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AIDS इंजेक्शन, रेपिस्ट, तीन बच्चे.. विधानसभा में भिड़े डीके शिवकुमार और बीजेपी विधायक

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बीच गुरुवार को सदन में मर्यादा की सारी सीमाएं टूट गईं. डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार और बीजेपी विधायक मुनिरत्ना के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई. शिवकुमार ने मुनिरत्ना पर एक व्यक्ति को एड्स संक्रमित इंजेक्शन लगवाने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया. पलटवार में मुनिरत्ना ने शिवकुमार के बच्चों पर व्यक्तिगत टिप्पणी की, जिससे भड़ककर शिवकुमार ने उन्हें रेपिस्ट कह दिया.

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डीके शिवकुमार और बीजेपी विधायक मुनिरत्ना के बीच तीखी झड़प (Photo: ITG)
डीके शिवकुमार और बीजेपी विधायक मुनिरत्ना के बीच तीखी झड़प (Photo: ITG)

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद से ही सियासी पारा गरम है. चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद सदन में गुरुवार को जो माहौल दिखा, उसने लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सारी सीमाएं तोड़ दी. डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार और बीजेपी विधायक मुनिरत्ना के बीच हुई जुबानी जंग ने सदन को अखाड़ा बना दिया. विकास और मुद्दों पर शुरू हुई चर्चा व्यक्तिगत हमलों, रेपिस्ट जैसे शब्दों और एड्स के इंजेक्शन वाले संगीन आरोपों तक जा पहुंची.

हंगामा तब शुरू हुआ जब डी.के. शिवकुमार ने भाजपा विधायक मुनिरत्ना पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 'तुम्हारे खिलाफ चल रहे मामलों पर बोलने के लिए बहुत कुछ है. तुम पर अशोक नाम के व्यक्ति को एड्स-संक्रमित इंजेक्शन लगवाने की कोशिश करने का भी आरोप है. तुम्हारे खिलाफ FIR दर्ज है.' इस आरोप पर मुनिरत्ना बुरी तरह भड़क गए और उन्होंने स्पीकर से जवाब देने का मौका मांगा. सदन में शोर इतना बढ़ गया कि अन्य विधायकों को बीच-बचाव करना पड़ा.

रेपिस्ट और बच्चों पर व्यक्तिगत टिप्पणी

विवाद तब और गहरा गया जब मुनिरत्ना ने शिवकुमार पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके खिलाफ दर्ज FIR केवल बदले की राजनीति है. बहस के दौरान मुनिरत्ना ने डिप्टी सीएम से कहा, 'यह मत भूलो कि तुम्हारे भी तीन बच्चे हैं.'

इस व्यक्तिगत टिप्पणी पर डी.के. शिवकुमार अपना आपा खो बैठे और उन्होंने मुनिरत्ना को झिड़कते हुए कहा, 'ओए रेपिस्ट, चुपचाप बैठ जा.' इस शब्द के इस्तेमाल के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ. कांग्रेस विधायक कुनिगल रंगनाथ ने शिवकुमार का समर्थन किया, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि रेपिस्ट और एड्स इंजेक्शन जैसे शब्दों का इस्तेमाल सदन की गरिमा के खिलाफ है.

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मामले को बढ़ता देख स्पीकर ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सदन में व्यक्तिगत टिप्पणी और मुख्य मुद्दे से हटकर की गई किसी भी बात को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. स्पीकर ने निर्देश दिया कि बहस के दौरान इस्तेमाल किए गए सभी असंसदीय और आपत्तिजनक शब्दों को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया जाए.

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