मौसम ने एक बार फिर करवट बदल दी है और बारिश ने फिर से ठंड बढ़ा दी है.इस मौसम में रजाई के अंदर से बाहर निकलने का मन नहीं करता है और गर्मागरमा खाने के क्रेविंग होती है. सर्दियों में ताजी सब्जियां और फल मार्केट में भरपूर मिलते हैं और साथ ही सर्दियों के सीजन में लोग पराठे बनाकर खूब खाते हैं. आलू, गोभी और मूली के पराठे तो आपने कई बार खाएं होंगे, लेकिन क्या आपने पहाड़ी दाल गहत के पराठ खाएं हैं.
यह दाल सर्दियों के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है, खाने में टेस्टी और हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होती है. उत्तराखंड की इस मशहूर दाल गहत की दाल को आमतौर पर हॉर्स ग्राम और कुलथी के नाम से भी जाना जाता है.पीढ़ियों से पहाड़ी घरों में इस दाल को बनाकर खाया जा रहा है, इसके पारंपरिक महत्व और पोषण तत्वों की वजह से इसे उत्तराखंड के अलावा भी दूसरे प्रदेशों में लोग खाते हैं.
उत्तराखंड में सर्दियो के सीजन में गहत के दाल के पराठे अक्सर बनाए जाते हैं, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है. इसलिए इसे सर्दियों का सुपरफूड भी कहा जाता है. तासीर गर्म होने की वजह से इसे खाने से सर्दी-जुकाम दूर करता है और ठंड से भी राहत मिलती है.
ठाणे स्थित केआईएमएस अस्पताल की चीफ डायटीशियन अमरीन शेख के मुताबिक, गहत दाल में कई आम दालों की तुलना में थोड़ा अधिक प्रोटीन और फाइबर होता है, जिससे यह खासतौर पर पेट भरने वाली और बेहतर डाइजेशन वाली होती है. आयरन, कैल्शियम और पॉलीफेनॉल का भी गहत दाल बेहतरीन सोर्स है और एनर्जी बढ़ाने, इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने और गट हेल्थ के लिए यह बेहतर ऑप्शन है.
गहत दाल को लेकर कहा जाता है कि इसका पानी पीने से किडनी स्टोन से राहत मिलती है, इस बारे में चीफ डायटीशियन अमरीन शेख ने बताया कि शुरुआती रिसर्च से पता चलता है कि यह दाल मूत्र प्रवाह में सुघार करने और पथरी बनाने वाले पदार्थों को कम करने में काम आ सकती है, खासकर हाई ऑक्सीलेट लेवल से जुड़े मामलों में गहत की दाल मदद कर सकती है. भले ही इससे कुछ फायदा हो सकता है, लेकिन इसे कभी भी किडनी स्टोन के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं माना जा सकता है.
डायबिटीज के मरीजों को यह सीधे कोई फायदा नहीं देती है. डॉक्टर शेख के अनुसार, गहत दाल धीरे डाइजेस्ट होती है और इसमें बाकी दालों की तुलना में ग्लूकोज को ज्यादा धीरे-धीरे फ्री करती है. यह स्लो डाइजेशन प्रोसेस के बाद शुगर स्पाइक्स को कंट्रोल करती है और इसे खाने से पूरे दिन शरीर में एनर्जी का लेवल हाई बनाए रखने में मदद मिलती है.
डॉ. शेफ का कहना है कि गहत दाल एक बार में बहुत ज्यादा खाने से कुछ लोगों में पेट फूलने की समस्या हो सकती है, खासकर अगर उनका पेट पहले से ही सेंसिटिव हो.गहट दाल में नेचुरल प्यूरीन की मात्रा भी थोड़ी ज्यादा होती है, इसलिए हाई यूरिक एसिड लेवल वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए.
गहत दाल के पराठे बनाने की आसान रेसिपी शेफ संजीव कपूर ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर की थी. अगर आप भी बारिश के बाद बढ़ती ठंड के बीच कुछ हेल्दी खाने के बारे में सोच रहे हैं. तो आप घर पर संजीव कपूर के स्टाइल में गहत दाल के पराठे बना सकते हैं.
इंग्रेडिएंट्स
कैसे बनाते हैं गहत दाल के पराठे
आप चाहे तो इसे चाय के साथ खा सकते हैं या फिर इसे धनिया की चटनी के साथ भी खा सकते हैं.
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.