर से जीवित करने और के बीच ले जाने का जिम्मा महमूद फारूकी साब ने फिर से उठाया है. वे इस पर फिर से काम कर रहे हैं. इस विधा में अब धीरे-धीरे महिलाएं भी अपने हुनर की आजमाइश कर रही हैं.


अब आप सोच रहे होंगे कि हम इतना सबकुछ क्यों और किसलिए बता रहे हैं. तो हम बता दें कि देश का नंबर एक खबरिया चैनल आज तक एक साहित्यिक समागम कराने जा रहा है. यह आयोजन वे दिल्ली में इंडिया गेट के नजदीक इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर ऑर्ट में तारीख 12-13 नवंबर को कराने जा रहे हैं. यहां उन्होंने दास्तानगोई को लेकर भी एक खास कार्यक्रम रखा है. इस कार्यक्रम में आप दारेन शाहिदी से रू-ब-रू हो सकेंगे. दास्तानगो होने के अलावा वे एक बेहतरीन पत्रकार भी हैं. यहां वे दास्तान-ए-चौबोली विषय पर अपनी बात रखेंगे.

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आप 12 नवंबर (शनिवार) शाम के 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट (18:00 - 19:30) के बीच (मुख्य लॉन- स्टेज1) में उनसे रू-ब-रू हो सकेंगे.


मुफ्त रजिस्ट्रेशन के लिए यहां


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