आज के समय में मार्केट में मिलने वाली अधिकतर सब्जियां बाहर से जितनी ताजी और चमकदार दिखती हैं, जरूरी नहीं कि वे अंदर से भी उतनी ही प्योर हों. अधिक फायदा कमाने और जल्दी पैदावार के चक्कर में कई वेंडर्स सब्जियों को चमकाने के लिए और जल्दी साइज बढ़ाने के लिए खतरनाक केमिकल्स और सिंथेटिक कलर्स का सहारा लेते हैं. लेकिन इस समस्या का एक बेहद आसान तरीके से पहचान सकते हैं कि कौन सी सब्जी में केमिकल का इस्तेमाल हुआ है. हमने जब सब्जी उगाने वाले भैया से पूछा तो उन्होंने कुछ ऐसे देसी तरीके बताए जिनकी मदद से आप सिर्फ देखकर ही यह अंदाजा लगा सकते हैं कि सब्जी नेचुरल है या उसे केमिकल से चमकाया गया है.
अधिक चमक और एक जैसा रंग
माली भैया ने बताया, यदि मार्केट में कोई सब्जी जरूरत से अधिक चमक रही हो, उसका हरा रंग एकदम गहरा या बिना किसी टेक्सचर वाला है तो सावधान रहने की जरूरत है. प्राकृतिक रूप से उगी सब्जियों का रंग कभी भी पूरी तरह से एक समान नहीं होता. धूप और हवा के असर से उनमें थोड़े बदलाव दिखते हैं.
सब्जियों को फ्रेश दिखाने के लिए मैलाकाइट ग्रीन और कॉपर सल्फेट जैसे जहरीले रंगों का इस्तेमाल किया जाता है. यदि परवल, भिंडी या कोई हरी पत्तीदार सब्जी एक्स्ट्रा ब्राइट दिखे तो समझ लें कि उसमें मिलावट की गुंजाइश ज्यादा है.
कॉटन टेस्ट से पकड़ें मिलावट
मिलावटी सब्जियों पर लगे केमिकल के रंग को पहचानने का सबसे आसान तरीका है लिक्विड पैराफिन या नॉर्मल पानी और तेल का टेस्ट. सब्जी खरीदने से पहले या घर लाकर एक छोटा सा कॉटन का टुकड़ा लें फिर इसे हल्के से पानी या थोड़े से कुकिंग ऑयल में डुबोएं और सब्जी की बाहरी परत पर रगड़ें.
यदि रगड़ने के बाद कॉटन पर हरा, लाल या कोई अन्य रंग उतर आता है तो वह इस बात का सीधा सबूत है कि सब्जी पर आर्टिफिशियल कलर का स्प्रे किया गया है. हरी मिर्च और मटर में यह मिलावट बहुत ज्यादा देखी जाती है.
बनावट और स्मेल से पहचानें
केमिकल वाली सब्जियों की एक बड़ी पहचान यह भी है कि वे बाहर से तो पकी और चमकदार दिखती हैं लेकिन काटने पर अंदर से बिल्कुल कच्ची या बेस्वाद निकलती हैं. इसके अलावा नेचुरल सब्जियों में एक हल्की सी मिट्टी या अपनी प्राकृतिक खुशबू होती है. इसके विपरीत जिन सब्जियों को केमिकल से पकाया या धोया जाता है, उनमें से अजीब सी तीखी या कड़वी स्मेल आती है.
अच्छी सेहत के लिए हमेशा बहुत ज्यादा परफेक्ट दिखने वाली सब्जियों के बजाय नॉर्मल दिखने वाली सब्जियों को ही प्राथमिकता दें क्योंकि उनमें इस तरह के केमिकम का इस्तेमाल होने की संभावना कम होती है.