How coconut water formed: नारियल पानी शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है जिसे कई लोग रोजाना भी पीते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि कच्चा नारियल हो या पका हुआ नारियल, उनके अंदर पानी कहां से आता है? असल में, नारियल के पेड़ की जड़ें जमीन से पानी और जरूरी मिनरल्स को एब्जॉर्ब करती हैं. यह पानी पेड़ के तने में मौजूद जाइलम (Xylem) टिशू के जरिए ऊपर नारियल तक पहुंचता है. यह कोई बाहर का पानी नहीं है बल्कि पेड़ द्वारा तैयार किया गया एक फिल्टर्ड और पोषक तत्वों से भरपूर लिक्विड होता है. आइए इसकी पूरी प्रोसेस समझ लीजिए.
कैसे बनता है नारियल का पानी?
नारियल का पानी असल में एक एंडोस्पर्म (Endosperm) है जो बढ़ते हुए नारियल के लिए भोजन या पोषण का काम करता है. जब नारियल छोटा होता है तो इसके अंदर एक जेली जैसा पदार्थ होता है. जैसे-जैसे नारियल बड़ा होता है पेड़ अपनी जड़ों के जरिए पानी खींचकर इसे नारियल के अंदर भेजता है. यह पानी वहां मौजूद शुगर और मिनरल्स के साथ मिलकर नारियल पानी का रूप ले लेता है.
क्या पकने पर पानी कम हो जाता है?
जैसे-जैसे नारियल मैच्योर होता है नारियल के अंदर की परत पर सफेद मलाई जैसी परत जमने लगती है. वैज्ञानिक भाषा में कहें तो एंडोस्पर्म का एक हिस्सा धीरे-धीरे सख्त मलाई (नारियल की गिरी) में बदल जाता है. इसी वजह से जब आप एक कच्चा हरा नारियल खोलते हैं तो उसमें पानी ज्यादा होता है लेकिन एक पूरी तरह से पके हुए भूरे नारियल में पानी की मात्रा कम हो जाती है क्योंकि वह पानी का हिस्सा गिरी बनने में इस्तेमाल हो चुका होता है.
ये नेचर की इंजीनियरिंग है
नारियल के पेड़ की जड़ें जमीन में 1 से 5 मीटर तक गहरी होती हैं जो जमीन के अंदर के पानी को सोखकर उसे ऊपर तक पहुंचाती हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह से नेचुरल है. इसमें किसी भी तरह का बाहरी इंटरवेंशन नहीं होता. यह पानी नारियल के अंदर के भ्रूण (Embryo) को पोषण देने के लिए इकट्ठा होता है ताकि वह भविष्य में एक नए नारियल के पेड़ के रूप में विकसित हो सके.