महंगे होटल्स की प्राइम सुविधाओं में एक खास चीज है- वहां के तौलिए. मुलायम, मोटे और सफेद रंग के तौलिए भी लग्जरी फील करवाते हैं. लेकिन, एक वक्त बाद ये तौलिए इतने घिस जाते हैं, फट जाते हैं या फिर कोई पर्मामेंट दाग लग जाता है तो ये गेस्ट के इस्तेमाल के लायक नहीं रह पाते. लेकिन, सवाल ये है कि जब इन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है तो उनका क्या होता है. इसे लेकर कई तरह की कहानियां कही जाती हैं कि इन्हें फिर से बेच दिया जाता है. तो जानते हैं आखिर इन तौलियों की सच्चाई है क्या?
तौलिए कब रिजेक्ट होते हैं?
होटल के तौलियों को उनकी हालत और पॉलिसी के हिसाब से दोबारा इस्तेमाल किया जाता है. जब लगातार धुलाई और इस्तेमाल के बाद तौलिया घिसने लगता है, उसका कपड़ा पतला हो जाता है और सफेद कलर पीला पड़ने लगता है या कुछ दाग स्थायी रह जाते हैं तो उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता है. जब वो पहले जितना मुलायम और अब्सोर्बेंट नहीं रह पाता, तो उन्हें रिजेक्ट करना होता है.
रिजेक्ट तौलियों का क्या होता है?
दूसरे कामों में होता है इस्तेमाल- जो तौलिए गेस्ट के लिए इस्तेमाल करने लायक नहीं बचता, लेकिन उसका कपड़ा अभी ठीक होता है तो उसे होटल किसी दूसरे काम में लगा सकता है, जिसमें क्लीनिंग क्लोथ, डस्टर क्लोथ आदि शामिल है. मेरियट की एक आधिकारिक रिपोर्ट में पुराने तौलियों को फिर से यूज करने की बात कही गई है. यानी होटल का पुराना तौलिया उसी होटल में किसी दूसरे काम आ सकता है.
वापस बिक जाता है- इसके अलावा दूसरा तरीका ये है कि इन्हें डोनेशन के रुप में इस्तेमाल किया जाता है यानी कुछ जरूरतमंद संस्थाओं या संगठनों को दे दिया जाता है. कुछ स्थितियों में ये लोकल बाजार में वापस बिकने भी आ जाते है.
रिसाइकल किया जाता है- वहीं, तौलिए का ज्यादा इस्तेमाल होने के बाद अगर वो यूज करने लायक नहीं रहता है तो उसे रिसाइकिल किया जाता है. जब ये रिसाइक्लिंग यूनिट में जाता है तो इसके कपड़ों को अलग-अलग किया जाता है. जैसे बॉर्डर पर लगे कपड़े, टैग आदि को अलग-अलग किया जाता है. इसके बाद फाइबर्स को अलग-अलग किया जाता है, जिससे तौलिया बना होता है. फिर इन फाइबर्स की क्वालिटी के आधार पर उसके अलग-अलग यूज किए जाते हैं.
अगर अच्छी क्वालिटी के फाइबर हैं तो दूसरे फाइबर के साथ मिलाकर इसके धागे बनाए जाते हैं. वहीं, अगर क्वालिटी अच्छी नहीं है तो क्लीनिंग क्लोथ, वाइपिंग क्लोथ, पैडिंग या इंडस्ट्रियल कपड़े बनाए जाते हैं. यानी पुराना तौलिया हमेशा नया तौलिया बनकर ही वापस नहीं आता. यही वजह है कि रिसाइक्लिंग और दोबारा तौलिया बनाना एक ही बात नहीं है.
भारत निवेश करता है करोड़ों के तौलिए
भारत घरेलू मांग के लिए तौलिए बनाने के अलावा दुनिया के कई देशों को बड़े पैमाने पर सूती तौलिए और अन्य होम-टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात करता है. सूती टेरी कपड़े से बने तौलियों और टॉयलेट और किचन लिनेन के लिए HS 6302.60 श्रेणी का इस्तेमाल किया जाता है.
अमेरिकी आयात आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिका ने इस श्रेणी के तहत भारत से लगभग 872 मिलियन डॉलर (करीब 7000 करोड़) का सामान आयात किया था. अमेरिका के कुल HS 6302.60 आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 43.3% रही, जबकि पाकिस्तान और चीन की हिस्सेदारी 25.5% और 15.1% थी.