पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के जो रुझान आ रहे हैं. उसमें बीजेपी बढ़त बनाए हुए है. वहीं टीएमसी पीछे चल रही है. इन सबके बीच कांग्रेस अभी भी जीरो पर दिखाई दे रही है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. पिछली बार जब 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हुए थे, उस वक्त भी कांग्रेस जीरो पर सिमट गई थी.
पिछले जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं. उनमें कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है. अभी जिन 5 राज्यों में वोटों की गिनती चल रही है. उनमें असम में भी कांग्रेस काफी पीछे है. बीजेपी के पक्ष में एकतरफा परिणाम दिखाई दे रहे हैं.
दक्षिण के राज्यों में सिर्फ केरल में कांग्रेस और उसके गठबंधन का प्रदर्शन ठीक दिखाई दे रहा है. वहीं पश्चिम बंगाल में इस बार फिर कांग्रेस का खाता खुलना मुश्किल लग रहा है. अगर इस बार कांग्रेस का खाता नहीं खुलता है तो लगातार दूसरी बार होगा जब पश्चिम बंगाल में कांग्रेस जीरो पर रहेगी.
दिल्ली में तीन बार से जीरो पर रह ही कांग्रेस
इससे पहले पिछले साल दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस खाता नहीं खोल सकी थी. दिल्ली में पिछले तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस जीरो पर रहने का हैट्रिक बना चुकी है. 2015 में हुए दिल्ली चुनाव में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला था. 2020 में भी कांग्रेस शून्य पर थी और 2025 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुल पाया था.
दिल्ली और पश्चिम बंगाल के अलावा नागालैंड में भी कांग्रेस कोई सीट हासिल नहीं कर सकी थी. नागालैंड में 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे. इसमें कांग्रेस का खाता नहीं खुल पाया था.
आंध्र प्रदेश और नागालैंड में भी कांग्रेस को नहीं मिली थी कोई सीट
वहीं आंध्र प्रदेश में 2024 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका था. वहां कांग्रेस 158 सीटों पर चुनाव लड़की थी, लेकिन एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी. यहां भी कांग्रेस की स्थिति जीरो ही रही थी.
इस तरह दिल्ली, आंध्र प्रदेश, नागालैंड और पिछली बार पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई. वहीं बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, हरियाणा में हुए विगत चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है.