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Cooking Oil: सरसों का तेल, ऑलिव या रिफाइंड, भारतीयों की कुकिंग के लिए कौन सा तेल है बेस्ट? डॉक्टर ने बताया

आमतौर पर खाना बनाते समय लोग तेलों को मिलाकर इस्तेमाल कर लेते हैं, खासतौर पर सरसों और रिफाइंड तेल मिलाकर खाना बनाते हैं. आइए इस बारे में डॉक्टर से जानते हैं कि क्या तेलों को मिलाकर खाना पकाना सही है या गलत, कौन-सा तेल दिल के मरीजों के लिए सही होता है.

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तेल को सीमित्र मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए (PHOTO:ITG)
तेल को सीमित्र मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए (PHOTO:ITG)

Is It Safe To Mix Cooking Oils: भारतीय खाने की जान उनके मसाले होते हैं, लेकिन मसालों के साथ-साथ हर इंडियन डिश में तेल का इस्तेमाल भी उसे टेस्टी बनाता है. हर सब्जी को तेल में बनाया जाता है, लेकिन दिल की सेहत के लिए तेल पर ही सवाल खड़े होते है. अक्सर ही लोगों के दिमाग में यह सवाल आता है कि खाना बनाने के लिए कौन-सा कुकिंग ऑयल सबसे बेहतर है, जो उनके दिल के लिए सबसे बढ़िया हो. 

आमतौर पर घरों में दो तरीके के तेलों का इस्तेमाल किया जाता है, चिकन-मटन और हैवी सब्जियों को बनाने के लिए सरसों का तेल और पराठे बनाने के लिए रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है. इतना ही नहीं, कई बार तो लोग जब तेल खत्म होने लगता है तो इन दोनों तेलों को मिक्स भी कर देते हैं.

ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या इस तरह तेलों को मिलाना सही है या इसका खाने पर कोई साइड इफेक्ट पड़ता है. इस बारे में नवी मुंबई के वाशी में फोर्टिस हिरानंदानी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ. प्रशांत पवार ने Aajtak.in से बातचीत की. 

गलत तेल से हो सकती है बीमारियां

उन्होंने सबसे पहले कहा, 'कुकिंग ऑयल को सिर्फ स्वाद के आधार पर नहीं  बल्कि उसके पोषण और स्मोक पॉइंट के आधार पर ही खरीदना चाहिए. सही तेल दिल की सेहत को बेहतर बना सकता है, जबकि गलत तेल शरीर में खराब फैट बढ़ाकर कई बीमारियों का कारण बन सकता है.' 

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क्या अलग-अलग तेलों को मिलाकर खाना चाहिए?

डॉ. पवार के मुताबिक, अलग-अलग प्रकार के तेलों को मिलाकर इस्तेमाल करना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है. इसे ब्लेंडिंग ऑयल कहा जाता है. कई लोग सरसों, सोयाबीन या अन्य तेलों को मिलाकर खाना बनाते हैं ताकि खाने का टेस्ट बेहतर हो और उसमें अलग-अलग मिनरल्स भी मिल सकें. तेलों को मिलाने से खाने में एक खास फ्लेवर आ सकता है और कुछ मामलों में पोषण भी बेहतर हो सकता है.

लेकिन तेलों को मिलाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर तेल का स्मोक पॉइंट अलग-अलग होता है. अगर तेल को उसकी सीमा से ज्यादा गर्म किया जाए तो वह टूटने लगता है और उसमें हानिकारक तत्व बनने लगते हैं. इससे न सिर्फ तेल का पोषण घट जाता है बल्कि शरीर के लिए  खतरनाक पदार्थ भी बन सकते हैं.

इसलिए अगर कोई शख्स तेलों को मिलाकर इस्तेमाल करता है, तो उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि किस तापमान पर खाना पकाया जा रहा है और तेल की क्वालिटी कैसी है. 

क्या सरसों के तेल में रिफाइंड ऑयल मिलाना सही है?

डॉ. पवार ने कहा, आमतौर पर, स्वाद और फैट प्रोफाइल को संतुलित करने के लिए सरसों के तेल में रिफाइंड तेल मिलाया जाता है, लेकिन इससे यह कम हेल्दी माना जाता है. इसके अलावा, तेलों को आपस में मिलाने से उनका स्मोक पॉइंट बदल जाता है और वे तेजी से खराब हो सकते हैं. 

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हालांकि तेलों को मिलाकर इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए सावधानी जरूरी है. सबसे जरूरी बात यह है कि तेल को बहुत ज्यादा गर्म न किया जाए और संतुलित मात्रा में ही इस्तेमाल किया जाए. ऐसा करने से खाने का टेस्ट भी खराब नहीं होता है और हमारी सेहत के लिए भी सुरक्षित रहता है.

कुकिंग के लिए सरसों या सोयाबीन में कौन बेहतर?

भारतीय किचन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले तेलों में सरसों और सोयाबीन का नाम आता है. दोनों ही तेलों में पोषक तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन सरसों का तेल कई मामलों में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.

डॉ. प्रशांत पवार के अनुसार, सरसों के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड और मोनोअनसैचुरेटेड फैट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये फैट दिल के लिए अच्छे माने जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल को बैलेंस रखने में भी मदद करते हैं. सरसों के तेल का स्मोक पॉइंट भी काफी ज्यादा होता है, लगभग 250 डिग्री सेल्सियस तक.

यही कारण है कि यह भारतीय स्टाइल कुकिंग जैसे तड़का, फ्राई या सब्जी बनाने के लिए बेहतर माना जाता है. सरसों का तेल खाने में एक खास स्वाद भी देता है, जो भारतीय खाने के साथ अच्छी तरह मेल खाता है.

दिल के मरीजों के लिए सबसे अच्छा कुकिंग ऑयल कौन-सा?

बदलती लाइफस्टाइल की वजह से खानपान की आदतों में भी काफी बदलाव हो गया है और इसकी वजह से हमारी हेल्थ पर भी इसका बुरा असर पड़ने लगा है. खाना पकाते समय हम जिस तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो भी हमारे दिल पर असर डाल रहा है. इसलिए कुकिंग ऑयल चुनते समय भी बहुत सोचना पड़ता है. डॉ. प्रशांत का भी कहना है कि दिल के मरीजों के लिए सबसे अच्छा कुकिंग ऑयल बहुत सोच-समझकर चुनना चाहिए. उन्होंने बताया कि हार्ट पेशेंट के लिए कौन-सा तेल अधिक फायदेमंद हैं.

  • रिफाइंड ऑयल से बचना चाहिए, क्योंकि यह अधिक तापमान पर जल जाता है, जिससे इसकी क्वालिटी खराब हो जाती है और इसमें जहरीले पदार्थ बन जाते हैं.
  • सरसों का तेल ज्यादा पसंद किया जाता है, क्योंकि इसमें मोनो अनसैचुरेटेड फैट्स अधिक होते हैं, यह ज्यादा स्थिर भी होता है, और दिल की बीमारियों का खतरा कम करता है.
  • कुसुम के तेल का स्वाद न्यूट्रल होता है और इसमें अनसैचुरेटेड फैटी एसिड अधिक होते हैं. तिल के तेल में एंटीऑक्सीडेंट सेसामोल अधिक मात्रा में होता है.
  • एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा सोर्स है, लेकिन इसका स्मोक पॉइंट कम होता है, इसलिए इसे भारतीय खाना पकाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता; यह ड्रेसिंग के लिए सबसे अच्छा रहता है. 
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