घर बनवाते समय हर कोई चाहता है कि मकान मजबूत बने और सालों तक किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े. इसके लिए लोग अच्छी ईंट, सीमेंट, सरिया और लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन घर बनवाते समय एक ऐसी परेशानी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो धीरे-धीरे महंगे दरवाजों, खिड़कियों और फर्नीचर को अंदर से खोखला कर सकती है. यह परेशानी है दीमक. दीमक लगने के बाद घर के दरवाजे, चौखट, अलमारी और लकड़ी के दूसरे सामान को बचाना मुश्किल हो सकता है. कई बार लोग घर में पेंट और पॉलिश कराने के बाद भी दीमक की समस्या से परेशान रहते हैं. इसकी वजह यह है कि दीमक लकड़ी के साथ-साथ मिट्टी के अंदर भी रह सकती है और वहां से घर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है.
हालांकि, घर बनवाते समय ही कुछ जरूरी सावधानियां बरतकर दीमक लगने का खतरा कम किया जा सकता है. इसके लिए केवल लकड़ी पर केमिकल लगाना काफी नहीं है, बल्कि घर की नींव, नमी और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी पर भी ध्यान देना जरूरी है. आइए जानते हैं कि घर बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
1. नींव बनाते समय ही कराएं एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट
घर बनवाते समय दीमक से बचाव का सबसे जरूरी काम है नींव और जमीन के संपर्क में आने वाले हिस्सों का सही तरीके से एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट कराना. यह एक ऐसा ट्रीटमेंट है, जिसमें दीमक को घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए मिट्टी पर निर्धारित कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाता है. यह काम घर की नींव और फर्श बनने के दौरान, निर्माण के अलग-अलग चरणों में किया जाता है. इसके लिए ट्रेंड पेस्ट कंट्रोल एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर होता है. उपचार का तरीका, केमिकल और उसकी मात्रा स्थानीय नियमों और प्रोडक्ट के निर्देशों के अनुसार तय होनी चाहिए.
ध्यान रखें कि नींव बन जाने और फर्श तैयार होने के बाद दीमक से बचाव का कुछ काम मुश्किल हो सकता है. इसलिए घर का निर्माण शुरू करने से पहले ही ठेकेदार और पेस्ट कंट्रोल एक्सपर्ट से इस बारे में बात कर लें.
2. लकड़ी खरीदते समय उसकी क्वालिटी जरूर जांचें
घर के दरवाजों, खिड़कियों और चौखटों के लिए लकड़ी खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत और रंग न देखें. यह भी पता करें कि लकड़ी अच्छी तरह सुखाई गई है या नहीं और उसे दीमक से बचाने के लिए जरूरी ट्रीटमेंट दिया गया है या नहीं. गीली या ठीक से तैयार नहीं की गई लकड़ी में नमी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए अच्छी क्वालिटी की सूखी लकड़ी खरीदें और जरूरत के मुताबिक उसे लकड़ी के लिए उपयुक्त एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट दिलवाएं. सिर्फ पॉलिश या पेंट कराने से दीमक से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती. पॉलिश लकड़ी को अच्छा लुक देती है, लेकिन इसे दीमक रोकने का पक्का उपाय नहीं मानना चाहिए.
3. घर में पानी जमा होने की समस्या न रहने दें
दीमक की कुछ प्रजातियां मिट्टी में रहती हैं और नमी वाली जगहों से घर की लकड़ी तक पहुंच सकती हैं. इसलिए घर बनवाते समय पानी की निकासी का सही इंतजाम करना जरूरी है. छत, बालकनी, बाथरूम और किचन में पानी निकलने का रास्ता सही होना चाहिए. पाइपों में रिसाव न हो और घर की नींव के आसपास बारिश का पानी जमा न रहे. बाथरूम और किचन की वाटरप्रूफिंग भी सही तरीके से कराएं. अगर दीवारों या फर्श में लगातार नमी बनी रहती है, तो दीमक के अलावा फफूंदी और दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं. इसलिए निर्माण के समय ही इन कमियों को दूर करना बेहतर है.
