डेस्क जॉब करने वाले और घंटों स्क्रीन पर समय बिताने वाले लोग अक्सर गर्दन और कंधों के दर्द से परेशान रहते हैं. वहीं कुछ लोग इन दर्द को सामान्य थकान या स्ट्रेस मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन स्पाइन स्पेशलिस्ट का कहना है कि जब कोई फोन या लैपटॉप देखने के लिए अपने सिर को आगे की तरफ झुकाता है तो उसकी गर्दन पर पड़ने वाला दबाव सामान्य से कई गुना बढ़ जाता है. यदि आपका सिर 45 डिग्री के एंगल पर झुकता है तो आपकी गर्दन पर करीब 22 किलो का भारी दवाब आता है. यह दबाव बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी गर्दन पर एक भारी सूटकेस, जिम में मौजूद 22.5 किलो का डम्बल या 4 बड़ी बॉलिंग बॉल्स गर्दन पर लादकर घूम रहे हों.
रीढ़ की हड्डी पर 'टेक्स्ट नेक' का साइलेंट अटैक
आमतौर पर जब हमारा सिर बिल्कुल सीधा (न्यूट्रल पोजीशन) होता है तो गर्दन पर सिर्फ 5 से 6 किलोग्राम का वजन पड़ता है. लेकिन यदि स्क्रीन देखने के लिए जैसे ही हम झुकते हैं तो रीढ़ की हड्डी पर यह लोड तेजी से बढ़ता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसे टेक्स्ट नेक या फॉर्वर्ड हेड पोस्चर कहा जाता है.
हेल्थलाइन का कहना है कि लगातार कई घंटों तक इस पोजीशन में बैठने से सर्वाइकल स्पाइन पर बुरा असर पड़ता है. यह दबाव रीढ़ की हड्डी को समय से पहले बूढ़ा बना रहा है और रीढ़ की हड्डियों के बीच की डिस्क को धीरे-धीरे डैमेज कर रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिस्क का खराब होना कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है बल्कि यह सालों की खराब आदतों का नतीजा होता है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
स्पाइन स्पेशलिस्ट के मुताबिक, इस समस्या के शुरुआती लक्षण काफी सामान्य होते हैं जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए. मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में स्पाइन सर्जरी के सीनियर कंसलटेंट डॉ. साकेत गोयल का कहना है, जब कोई फोन या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हुए लगातार इस गलत पोजीशन में बैठते हैं तो उनके सिर के निचले हिस्से में हल्का दर्द और कंधों में जकड़न शुरू हो जाती है. इसके अलावा, बार-बार गर्दन चटकाने की इच्छा होना और सिर के पीछे से शुरू होकर आगे की तरफ आने वाला सिरदर्द इसके सबसे शुरुआती और मुख्य लक्षण हैं. अक्सर लोग इन सिम्पटम्स को मामूली समझकर इग्नोर कर देते हैं जो आगे चलकर एक बड़ी बीमारी का रूप ले लेता है.
डिस्क डैमेज होने का खतरा
जब लोग इस दर्द से बचने के लिए अपनी गर्दन को एक तरफ झुकाकर या कंधों को सिकोड़कर बैठने लगते हैं तो मसल्स और जॉइंट्स पर असमान दबाव पड़ने लगता है. लंबे समय में यह आदत स्पाइनल डिस्क प्रीयूजन और गंभीर नसों की समस्याओं का कारण बन सकती है.
डॉ. साकेत गोयल ने समझाया, जब गर्दन और कंधों में दर्द शुरू होता है तो लोग अनजाने में इस दर्द से बचने के लिए और भी गलत तरीके से बैठने लगते हैं. कोई अपनी गर्दन को एक तरफ झुका लेता है तो कोई कंधों को सिकोड़ लेता है. इस वजह से रीढ़ की हड्डी के जॉइंट्स और मसल्स पर असमान दबाव पड़ने लगता है.
लंबे समय तक ऐसा होने से स्पाइनल डिस्क प्रीयूजन यानी डिस्क का अपनी जगह से खिसकना और नसों में भयंकर कंप्रेशन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा हो सकती हैं जिसका इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है.
स्पाइन को बचाने के आसान टिप्स
इस छुपे हुए खतरे से बचने के लिए डॉक्टर ने कुछ बेहद आसान लाइफस्टाइल बदलावों की सलाह दी है. इसके लिए आपको किसी जिम जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ सही आदतें अपनानी होंगी. सबसे पहले अपने लैपटॉप या कंप्यूटर मॉनिटर को हमेशा आई-लेवल (आंखों के सामने) पर रखें ताकि गर्दन को झुकाना न पड़े.
रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए '45-5 का नियम' अपनाएं. इसका मतलब है कि हर 45 मिनट की डेस्क जॉब के बाद 5 मिनट का ब्रेक लें और थोड़ा मूवमेंट करें. इस दौरान आप थोड़ा टहल सकते हैं या अपने कंधों को रोल कर सकते हैं. यह छोटा सा बदलाव आपकी स्पाइनल हेल्थ को लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकता है.