scorecardresearch
 

एक्सपोर्ट से पहले नए टायरों को थोड़ा सा काट क्यों देते हैं मेकर्स?

क्या आप जानते हैं कई मेकर्स नए टायरों में एक कट लगाकर दूसरे देशों में निर्यात करते हैं और ऐसा करके वो मोटा पैसा बचा लेते हैं. तो जानते हैं आखिर ये क्यों किया जाता है?

Advertisement
X
टायरों में एक कट लगाकर निर्यात करके पैसे बचाए जाते हैं. (Photo: Pexels)
टायरों में एक कट लगाकर निर्यात करके पैसे बचाए जाते हैं. (Photo: Pexels)

इंटरनेशनल टायर मार्केट दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल रिलेटेड बिजनेस में से एक है. नए टायरों से लेकर स्क्रैप टायरों तक का बहुत बड़ा कारोबार है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि टायरों के इस बिजनेस में कई कस्टम्स फ्रॉड भी होते हैं, जिसमें नए टायरों को कट लगाकर एक्सपोर्ट करना भी शामिल है. जी हां, जब टायरों का एक्सपोर्ट किया जाता है तो कुछ मेकर्स नए टायरों में भी कट लगाकर दूसरे देशों में भेजते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर नए टायरों में कट लगाकर इसे खराब करने की वजह क्या है और ऐसा क्यों किया जाता है. 

टायर में कट लगाने की ट्रिक पैसे बचाने के लिए है. ये कट लगाकर मेकर्स टायर खराब नहीं करते हैं, बल्कि मुनाफा ज्यादा करते हैं. दरअसल, जब टायरों को एक देश से दूसरे देशों में भेजा जाता है तो उसपर कई तरह के टैक्स आदि लगते हैं. ऐसे में जब एकदम नए फ्रैश टायर भेजे जाते हैं तो उसे फ्रैश आइटम की कैटेगरी में रखा जाता है और पर शुल्क अलग हिसाब से लगता है. ऐसे में मेकर्स टायर पर हल्का सा कट लगा देते हैं, जिसे आराम से ठीक किया जा सकता है और इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसा करने से टायर नए आइटम की कैटगरी से बाहर आ जाता है और इसे स्क्रैप कैटेगरी में डाल दिया जाता है. इसके बाद इस पर लगने वाले शुल्क काफी कम हो जाता है.

Advertisement

ऐसे में टायरों पर कट लगाकर वे आयात में लगने वाले टैक्स को काफी कम कर देते हैं. ये वैसे तो गैरकानूनी है और कस्टम्स फ्रॉड माना जाता है. इसे व्यापार की भाषा में 'कटिंग फ्रॉड' या 'कैटेगरी मिस-डिक्लेरेशन' कहा जाता है. धोखाधड़ी करने वाले इम्पोर्टर नए या बहुत अच्छी स्थिति वाले महंगे टायरों के बीड के पास या साइडवॉल पर एक ऐसा कट लगाते हैं जो देखने में उसे बेकार दिखाए, लेकिन टायर पूरी तरह नष्ट न हो. ऐसे में कागजों में वो स्क्रैप माना जाता है. 

कटे हुए टायर को कागजों में 'रबर स्क्रैप'या 'वेस्ट' घोषित कर दिया जाता है. इस कैटेगरी में कस्टम ड्यूटी बेहद कम होती है और टैक्स की भारी बचत होती है. जब ये आयात हो जाता है तो इसे डीलर्स ठीक करके बाजार में बेच देते हैं. उस हल्के कट पर रबर कंपाउंड, हॉट वल्केनाइजेशन या अंदर से मजबूत पैच लगाकर वापस सील कर दिया जाता है. 

हालांकि,सरकार की ओर से इस तरह के फ्रॉड पर कार्रवाई की जाती है और जुर्माना लगाया जाता है. भारत में भी कई बार ऐसा हुआ है और लोगों ने ऐसे टायर मंगवाने की कोशिश की है. वैसे टायरों को आधिकारिक रुप से स्क्रैप तब माना जाता है, जब उसके बीड वायर पर कट लगा हो. ये वो वायर होता है, जो टायर के एकदम कोने पर होता है, जिससे वो अपने पकड़ बनाता है. माना जाता है कि उसमें कट लगने के बाद टायर इस्तेमाल करने लायक नहीं बचता है. ऐसे में स्क्रैप कैटेगरी के लिए वायर में कट जरूरी है, लेकिन अब मेकर्स टायर में दूसरी जगह कट लगाकर उसे स्क्रैप में भेजने की कोशिश करते हैं. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement