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किन धाकड़ भैसों को कहते हैं मुर्रा? कितने की आती है 9 किलो दूध देने वाली ये भैंस

मुर्रा भारत की प्रमुख दूध देने वाली भैंस नस्ल है, जिसका मूल क्षेत्र हरियाणा माना जाता है और अच्छी दूध देने वाली मुर्रा की कीमत उसकी उम्र, दूध उत्पादन और नस्ल के रिकॉर्ड के हिसाब से तय होती है. 

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मुर्रा को दूध देने वाली प्रमुख भैंस नस्लों में गिना जाता है. ( Photo: cirb.res.in)
मुर्रा को दूध देने वाली प्रमुख भैंस नस्लों में गिना जाता है. ( Photo: cirb.res.in)

भैंस तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ भैंसों के सींग बाकी भैंसों से बिल्कुल अलग होते हैं? छोटे-छोटे सींग सिर के पास से घूमते हुए अंदर की तरफ मुड़े होते हैं और शरीर चमकदार काला दिखाई देता है. अगर ऐसी भैंस के बारे में कोई कहे कि यह मुर्रा है, तो उसकी पहचान सिर्फ रंग से नहीं, बल्कि उसकी पूरी नस्ल और बनावट से जुड़ी होती है. दूध देने की अच्छी क्षमता और दूध में ज्यादा फैट की वजह से मुर्रा भैंस पशुपालकों के बीच काफी लोकप्रिय है. लेकिन आखिर इसे मुर्रा क्यों कहा जाता है? इसकी पहचान कैसे करें? यह कितने लीटर दूध देती है और इसकी कीमत कितनी होती है? आइए आसान भाषा में जानते हैं.

मुर्रा भैंस होती कैसी है?
मुर्रा भैंस का शरीर आमतौर पर चमकदार काले रंग का होता है. इसका शरीर मजबूत और अच्छी तरह विकसित होता है. इसका सिर मध्यम आकार का होता है और त्वचा चिकनी दिखाई देती है. लेकिन इसकी सबसे खास पहचान इसके छोटे और कसकर घुमावदार सींग हैं. आईसीएआर के सीआईआरबी ( Central Institute for Research on Buffaloes)  के अनुसार, मुर्रा के सींग छोटे होते हैं और पीछे और ऊपर की ओर मुड़ने के बाद अंदर की तरफ हाफ सर्कल के आकार में घूमते हैं. यही घुमावदार सींग इसे दूसरी कई भैंस नस्लों से अलग पहचान देते हैं.

हालांकि, सिर्फ काला रंग और मुड़े हुए सींग देखकर किसी भैंस को मुर्रा नहीं मान लेना चाहिए. नस्ल की सही पहचान के लिए उसकी शारीरिक बनावट, वंशावली, दूध उत्पादन और स्वास्थ्य जैसी चीजें भी देखी जाती हैं.

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मुर्रा नाम क्यों पड़ा?
मुर्रा नाम का संबंध इस नस्ल के सबसे खास शारीरिक गुण से माना जाता है. ICAR-CIRB के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में ज्यादा दूध देने वाली और घुमावदार सींगों वाली भैंसों का चयन किया गया और इन्हें ‘मुर्रा’ नाम दिया गया. ‘मुर्रा’ का अर्थ घुमावदार या मुड़ा हुआ बताया गया है. इस नस्ल के सींग छोटे, कसे हुए और पीछे-ऊपर की तरफ मुड़ने के बाद अंदर की ओर घुमावदार होते हैं. उम्र बढ़ने के साथ इनमें स्पाइरल कर्व और ज्यादा स्पष्ट हो जाता है. सींगों का यह खास आकार मुर्रा नस्ल की आनुवंशिक और नस्लीय पहचान का हिस्सा है.

साइंटिफिक स्टडीज में भी मुर्रा की अलग-अलग शारीरिक विशेषताओं और दूध उत्पादन के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया है. हालांकि, रिसर्च में सींगों के आकार और दूध उत्पादन के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं पाया गया. यानी घुमावदार सींग मुर्रा की पहचान तो हैं, लेकिन ज्यादा दूध देने का सीधा कारण नहीं हैं.

Photo: buffalopedianew.cirb.res.in

मुर्रा भैंस कितना दूध देती है?
मुर्रा को दूध देने वाली प्रमुख भैंस नस्लों में गिना जाता है. लेकिन हर मुर्रा भैंस रोज एक जैसी मात्रा में दूध नहीं देती. दूध की मात्रा उसकी उम्र, खान-पान, स्वास्थ्य, देखभाल और नस्ल की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. आईसीएआर-सीआईआरबी के आंकड़ों के अनुसार मुर्रा का 305 दिन का दूध उत्पादन करीब 1003 से 2057 किलो तक दर्ज किया गया है. अच्छी परिस्थितियों और बेहतर पशु में यह उत्पादन 5000 किलो से ज्यादा तक भी पहुंच सकता है. इसके दूध में फैट की मात्रा करीब 6.9 से 8.3 प्रतिशत बताई गई है. यही वजह है कि मुर्रा को सिर्फ दूध की मात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि दूध में अच्छी फैट के लिए भी पसंद किया जाता है.

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9 किलो दूध देने वाली मुर्रा कितने की आएगी?
मुर्रा भैंस रोज करीब 9 किलो दूध दे रही है तो उसकी कीमत कितनी होगी? इसका कोई एक तय जवाब नहीं है. मुर्रा भैंस की कीमत सिर्फ दूध की मात्रा देखकर तय नहीं होती. उसकी उम्र, नस्ल , कितनी बार बच्चा दे चुकी है, गर्भ की स्थिति, दूध में फैट, स्वास्थ्य और दूध देने का रिकॉर्ड भी कीमत तय करते हैं. इसी वजह से 9 किलो दूध देने वाली हर मुर्रा की कीमत एक जैसी नहीं होगी. अच्छी नस्ल और बेहतर रिकॉर्ड वाली भैंस की कीमत सामान्य पशु से काफी ज्यादा हो सकती है.

