23 अगस्त 2021 का दिन कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में बेहद अहम था. इसी दिन अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने फाइजर-बायोएनटेक की कोविड-19 वैक्सीन को 16 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पूरी मंजूरी दे दी थी. यह कोरोना की पहली वैक्सीन थी, जिसे अमेरिका की नियामक एजेंसी से इस तरह की पूरी मंजूरी मिली थी.
कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन का इंतजार पूरी दुनिया कर रही थी. वैज्ञानिक तेजी से वैक्सीन तैयार करने में जुटे थे और दूसरी तरफ करोड़ों लोगों के मन में एक ही सवाल था- क्या यह वैक्सीन सुरक्षित है और कोरोना से बचाने में कितनी कारगर है? ऐसे में फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को मिली FDA की पूरी मंजूरी एक बड़ा पड़ाव माना गया.
करीब 44 हजार लोगों पर हुई थी स्टडी
FDA ने वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले कंपनी के बड़े क्लिनिकल ट्रायल और उसके निर्माण से जुड़ी जानकारी की समीक्षा की. इस विस्तारित ट्रायल में करीब 44,000 लोग शामिल हुए थे.
अध्ययन के नतीजों में सामने आया कि वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में करीब 91 प्रतिशत प्रभावी थी. इसके अलावा FDA ने वैक्सीन की सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों का भी विस्तार से अध्ययन किया.
इस मंजूरी से पहले भी फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन लोगों को दी जा रही थी. दिसंबर 2020 में FDA ने इसे इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन यानी आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी थी. यह अनुमति कोरोना महामारी से पैदा हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए दी गई थी.
उस समय वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर 37,000 से ज्यादा लोगों के डेटा वाले एक रैंडमाइज्ड और प्लेसीबो-कंट्रोल्ड अध्ययन की समीक्षा की गई थी.
पूरी मंजूरी और आपातकालीन अनुमति में क्या फर्क था?
दिसंबर 2020 में मिली अनुमति का मतलब था कि महामारी जैसी आपात स्थिति में वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं 23 अगस्त 2021 को मिली पूरी मंजूरी FDA की ओर से वैक्सीन के असर, सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया की ज्यादा व्यापक समीक्षा के बाद दी गई.
उस समय FDA की कार्यवाहक कमिश्नर डॉ. जेनेट वुडकॉक ने कहा था कि लाखों लोग पहले ही कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित तरीके से लगवा चुके हैं. उनके मुताबिक, FDA की पूरी मंजूरी से कुछ ऐसे लोगों का भरोसा भी बढ़ सकता है, जो वैक्सीन लगवाने को लेकर अब तक असमंजस में थे.उन्होंने इसे अमेरिका में महामारी की दिशा बदलने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया था.
उस वक्त तेजी से फैल रहा था डेल्टा वेरिएंट
फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन को पूरी मंजूरी ऐसे समय मिली, जब अमेरिका में कोरोना का डेल्टा वेरिएंट तेजी से फैल रहा था. डेल्टा वेरिएंट को कोरोना के पहले के रूपों की तुलना में ज्यादा संक्रामक माना जा रहा था.
FDA की मंजूरी के बाद अमेरिका में वैक्सीन को लेकर कई संस्थानों और संगठनों ने अपने नियम सख्त करने शुरू किए. सरकारी और निजी संस्थाओं ने कर्मचारियों और अन्य लोगों के लिए वैक्सीनेशन की शर्तें लागू करनी शुरू कीं.
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन और न्यूयॉर्क सिटी के स्कूल सिस्टम भी उन संस्थानों में शामिल थे, जिन्होंने वैक्सीन की पूरी FDA मंजूरी के बाद वैक्सीनेशन से जुड़े नियम लागू किए.
बच्चों के लिए बाद में मिली मंजूरी
शुरुआत में FDA की पूरी मंजूरी 16 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए थी. इसके बाद बच्चों के लिए भी वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति का रास्ता खुला. अक्टूबर 2021 में 5 से 11 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई.
इस तरह 23 अगस्त 2021 की तारीख कोरोना महामारी के इतिहास में एक अहम पड़ाव बन गई. उस दिन फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन को मिली FDA की पूरी मंजूरी ने न सिर्फ वैक्सीन के प्रति भरोसा बढ़ाने में भूमिका निभाई, बल्कि अमेरिका में कोरोना से निपटने की रणनीति में भी बड़ा बदलाव ला दिया.