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क्यों New Zealand में लोग घड़ी को आगे या पीछे करते हैं?

न्यूजीलैंड में साल में दो बार घड़ी आगे-पीछे की जाती है, जिसे Daylight Saving Time कहा जाता है. इसका मकसद दिन की रोशनी का ज्यादा उपयोग करना और बिजली की बचत करना है. 

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India में पूरे साल एक ही समय (IST) चलता है. ( Photo: Pexels)
India में पूरे साल एक ही समय (IST) चलता है. ( Photo: Pexels)

दुनिया के कई देशों में समय सिर्फ घड़ी से नहीं, बल्कि मौसम के हिसाब से भी बदलता है. ऐसा ही एक देश है- न्यूजीलैंड (New Zealand), जहां साल में दो बार लोग अपनी घड़ी आगे और पीछे करते हैं. पहली बार सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक खास वजह छिपी होती है. न्यूजीलैंड अपनी खूबसूरत प्राकृतिक वादियों, साफ-सुथरे शहरों और बेहतरीन लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है. यह देश दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित है और यहां की आबादी कम लेकिन जीवन स्तर काफी अच्छी है. यहां के लोग नेचर के साथ बैलेंस बनाकर जीने में विश्वास रखते हैं, और यही कारण है कि यहां कई ऐसी व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं, जो जीवन को आसान और बेहतर बनाती हैं.

इन्हीं में से एक है Daylight Saving Time यानी डेलाइट सेविंग टाइम. इस सिस्टम के तहत न्यूजीलैंड में गर्मियों के दौरान घड़ी को एक घंटे आगे कर दिया जाता है, ताकि दिन की रोशनी का ज्यादा फायदा उठाया जा सके. वहीं सर्दियों में घड़ी को फिर से एक घंटे पीछे कर दिया जाता है. इस बदलाव का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. इससे शाम का समय लंबा हो जाता है, लोग ज्यादा देर तक बाहर एक्टिव रह सकते हैं और बिजली की खपत भी कम होती है.

हालांकि, शुरुआत में कुछ लोगों को समय बदलने में परेशानी होती है, लेकिन धीरे-धीरे वे इसके आदी हो जाते हैं. न्यूजीलैंड में लोग साल में दो बार अपनी घड़ी आगे और पीछे करते हैं. इसे डेलाइट सेविंग टाइम (Daylight Saving Time - DST) कहा जाता है. इसका मकसद दिन की रोशनी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना और ऊर्जा की बचत करना होता है.

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क्या होता है डेलाइट सेविंग टाइम?
Daylight Saving Time एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें गर्मियों के दौरान घड़ी को एक घंटे आगे कर दिया जाता है और सर्दियों में फिर से एक घंटे पीछे कर दिया जाता है. इससे दिन की रोशनी का बेहतर उपयोग किया जा सके.

न्यूजीलैंड में कब बदलती है घड़ी?
New Zealand में हर साल सितंबर के आखिरी रविवार को घड़ी एक घंटे आगे कर दी जाती है. यानी रात 2 बजे को सीधे 3 बजे कर दिया जाता है. इसके बाद अप्रैल के पहले रविवार को घड़ी एक घंटे पीछे कर दी जाती है, यानी 3 बजे को फिर से 2 बजे कर दिया जाता है.

ऐसा क्यों किया जाता है?
इसका सबसे बड़ा कारण है दिन की रोशनी का बेहतर इस्तेमाल. गर्मियों में दिन लंबे होते हैं, इसलिए घड़ी आगे करने से लोगों को शाम में ज्यादा रोशनी मिलती है. इससे लोग ज्यादा समय तक बाहर काम कर सकते हैं, घूम सकते हैं और बिजली की खपत भी कम होती है.

इसके क्या फायदे हैं?
बिजली की बचत: शाम में लाइट कम जलानी पड़ती है.
लाइफस्टाइल बेहतर: लोगों को शाम में ज्यादा समय मिलता है.
आउटडोर एक्टिविटी बढ़ती है: खेल, घूमना-फिरना आसान होता है.

इसके क्या नुकसान भी हैं?
शुरुआती परेशानी: कुछ दिन तक लोगों को समय के हिसाब से एडजस्ट करने में दिक्कत होती है.
काम के टाइम में गड़बड़ी: खासकर इंटरनेशनल काम में समय का फर्क पड़ता है.

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क्या भारत में भी ऐसा होता है?
नहीं, India में डेलाइट सेविंग टाइम लागू नहीं होता. यहां पूरे साल एक ही समय (IST) चलता है. न्यूजीलैंड में घड़ी आगे-पीछे करने का कारण सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक व्यवस्था है, जिससे लोग दिन की रोशनी का ज्यादा फायदा उठा सकें. हालांकि इसके कुछ नुकसान भी हैं, लेकिन कई देशों में आज भी यह सिस्टम लागू है.

भारत में Daylight Saving Time क्यों लागू नहीं

भारत में समय को लेकर एक खास व्यवस्था अपनाई जाती है, जिसे पूरे देश में समान रूप से लागू किया गया है. यहां सालभर घड़ी में कोई बदलाव नहीं होता, यानी न तो समय आगे किया जाता है और न ही पीछे. इसका मतलब है कि भारत में Daylight Saving Time लागू नहीं होता. लेकिन सवाल यह उठता है कि भारत में आखिर कौन सा समय चलता है और यह कैसे तय होता है?

भारत में कौन सा समय चलता है?
भारत में पूरे देश में एक ही समय लागू होता है, जिसे Indian Standard Time (IST) कहा जाता है. यह समय देश के सभी राज्यों—चाहे वह पूर्वोत्तर हो या पश्चिमी भारत—सब जगह एक जैसा ही रहता है.

IST क्या होता है?
IST यानी इंडियन स्टैंडर्ड टाइम, भारत का आधिकारिक समय है. इसे देश के बीचो-बीच गुजरने वाली एक काल्पनिक रेखा यानी 82.5 डिग्री पूर्व देशांतर (Longitude) के आधार पर तय किया गया है. यह रेखा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के पास से गुजरती है और इसे भारत का 'टाइम रेफरेंस पॉइंट' माना जाता है. दुनिया का मानक समय Greenwich Mean Time (GMT) होता है, जो लंदन के ग्रीनविच से तय किया जाता है.

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भारत का समय GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है. इसलिए जब लंदन में सुबह 6 बजे होते हैं, तब भारत में सुबह 11:30 बज रहे होते हैं. कई देशों जैसे अमेरिका, यूरोप और New Zealand में डेलाइट सेविंग टाइम लागू होता है, लेकिन भारत में इसकी जरूरत महसूस नहीं की गई. इसके पीछे कई कारण हैं:क्या कोई समस्या भी है?

भारत में समय को सरल और एकरूप बनाए रखने के लिए IST अपनाया गया है. यही वजह है कि यहां घड़ी को आगे-पीछे करने की जरूरत नहीं पड़ती. एक ही समय व्यवस्था से देशभर में कामकाज आसान रहता है और लोगों को बार-बार समय बदलने की परेशानी नहीं होती.

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