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35 मिनट में कैसे साफ हो जाती है मक्का की मस्जिद अल-हरम? जानिए पूरा सिस्टम

मक्का की मस्जिद अल-हरम में हर दिन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इतनी भीड़ के बावजूद करीब 7 लाख वर्ग मीटर का विशाल परिसर महज 35 मिनट में साफ कर दिया जाता है. आइए जानते हैं आखिर यह पूरी व्यवस्था कैसे काम करती है और सफाई के दौरान इस्तेमाल होने वाला पानी कहां जाता है.

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मस्जिद अल-हरम के मुख्य परिसर की सफाई 35 मिनट में पूरी कर ली जाती है (Photo:Reuters)
मस्जिद अल-हरम के मुख्य परिसर की सफाई 35 मिनट में पूरी कर ली जाती है (Photo:Reuters)

मक्का की मस्जिद अल-हरम दुनिया की सबसे बड़ी और इस्लाम की सबसे पवित्र मस्जिद है. हज और उमराह के दौरान यहां हर दिन लाखों लोग तवाफ और नमाज के लिए पहुंचते हैं. इतनी भीड़ देखकर किसी के भी मन में सवाल उठ सकता है कि आखिर इतने विशाल परिसर की सफाई कैसे होती होगी? फर्श पर डाला गया पानी कहां चला जाता है? और सबसे बड़ी बात, श्रद्धालुओं को बिना रोके यह पूरा काम कैसे पूरा हो जाता है?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होते हैं, जिसमें सफाईकर्मी हजारों जायरीनों के बीच कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को चमका देते हैं. वीडियो देखने के बाद लोग इस व्यवस्था की जमकर तारीफ भी करते हैं.

सिर्फ 35 मिनट में चमक उठता है पूरा परिसर

साउथ प्रेस एंजेसी की मार्च 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, मस्जिद अल-हरम के मुख्य परिसर और मटाफ (तवाफ क्षेत्र) की सफाई महज 35 मिनट में पूरी कर ली जाती है. वहीं सऊदी गैजेट के अनुसार, पूरे ग्रैंड मस्जिद परिसर को करीब 45 मिनट में साफ किया जा सकता है. सबसे खास बात यह है कि इस दौरान न तवाफ रुकता है और न ही नमाज. तवाफ इस्लाम में एक महत्वपूर्ण इबादत है, जिसमें मुसलमान मक्का की मस्जिद अल-हरम में स्थित काबा शरीफ के चारों ओर सात बार चक्कर लगाते हैं.

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कितना बड़ा है मस्जिद अल-हरम?

सऊदीपीडिया के मुताबिक, विभिन्न विस्तारों के बाद मस्जिद अल-हरम का क्षेत्रफल करीब 7 लाख से 10 लाख वर्ग मीटर तक पहुंच चुका है. यानी इतनी बड़ी जगह, जहां हर समय हजारों नहीं बल्कि लाखों लोग मौजूद रहते हैं.

आखिर भीड़ के बीच सफाई कैसे होती है?

यही सवाल सबसे ज्यादा लोगों के मन में आता है.सऊदीपीडिया के मुताबिक, मस्जिद की सफाई के लिए करीब 3,500 से 4,000 पुरुष और महिला कर्मचारी चार शिफ्टों में 24 घंटे तैनात रहते हैं. हर टीम का अलग काम होता है.एक टीम फर्श पर पानी और क्लीनिंग सॉल्यूशन डालती है. दूसरी टीम मशीनों और रबर स्क्वीजी से पानी हटाती है.तीसरी टीम सैनिटाइजेशन करती है. चौथी टीम सीढ़ियों, गलियारों, दरवाजों और किनारों की सफाई करती है.

सफाईकर्मी एक दिशा में आगे बढ़ते हैं. जैसे-जैसे आगे का हिस्सा साफ होता है, श्रद्धालु वहां पहुंच जाते हैं और पीछे का हिस्सा साफ होने लगता है. इसी वजह से लोगों की आवाजाही कभी पूरी तरह बंद नहीं होती.

Makkah

Photo:Getty

कौन-कौन सी मशीनें इस्तेमाल होती हैं?

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मस्जिद अल-हरम की सफाई के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है.

12 विशेष वॉशिंग मशीनें
500 से ज्यादा क्लीनिंग डिवाइस
67 एडवांस्ड क्लीनिंग मशीनें
30 इलेक्ट्रिक सफाई वाहन

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ये मशीनें संगमरमर के फर्श को धोती हैं, ब्रश से गंदगी हटाती हैं और हाई-पावर स्क्वीजी कुछ ही सेकंड में पानी खींच लेती है. इससे फर्श जल्दी सूख जाता है और फिसलन भी नहीं होती.

Photo:Getty

 

फर्श पर डाला गया पानी कहां जाता है?

यह सवाल भी लोगों को काफी हैरान करता है. सऊदीपीडिया के मुताबिक, मस्जिद के फर्श को विशेष ढलान के साथ बनाया गया है. इसके नीचे आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और पानी निकासी के चैनल मौजूद हैं.

जैसे ही सफाई के दौरान पानी डाला जाता है, वह तुरंत इन चैनलों में चला जाता है. इसके बाद पानी को ट्रीटमेंट और डिस्पोजल सिस्टम तक पहुंचाया जाता है. यही वजह है कि फर्श पर कहीं भी पानी जमा नहीं होता.

दिन में कई बार होती है सफाई

सऊदी गैजेट और SPA के मुताबिक, मटाफ, सफा-मरवा, वजू खाने, पीने के पानी के पॉइंट, हजारों वॉशरूम और गलियारों की दिन में कई बार सफाई और सैनिटाइजेशन किया जाता है. पूरे परिसर को लगातार मॉनिटर किया जाता है ताकि कहीं भी गंदगी जमा न हो.

कालीनों की सफाई के लिए अलग विभाग

अरब न्यूज के मुताबिक, मस्जिद में बिछे हजारों नमाजी कालीनों की देखभाल के लिए अलग विभाग बनाया गया है. यहां हाई-टेक मशीनों से कालीनों की धूल हटाई जाती है, उन्हें धोया जाता है, सुखाया जाता है और जरूरत पड़ने पर उनकी मरम्मत भी की जाती है.

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अरब न्यूज के अनुसार, सफाई के बाद पूरे परिसर में गुलाब जल और ऊद की खुशबू का छिड़काव भी किया जाता है. कई जगह पर्यावरण के अनुकूल ऑर्गेनिक क्लीनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे स्वच्छता के साथ सुगंधित माहौल भी बना रहे.

Photo:Reuters

क्यों वायरल होते हैं यह वीडियो?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सफाईकर्मियों का अनुशासन, उनकी रफ्तार और आधुनिक तकनीक लोगों को हैरान कर रही है. लाखों श्रद्धालुओं के बीच बिना किसी अव्यवस्था के सफाई पूरी करना आसान नहीं है. यही वजह है कि लोग इसे दुनिया की सबसे बेहतरीन और अनुशासित सफाई व्यवस्थाओं में से एक बता रहे हैं.

मस्जिद अल-हरम सिर्फ इबादत की जगह नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, बेहतरीन प्रबंधन और स्वच्छता का भी शानदार उदाहरण है. हर दिन लाखों लोगों की मौजूदगी के बावजूद यहां जिस तरह सफाई और व्यवस्था बनाए रखी जाती है, वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल मानी जाती है.

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