दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो कई देशों के नाम एक साथ सुनाई देते हैं -G20, BRICS और SAARC. कभी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान इनका जिक्र होता है तो कभी किसी आर्थिक या राजनीतिक मुद्दे पर. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये तीनों हैं क्या? क्या ये कोई देश हैं, संगठन हैं या फिर देशों का ऐसा समूह, जहां बैठकर बड़े फैसले लिए जाते हैं?
दरअसल, तीनों में देशों का समूह शामिल है, लेकिन इनका मकसद और काम करने का तरीका अलग-अलग है. आसान भाषा में कहें तो G20 दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने वाला समूह है. SAARC दक्षिण एशिया के देशों के बीच सहयोग का संगठन है, जबकि BRICS उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने वाला मंच है.
अब इन तीनों को एक-एक करके आसान भाषा में समझते हैं.
G20 क्या है?
सबसे पहले बात G20 की. इसका पूरा नाम Group of Twenty यानी 20 का समूह है. जैसा नाम से ही समझ आता है, इसमें दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. G20 की बैठक में देश वैश्विक अर्थव्यवस्था और उससे जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं. दुनिया की कुल आर्थिक ताकत में G20 देशों की हिस्सेदारी बेहद बड़ी है.G20 में यूरोपीय संघ के साथ 19 देश शामिल हैं. इनमें भारत, अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं.

G20 कोई ऐसा संगठन नहीं है जिसकी तुलना संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था से की जाए. इसे आप एक ऐसे बड़े मंच के तौर पर समझ सकते हैं, जहां दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं एक साथ बैठकर आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर अपनी बात रखती हैं और आपसी तालमेल बनाने की कोशिश करती हैं.
G20 की शुरुआत 1999 में हुई थी. इसके पीछे 1990 के दशक के आखिर में आया एशियाई वित्तीय संकट एक बड़ी वजह था.उस समय कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ा. ऐसे में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ बैठकर आर्थिक स्थिरता पर चर्चा करने के लिए एक मंच की जरूरत महसूस हुई.
SAARC क्या है?
SAARC का पूरा नाम है South Asian Association for Regional Cooperation, यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन. इसका गठन 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में SAARC Charter पर हस्ताक्षर के साथ हुआ था. इसका मुख्यालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में है.
SAARC में दक्षिण एशिया के आठ देश शामिल हैं- भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान.
अब यहां G20 से फर्क साफ समझ में आता है. G20 में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जबकि SAARC का फोकस खास तौर पर दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों पर है. SAARC का मकसद इन देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है. इसके दायरे में आर्थिक विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, सामाजिक प्रगति और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे आते हैं.
SAARC के Charter में भी दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण, जीवन स्तर में सुधार, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई है.साथ ही सदस्य देशों के बीच आपसी भरोसा और एक-दूसरे की समस्याओं को समझने पर भी जोर दिया गया है.
इसलिए अगर G20 को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बैठक कहें, तो SAARC को दक्षिण एशिया के देशों के बीच सहयोग का मंच समझ सकते हैं.
अब BRICS को समझिए
अब आते हैं उस नाम पर जिसकी चर्चा आजकल सबसे ज्यादा होती है. यह नाम है - BRICS. BRICS का नाम मूल रूप से इसके शुरुआती सदस्य देशों के नाम से बना था. BRIC में ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे. बाद में साउथ अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसमें S जुड़ गया और यह BRICS बन गया.
BRIC को 2006 में औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया. उस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान इसके विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई. इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ. फिर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने पर सहमति बनी और 2011 में उसने BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया.
समय के साथ BRICS का दायरा और बढ़ा. अब इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
तो फिर BRICS करता क्या है?
BRICS को आसान भाषा में उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का ऐसा प्लेटफॉर्म समझिए, जहां सदस्य देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत और सहयोग करते हैं. इन देशों के बीच आर्थिक सहयोग के अलावा वैश्विक राजनीति और विश्व की आर्थिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होती है.BRICS का एक बड़ा मकसद यह भी है कि वैश्विक व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज ज्यादा मजबूत हो.
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यानी BRICS सिर्फ एक जगह बैठकर बातचीत करने का नाम नहीं है. इसके जरिए सदस्य देश आपसी सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्थिति को बेहतर तरीके से सामने रखने की कोशिश करते हैं.
तो G20, SAARC और BRICS में असली फर्क क्या है?
अब तीनों को एक साथ रखकर समझिए. G20 का दायरा सबसे ज्यादा वैश्विक है. इसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं बैठती हैं और वैश्विक आर्थिक और दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करती हैं.
SAARC का दायरा क्षेत्रीय है. इसमें दक्षिण एशिया के देश शामिल हैं और इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है.
वहीं BRICS का आधार अलग है. इसमें ऐसी बड़ी उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में अपनी भूमिका और आवाज को मजबूत करना चाहती हैं. इसलिए सिर्फ नाम देखकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है.
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तीनों में देश मिलकर बातचीत करते हैं, लेकिन तीनों का उद्देश्य एक जैसा नहीं है. और यही वजह है कि जब दिल्ली में BRICS जैसा कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होता है, तो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों की नजर उस पर होती है. क्योंकि ऐसे मंचों पर होने वाली बातचीत का असर केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी पड़ सकता है.