गर्मियों में घर को ठंडा रखने के लिए लोग AC और कूलर पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं. इतना ही नहीं लोग गर्मियों में घर को ठंडा रखने के लिए कई बार महंगे फ्लोरिंग मटीरियल का सहारा लेते हैं, जिन्हें लगवाने में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुराने भारतीय घरों में गर्मी से निपटने का एक ऐसा देसी तरीका भी था, जिसे आज के मॉडर्न घरों में लगभग भुला दिया गया है.
बात हो रही है लाल ईंट यानी रेड ब्रिक फ्लोरिंग की. जिस ईंट को आप आमतौर पर सिर्फ दीवार बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, वही ईंट सही तरीके से फर्श पर बिछाई जाए तो गर्मियों में पैरों के नीचे ठंडक का एहसास दे सकती है. जी हां, जिस ईंट को आप प्लास्टर के पीछे छिपाकर अपना घर बनाते हैं, उसे ही खूबसूरत तरीके से बिछाकर आप सुंदर फर्श बना सकते हैं. ये ईंटें बिना किसी AC या कूलर के घर के फर्श को ठंडा रख सकता है. खास बात ये है कि इसका लुक भी आज के मॉडर्न इंटीरियर में काफी खूबसूरत और अलग नजर आता है.
दीवारों की ईंट से बन सकता है खूबसूरत फर्श
घर बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लाल-लाल ईंटें असल में मिट्टी, पानी और रेत जैसी नेचुरल चीजों को मिलाकर तैयार की जाती है. इन्हें एक सांचे में डालकर आकार दिया जाता है, फिर धूप में सुखाने के बाद भट्टी में पकाया जाता है. मिट्टी में मौजूद आयरन की वजह से पकने के बाद ईंट का रंग लाल हो जाता है. यही लाल ईंट, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर दीवारों में किया जाता है, फर्श बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है.
इसकी खासियत सिर्फ इसका देसी और रॉ लुक नहीं है. इसे अलग-अलग पैटर्न में बिछाकर फर्श को काफी स्टाइलिश बनाया जा सकता है. यानी एक ही तरह की ईंट होने के बावजूद डिजाइन बदलते ही पूरे स्पेस का लुक बदल जाता है.
हेरिंगबोन से डायगोनल तक, कई पैटर्न में बिछती है ईंट
अगर आप सोच रहे हैं कि ईंटों को सिर्फ एक के बाद एक रखकर बोरिंग का फर्श बनेगा, तो आप गलत हैं. रेड ब्रिक फ्लोरिंग को सीधी लाइन में बिछाना जरूरी नहीं है. इसे हेरिंगबोन पैटर्न (Herringbone) यानी मछली की हड्डी जैसा पैटर्न, बास्केट वीव (Basket Weave) यानी टोकरी जैसा बुना हुआ डिजाइन और डायगोनल जैसे अलग-अलग पैटर्न में लगाया जा सकता है. यही वजह है कि आज भी कुछ आर्किटेक्ट और डिजाइन स्टूडियो इस पुराने मटीरियल को मॉडर्न घरों में नए अंदाज में इस्तेमाल कर रहे हैं.
ईंट का लाल रंग घर को गर्माहट और मिट्टी से जुड़ा हुआ लुक देता है, जबकि सही पैटर्न इसे काफी कंटेम्परेरी बना सकता है. खासकर आंगन, बरामदे, आउटडोर एरिया और सेमी-ओपन स्पेस में इसका लुक काफी आकर्षक लगता है.
कैसे ठंडा रहता है ईंट वाला फर्श?
अब सवाल है कि आखिर ये फर्श गर्मी में ठंडा कैसे रह सकता है? इसकी एक वजह ईंट का नेचर है. पत्थर या दूसरी फ्लोरिंग्स के मुकाबले कच्ची मिट्टी की ईंट पानी और नमी को ज्यादा आसानी से सोख लेती है. इसी वजह से पुराने समय में घर के आंगन में पानी का छिड़काव किया जाता था, जिससे फर्श की गर्मी कम होती थी और आसपास का माहौल ठंडा रहता था.
जब पानी ईंट में जाता है और धीरे-धीरे हवा में इवैपोरेट होता है, तो सरफेस से कुछ गर्मी भी बाहर निकलती है. इससे फर्श ठंडी महसूस हो सकता है. यानी पानी का इवैपोरेसन यहां एक तरह की नेचुरल कूलिंग में मदद करता है.
सालों तक चलने वाला फर्श
रेड ब्रिक फ्लोरिंग का एक और फायदा ये भी है कि ये बहुत टिकाऊ होता है. अगर अच्छी क्वालिटी की ईंट चुनी जाए और उसे सही बेस, लेवलिंग और जॉइंटिंग के साथ लगाया जाए, तो ये लंबे समय तक चल सकती है. यही वजह है कि भारत के पुराने घरों, हवेलियों और आंगनों में ईंट और मिट्टी से जुड़े ऐसे फर्श लंबे समय तक देखने को मिलते रहे हैं.
हालांकि, इसे लगवाने से पहले जगह, ड्रेनेज, नमी और इस्तेमाल के हिसाब से सही तरीका चुनना जरूरी है. हर कमरे में एक जैसी ब्रिक फ्लोरिंग सही रहे, ऐसा जरूरी नहीं है.
मार्बल-टाइल्स के दौर में पीछे छूट गई देसी तकनीक
एक समय घरों के आंगन और बरामदे में ईंट का फर्श आम बात थी. फिर मार्बल, ग्रेनाइट और टाइल्स जैसी फ्लोरिंग तेजी से चलन में आई और लाल ईंट धीरे-धीरे दीवारों तक ही लिमिट होती चली गई. लेकिन अब इंटीरियर में नेचुरल और रॉ मटीरियल का ट्रेंड बढ़ने के साथ रेड ब्रिक फ्लोरिंग भी दोबारा चर्चा में है.
कई आर्किटेक्ट इसे मॉडर्न डिजाइन के साथ जोड़ने के तरीके के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी जिस चीज को हमने पुराना समझकर पीछे छोड़ दिया था, वही आज के घरों में एक अलग और स्टाइलिश डिजाइन एलिमेंट बनकर लौट रही है.