scorecardresearch
 

PoK में हर तरफ 'पाकिस्तान गो बैक', कैसे चीन की दोस्ती बन गई पाक की आफत?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर लोग "ये वतन हमारा है", "हुक्मरानों देख लो, हम तुम्हारी मौत हैं" जैसे नारे लगा रहे हैं. इससे पहले भी पाकिस्तान में चीन को लेकर विरोध किया जा चुका है.

Advertisement
X
पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. (Photo: AFP)
पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. (Photo: AFP)

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में फिर से बवाल है और हर तरफ पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं. रावलकोट में रविवार रात बड़े पैमाने पर जनआंदोलन देखने को मिला, जहां क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग जुटे और इसे पीओके में हुए विशाल प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने सरकारी नीतियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर गहरा गुस्सा और नाराजगी जाहिर की. ये विशाल जुटान पीओजेके में बढ़ते राजनीतिक तनाव और जनअसंतोष को उजागर कर रहा है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों में एक वजह चीन भी है. यहां चीन को लेकर भी प्रदर्शन होते रहे हैं और पाकिस्तान गो बैक जैसे नारे लगे हैं. 

दरअसल, पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ अशांति चीन की वजह से भी है. आर्थिक परेशानियों, महंगाई और राजनीतिक अधिकारों की मांग के अलावा लोग यहां चीन के खिलाफ भी प्रदर्शन करते रहते हैं. इसकी वजह से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर, जिसे एक वक्त में पाकिस्तान ने अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन बताया था.

अरबों डॉलर की इस परियोजना को पाकिस्तान के विकास का इंजन माना गया, लेकिन अब यही प्रोजेक्ट पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक सिरदर्द बनता दिख रहा है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये सीपीईसी है क्या और पीओके में इसकी वजह से अशांति क्यों है?

बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके के कई हिस्सों में समय-समय पर ऐसे विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनकी वजह सीपीईसी है. वहां प्रदर्शन करने वाले स्थानीय व्यापारियों और संगठनों का आरोप है कि इस्लामाबाद की नीतियों की वजह से उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. जब प्रदर्शनकारी विरोध करते हैं तो कराकोरम हाईवे को भी बंद कर देते हैं. 

Advertisement

क्या है सीपीईसी?

सीपीईसी चीन और पाकिस्तान के बीच एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और व्यापारिक परियोजना है. इसका उद्देश्य चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित ग्वादर पोर्ट से जोड़ना है. सीपीईसी की नींव 2013 मेंलगी और आधिकारिक रूप से 20 अप्रैल 2015 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफके बीच समझौतों के साथ लॉन्च किया गया था. शुरुआती निवेश लगभग 46 अरब डॉलर बताया गया था, जो बाद में बढ़ता गया. 

बता दें कि ये कोई एक सड़क नहीं है, बल्कि कई परियोजनाओं का समूह है, जिसमें हाइवे, रेलवे नेटवर्क, इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट, फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, ग्वादर पोर्ट का विकास आदि शामिल है. इसमें सबसे अहम है काराकोरम हाइवे और ये पीओके से गुजकर निकलता है. यही वजह है कि भारत CPEC का विरोध करता है, क्योंकि यह मार्ग उस क्षेत्र से गुजरता है जिसे भारत जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है. ऐसे में पीओके में इसे लेकर बवाल होता रहता है. 

पीओके में क्यों होता है विरोध?

अब पीओके के लोगों को आरोप है कि सीपीईसी परियोजनाओं से उनकी जमीन और संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा. साथ ही कई प्रदर्शनकारियों का आरोप रहता है कि इस्लामाबाद की नीतियों और चीन से जुड़े व्यापारिक प्रबंधन से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान हो रहा है. आरोप लगाए गए हैं कि सीपीईसी से चीन का प्रभाव बढ़ रहा है और स्थानीय लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। हालांकि विरोध का मुख्य निशाना अक्सर पाकिस्तान सरकार की नीतियां और स्थानीय प्रशासन रहे हैं. 

Advertisement

अभी पीओके में क्या है हाल?

अभी पीओके में सीपीईसी के अलावा कई अन्य मुद्दों को लेकर विरोध किया जा रहा है. रावलकोट में कई मुद्दों पर प्रदर्शन होता रहता है, लेकिन हाल ही में 7-8 जून 2026 को रावलकोट में हुई हिंसक झड़पों के बाद हुआ है, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में कई लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद से लगातार प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं और लोग "ये वतन हमारा है", "हुक्मरानों देख लो, हम तुम्हारी मौत हैं" जैसे नारे लगा रहे हैं. 
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement