सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि उन्होंने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई किसी भी याचिका को लिस्ट करने से इनकार नहीं किया है. उन्होंने उन रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि CJI ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने इसे गलत रिपोर्टिंग करार दिया.
CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ऐसी कोई याचिका दायर ही नहीं की गई थी. एक वकील ने केवल एक पत्र लिखा था. जिसका जिक्र कोर्ट में किया गया था.
सीजेआई ने इस उल्लेख यानी मेंशनिंग की रिपोर्टिंग को गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह बताया है. CJI ने कहा कि यह पूरी तरह से झूठा बयान दिया जा रहा है कि याचिका दायर की गई थी और उन्होंने इसे लिस्ट करने से मना कर दिया.
CJI ने सवाल किया कि वे किसी पत्र प्रतिनिधित्व (Representation) को याचिका (Petition) कैसे मान सकते हैं?
दरअसल इसी हफ्ते में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के जंतर-मंतर पर हुए धरना प्रदर्शन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग वाली पत्र याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार करते हुए कुछ टिप्पणियां की थीं.
अब यह स्पष्ट किया गया है कि अदालत में कोई औपचारिक याचिका दायर ही नहीं की गई थी, केवल मौखिक रूप से इसका उल्लेख किया गया था.
CJI ने तब यह बात कही जब वकील शुक्रवार को अपने मामलों को तुरंत लिस्ट करने के लिए ज़िक्र कर रहे थे. उन्होंने कहा, "सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दायर नहीं किया गया था. यह सिर्फ़ एक रिप्रेजेंटेशन (याचिका जैसा पत्र) था... जिसे मिश्रा या किसी और ने भेजा था. मैं उस रिप्रेजेंटेशन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? और लोग बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्ट करने लगते हैं."
पूरा मामला क्या था
रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को एक वकील ने 20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हुए विरोध मार्च के दौरान छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई पर तुरंत सुनवाई की मांग की थी.
वकील ने कहा था, "मेरे पास पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी हैं. अगर इसे गुरुवार लिस्ट किया जा सके, तो छात्र वहां मौजूद हैं."
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित तौर पर पुलिस ने बर्बरता की थी.
CJI ने अनुरोध ठुकरा दिया और साफ़ कर दिया कि बेंच मामले के ज़िक्र के चरण में वीडियो फुटेज की जांच करने का इच्छुक नहीं है.
CJI ने कहा था, "हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है. हम वीडियो नहीं देखना चाहते."
जब वकील ने फिर से कहा कि छात्रों की पिटाई हुई थी और वीडियो सबूत का ज़िक्र किया तो CJI ने कहा था, "हमारा समय बर्बाद न करें. हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते."
20 जुलाई को प्रदर्शनकारी NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.