4. दीवारों और पाइपों के आसपास की खाली जगहें बंद कराएं
घर में पानी की पाइप, बिजली के तार और दूसरी सर्विस लाइनें दीवारों या फर्श से होकर गुजरती हैं. इनके आसपास खाली जगह रह जाने पर दीमक के आने का रास्ता बन सकता है. घर बनवाते समय ठेकेदार से कहें कि पाइपों के आसपास की खाली जगहों को सही सामग्री से बंद किया जाए. दीवारों और फर्श में बनने वाली दरारों को भी ठीक कराएं. हालांकि, केवल दरारें भर देने से दीमक पूरी तरह नहीं रुकती, इसलिए इसे दूसरे बचाव उपायों के साथ अपनाना चाहिए.
5. लकड़ी को सीधे मिट्टी के संपर्क में न रखें
घर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी का जमीन या लगातार नम रहने वाली सतह के सीधे संपर्क में आना दीमक का खतरा बढ़ा सकता है. इसलिए लकड़ी के दरवाजों की चौखट और दूसरे हिस्से लगाते समय सही निर्माण तकनीक अपनाएं. जहां लकड़ी जमीन या नमी के संपर्क में आ सकती है, वहां डिजाइन और निर्माण के हिसाब से उचित सुरक्षा व्यवस्था करें. लकड़ी के नीचे पानी जमा न हो और उसके आसपास की जगह में नमी न बनी रहे. साथ ही, निर्माण स्थल पर लकड़ी के टुकड़े, गत्ते और पुराना सामान जमा न होने दें. ऐसे सामान को लंबे समय तक जमीन पर पड़ा छोड़ना ठीक नहीं है.
6. घर की नींव और निर्माण के रिकॉर्ड संभालकर रखें
घर बनवाते समय एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट कराया है, तो उसकी रसीद, इस्तेमाल किए गए उत्पाद की जानकारी और काम की वारंटी या गारंटी से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें. इससे भविष्य में दीमक की समस्या होने पर आपको पता रहेगा कि कौन-सा उपचार कराया गया था और उसकी शर्तें क्या थीं. पेस्ट कंट्रोल कंपनी से यह भी पूछें कि उपचार कितने समय तक प्रभावी रहने की उम्मीद है और किन परिस्थितियों में दोबारा जांच की जरूरत होगी. ध्यान रखें कि कोई भी उपचार जिंदगी भर दीमक न लगने की गारंटी नहीं देता.
7. घर बनने के बाद भी समय-समय पर जांच करते रहें
घर बन जाने के बाद भी दीमक से बचाव की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती. समय-समय पर दरवाजों की चौखट, लकड़ी की अलमारी, स्टोर रूम और फर्श के किनारों की जांच करते रहें. अगर दीवार पर मिट्टी जैसी पतली लकीरें दिखें, लकड़ी खोखली सुनाई दे या खिड़की के पास पंख वाले छोटे कीड़े दिखाई दें, तो इन संकेतों को नजरअंदाज न करें. दीमक का संदेह होने पर विशेषज्ञ से जांच कराएं, ताकि समस्या बढ़ने से पहले सही उपचार किया जा सके.
घर बनवाते समय इन गलतियों से बचें
केवल पेंट या पॉलिश को दीमक से बचाव का उपाय न समझें. नींव के समय एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट की जरूरत को नजरअंदाज न करें. घर में पानी का रिसाव और लगातार नमी बनी न रहने दें. बिना जानकारी के कीटनाशक का इस्तेमाल न करें. निर्माण स्थल पर लकड़ी, गत्ते और कागज का कचरा जमा न होने दें. कुल मिलाकर, घर बनवाते समय दीमक से बचाव की तैयारी करना बाद में महंगे फर्नीचर और चौखट बदलवाने से बेहतर है.
नींव के समय सही एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट, अच्छी क्वालिटी की लकड़ी, पानी की सही निकासी और नियमित जांच से दीमक लगने का खतरा कम किया जा सकता है. हालांकि, किसी भी उपाय से हमेशा के लिए दीमक न लगने की पूरी गारंटी नहीं मिलती, इसलिए निर्माण की क्वालिटी और घर की देखभाल दोनों पर ध्यान देना जरूरी है.