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तमिलनाडु में अम्मा कैंटीन की बदली तस्वीर, 55% बढ़ी खाने वालों की संख्या

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की ओर से अम्मा कैंटीनों में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का असर अब दिखने लगा है. भोजन की गुणवत्ता में सुधार के बाद यहां आने वाले लोगों की संख्या में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. अम्मा कैंटीन तमिलनाडु में कैंटीनों की एक श्रृंखला है.

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अम्मा कैंटीन में सीएम विजय के सुधारों का दिख रहा है असर(File Photo)
अम्मा कैंटीन में सीएम विजय के सुधारों का दिख रहा है असर(File Photo)

तमिलनाडु सरकार ने अम्मा कैंटीनों  में सुधार के लिए जो कदम उठाए थे, उसका असर अब साफ दिखाई देने लगा है. ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के अनुसार, क्वालिटी और जरूरी सुविधाओं में सुधार के बाद चेन्नई की अम्मा कैंटीनों में आने वाले लोगों की संख्या में 55 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. जीसीसी के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की 383 अम्मा कैंटीनों में अप्रैल में औसतन प्रतिदिन 67,164 लोग भोजन करने पहुंच रहे थे. मई में क्वालिटी सुधार अभियान शुरू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1,04,102 प्रतिदिन हो गई है.

कैंटीनों में बढ़ी भीड़ का असर आय पर भी देखने को मिला है. अप्रैल में जहां मासिक आय 87.6 लाख रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 1.36 करोड़ रुपये पहुंच गई है. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा मई में अम्मा कैंटीनों में बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण का ऐलान किए जाने के तुरंत बाद ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने सुधार के लिए काम करना शुरू किया था. इसके तहत कैंटीनों में पेंटिंग कराई गई, पंखे लगाए गए, रसोईघर की मरम्मत की गई, पानी की दिक्कतों में सुधार किया गया और खाने की क्वालिटी और स्वच्छता बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए.

हालांकि, सुविधाओं और क्वालिटी में सुधार के बावजूद भोजन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. अम्मा कैंटीन में इडली अब भी सिर्फ 1 रुपये में मिल रही है, जबकि सांभर चावल, नींबू चावल और दही चावल जैसी राइस डिश 5 रुपये में उपलब्ध हैं. यही वजह है कि ये कैंटीन आज भी शहर में सबसे सस्ते भोजन विकल्पों में शामिल हैं.

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दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता द्वारा शुरू की गई अम्मा कैंटीन योजना लंबे समय से दिहाड़ी मजदूरों, वरिष्ठ नागरिकों, प्रवासी श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बड़ी राहत रही है. यह कैंटीन की ऐसी चेन है, जिसमें लोगों को कम कीमत पर भोजन उपलब्ध करवाया जाता है. इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ गरीब वर्ग के लोगों के लिए ही नहीं है, यहां सभी लोग कम कीमत पर खाना खाते हैं. साल 2013 में इस कैंटीन की शुरुआत हुई थी. 

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