ये तो आप जानते होंगे कि आपके बिजली बिल में कई तरह के चार्ज जुड़े होते हैं. लेकिन, क्या आप ये जानते हैं कि सरकार आपको एक बात के पैसे भी देती है और सरकार की ओर ये पैसे हर साल बिजली बिल के जरिए दिए जाते हैं. जी हां, हर साल सरकार बिजली बिल के जरिए ये पैसे लोगों को देती है और उतना पैसा बिजली बिल में कम हो जाता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये किस बात का पैसा होता है और हर साल कितने रुपये सरकार की ओर से दिए जाते हैं? तो समझते हैं इस पैसे का पूरा गणित...
किस बात का पैसा देती है सरकार?
दरअसल, जब आप बिजली कनेक्शन लेते हैं तो आपसे बिजली विभाग एक सिक्योरिटी भी लेता है. ये सिक्योरिटी अनुमानित दो महीने की बिजली खपत को कवर करने के लिए ली जाती है. ये सिक्योरिटी लोड, फेज कनेक्शन आदि पर निर्भर करती है. ऐसे में सरकार आपकी ओर से जो सिक्योरिटी जमा की जाती है, उस पर ब्याज भी देती है. यानी सरकार आपको जो पैसा जमा है, उसका ब्याज भी आपको देती है. सरकार की ओर से ब्याज का पैसा दिया जाता है और ये बिल में एडजस्ट किया जाता है.
कितना ब्याज दिया जाता है?
ग्राहकों की ओर से जमा की गई सिक्योरिटी पर ब्याज भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से आधारित रेट के आधार पर तय किया गया है. ये आरबीआई की बैंक रेट के आधार पर कैल्कुलेट किया जाता है और समय समय पर ये रेट बदलती रहती है. अभी आरबीआई के बैंक रेट 6.50 है और इसके अनुसार ही ब्याज की गणना की जाएगी.
कब मिलता है ये पैसा?
यूपीपीसीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, हर ब्याज हर साल वित्तीय वर्ष के आधार पर दिया जाता है. ये 1 अप्रैल को प्रभावी बैंक रेट के आधार पर दिया जाता है, जिसे आम तौर पर अप्रैल, मई, जून के बिल में एडजस्ट कर दिया जाता है. नियमों के अनुसार, अगर सिक्योरिटी कैश, चेक या बैंक ड्राफ्ट के जरिए जमा नहीं की गई है तो उन्हें ब्याज नहीं दिया जाएगा.
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अभी तक उत्तर प्रदेश में ये ब्याज राशि सरकार की ओर से नहीं दी गई है और सरकार को करीब 300 करोड़ रुपये देने हैं. आप भी अपने मीटर में देख सकते हैं कि आपको कितने रुपये ब्याज प्राप्त हुए हैं?