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'राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं', केंद्र सरकार ने SC में दाखिल किया जवाब

राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल कर दिया है. सरकार ने कहा है कि राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 10 मई को होगी अगली सुनवाई
  • 3 जजों की बेंच कर रही सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह कानून की वैधता को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर केंद्र सरकार ने इस कानून की हिमायत की है.

केंद्र सरकार ने कहा है कि केदारनाथ बनाम बिहार सरकार मामले में फैसला बहुआयामी है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ से 1962 में आए केदार नाथ बनाम बिहार सरकार मामले में फैसला मुद्दे के गहन विश्लेषण और परीक्षण के बाद दिया गया था. सरकार की ओर से ये भी कहा गया है कि इसकी पुष्टि बाद के कई फैसलों में हुई. अब तक उस फैसले की नजीर दी जाती है.

केंद्र सरकार ने कहा है कि चौतरफा असरदार इस अच्छे कानून पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है. सरकार की ओर से कहा गया है कि फिर भी जो सवाल उठाए गए हैं, उन पर तीन जजों की बेंच आगे सुनवाई नहीं कर सकती है. ये मामला बड़ी बेंच के पास जाना चाहिए. केंद्र सरकार की ओर से साथ ही ये भी कहा है कि आईपीसी की इस धारा में जिन कानूनी प्रावधानों का वर्णन किया गया है, उनको चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए.

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सरकार की ओर से कहा गया है कि कभी भी संविधान पीठ के बाध्यकारी फैसले पर पुनर्विचार करने का औचित्य नहीं होगा. फिर भी अगर तीन जजों की बेंच इन दलीलों से संतुष्ट नहीं है तो वो इस मामले की सुनवाई बड़ी बेंच से करवाने की सिफारिश कर सकती है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से लिखित दलीलें दाखिल कर दी गई हैं.

अब इस मामले में मंगलवार को यानी 10 मई को दोपहर बाद 2 बजे से CJI एनवी रमणा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी. इस बीच 9 मई तक केंद्र सरकार इस मामले के बाकी पक्षकारों की लिखित दलीलों पर भी अपना जवाब दाखिल करेगी.

 

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