मार्केट में कितने रुपये की आती है एक मुर्रा भैंस?
अच्छी क्वालिटी की मुर्रा भैंस की कीमत उसकी उम्र, सेहत और दूध देने की क्षमता पर निर्भर करती है. खासतौर पर यह देखा जाता है कि भैंस रोज कितने लीटर दूध देती है. आम तौर पर एक मुर्रा भैंस की कीमत करीब 60 हजार से 80 हजार रुपये से शुरू हो सकती है. वहीं, ज्यादा दूध देने वाली और अच्छी नस्ल की मुर्रा भैंस की कीमत 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. कुछ खास और रिकॉर्ड दूध देने वाली भैंसों की कीमत 2 लाख रुपये या इससे ज्यादा भी हो सकती है.

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भैंस खरीदते समय सिर्फ उसकी शक्ल या नस्ल देखकर कीमत तय नहीं करनी चाहिए. उसकी दूध देने की क्षमता को खुद जांचना ज्यादा जरूरी है. जानकारों की सलाह है कि खरीदने से पहले दो-तीन बार उसका दूध निकलवाकर देख लें. इसके बाद ही सही कीमत तय करें. कुछ जगहों पर राज्य सरकार की ओर से पशुपालन के लिए सब्सिडी भी दी जाती है. ऐसे में पात्र पशुपालकों को भैंस खरीदने में आर्थिक मदद मिल सकती है.

मुर्रा भैंस कहां मिलती है?
मुर्रा का मुख्य क्षेत्र हरियाणा माना जाता है. ICAR-CIRB के अनुसार इसकी मूल नस्ल का क्षेत्र हरियाणा के रोहतक, हिसार और जींद जिलों में है. इसके अलावा यह पंजाब के नाभा और पटियाला जिलों, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में भी पाई जाती है. आज मुर्रा सिर्फ इन्हीं इलाकों तक सीमित नहीं है. यह देश के कई हिस्सों में पहुंच चुकी है और दूसरी स्थानीय भैंसों की नस्ल सुधारने के लिए भी इसका   किया जाता है. अगर कोई मुर्रा खरीदना चाहता है तो हरियाणा के इन प्रमुख इलाकों के पशुपालकों और भरोसेमंद डेयरी फार्मों से जानकारी ले सकता है.

हालांकि, यह नस्ल देश के लगभग सभी हिस्सों में फैल चुकी है और इसका प्रजनन या तो शुद्ध रूप में किया जा रहा है या स्थानीय भैंसों की नस्ल सुधारने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है। वास्तव में, इस नस्ल ने बुल्गारिया, फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड, चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, पूर्व सोवियत संघ, म्यांमार, वियतनाम, ब्राजील और श्रीलंका जैसे कई विकासशील देशों के पशुधन उद्योग में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है।

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हिसार में है मुर्रा का खास केंद्र
हरियाणा के हिसार में आईसीएआर का सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन बफेलोज (CIRB)स्थित है. संस्थान में मुर्रा की उच्च गुणवत्ता वाली वंशावली वाले पशुओं का प्रजनन झुंड भी मौजूद है. सीआईआरबी भैंसों की नस्ल सुधार, प्रजनन, पोषण और दूध उत्पादन से जुड़े विषयों पर काम करता है.यानी अगर मुर्रा नस्ल के बारे में वैज्ञानिक और प्रमाणित जानकारी चाहिए, तो हिसार स्थित CIRB एक महत्वपूर्ण संस्थान है.

मुर्रा खरीदते समय क्या देखें?
अगर आप 9 किलो या इससे ज्यादा दूध देने वाली मुर्रा खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ बातों की जांच जरूर करें. सबसे पहले उसकी उम्र और उसने कितनी बार बच्चा दिया है, यह पता करें. इसके बाद उसके दूध उत्पादन का रिकॉर्ड देखें. भैंस का दूध निकलते समय देखना भी जरूरी है. सिर्फ एक समय का दूध देखकर फैसला न करें. अगर संभव हो तो खरीदने से पहले पशु चिकित्सक से उसकी जांच कराएं. इससे बीमारी या दूसरी स्वास्थ्य समस्या का पता लगाने में मदद मिल सकती है.

मुर्रा को क्यों पसंद करते हैं पशुपालक?
मुर्रा की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसकी दूध उत्पादन क्षमता और दूध में अच्छी फैट है. इसके अलावा यह अलग-अलग तरह की पालन व्यवस्था में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. ICAR-CIRB के अनुसार मुर्रा को खेत और फार्म, दोनों तरह की परिस्थितियों में पाला जा सकता है. यही वजह है कि हरियाणा से लेकर देश के दूसरे हिस्सों तक मुर्रा भैंस की मांग बनी हुई है.

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तो अगली बार जब आपको काले रंग की भैंस के छोटे-छोटे कसकर मुड़े सींग दिखाई दें, तो उसे देखकर तुरंत मुर्रा मत मान लीजिए. असली पहचान उसकी नस्ल, बनावट, रिकॉर्ड और दूध उत्पादन से होगी. और अगर 9 किलो दूध देने वाली मुर्रा खरीदनी है, तो कीमत से पहले उसकी उम्र, स्वास्थ्य, दूध का रिकॉर्ड और नस्ल की गुणवत्ता जरूर जांचें.

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