आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में हर किसी की लाइफस्टाइल और खान-पान का सीधा उनकी सेहत पर पड़ रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं आज की पीढ़ी अपने माता-पिता के मुकाबले काफी तेजी से बूढ़ी हो रही है. इस फास्ट एजिंग प्रोसेस की वजह से ही कम उम्र के लोगों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है.
रिसर्चर्स का कहना है कि यह सिर्फ उम्र बढ़ने का मामला नहीं है बल्कि हमारे शरीर की बायोलॉजिकल एज हमारी एक्चुअल उम्र से काफी ज्यादा हो गई है जो चिंता का विषय है. आखिर इसके पीठे के कारण क्या हैं, इस बारे में जान लीजिए.
क्यों तेजी से बूढ़ा हो रहा है शरीर?
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की इस स्टडी में पाया गया है कि आज की जनरेशन में बायोलॉजिकल एजिंग का लेवल पहले की तुलना में कहीं ज्यादा है. आसान भाषा में समझें तो हमारा शरीर अपनी उम्र से कहीं ज्यादा पुराना दिखने और काम करने लगा है.
1965 से 1974 के बीच पैदा हुए लोगों में सिस्टमैटिक एजिंग का स्तर उससे पहले पैदा हुए लोगों की तुलना में 23 प्रतिशत ज्यादा था. वहीं 1990 के दशक में पैदा हुए लोगों में यह आंकड़ा और भी खतरनाक तरीके से बढ़ा है.
सिस्टेमिक एजिंग का आसान मतलब है पूरे शरीर का धीरे धीरे बूढ़ा होना. यानी बढ़ती उम्र का असर सिर्फ चेहरे पर नहीं, बल्कि दिल, दिमाग, हड्डियों, मसल्स और इम्यून सिस्टम समेत शरीर के कई हिस्सों पर एक साथ पड़ने लगता है.
कैंसर और तेजी से बढ़ती उम्र का कनेक्शन
स्टडी में यह साफ हुआ है कि बायोलॉजिकल एज और कैंसर का गहरा रिश्ता है. जब हमारे शरीर की कोशिकाएं समय से पहले बूढ़ी हो जाती हैं तो उनमें डीएनए डैमेज होने की संभावना बढ़ जाती है. हमारे खान-पान, पॉल्यूटेड हवा और तनाव के कारण शरीर को जो नुकसान होता है, वह दशकों का असर कुछ ही सालों में दिखा रहा है.
इम्यून सिस्टम या फैट टिश्यू का समय से पहले बूढ़ा होना फेफड़ों और कोलन कैंसर जैसे खतरों को सीधे तौर पर दावत दे रहा है.
क्या एजिंग को धीमा किया जा सकता है?
अच्छी बात यह है कि आप अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक को वापस ट्रैक पर ला सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव बड़े सॉल्यूशन बन सकते हैं. रेगुलर एक्सरसाइज करना, हेल्दी डाइट लेना, पूरी नींद लेना और स्मोकिंग से दूरी बनाना.
ये वो बेसिक ऑप्शंस हैं जो आपकी उम्र को नेचुरल तरीके से मैनेज करने में मदद करेंगे. अगर समय रहते हम इन आदतों को अपना लें तो शरीर में आने वाली इस तेजी को कंट्रोल किया जा सकता है.