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घर खाली कर दिया, फिर भी नहीं मिला डिपॉजिट? तो ऐसे मिलेगा पैसा

बेंगलुरु में एक मकान मालिक ने फ्लैट खाली करने के बाद किराएदार के 80 हजार रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं किए. मकान मालिक ने कथित तौर पर शर्त रखी कि पैसे तभी मिलेंगे, जब नया किराएदार मिल जाएगा.

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पैसे वापस नहीं मिलने पर महांता ने 30 अप्रैल 2026 को मकान मालिक को कानूनी नोटिस भेजा. ( Photo: ITG)
पैसे वापस नहीं मिलने पर महांता ने 30 अप्रैल 2026 को मकान मालिक को कानूनी नोटिस भेजा. ( Photo: ITG)

किराए का घर छोड़ते समय मकान मालिक से सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मांगना हर किराएदार का हक है. लेकिन कई बार मकान मालिक पैसे लौटाने के लिए ऐसी शर्त रख देते हैं कि किराएदार को अपने ही पैसे वापस पाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं. बेंगलुरु में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां मकान मालिक ने किराएदार के 80 हजार रुपये यह कहते हुए रोक लिए कि पहले फ्लैट के लिए नया किराएदार ढूंढना होगा. मामला कंज्यूमर कमीशन तक पहुंचा. सुनवाई के बाद कमीशन ने मकान मालिक को 80 हजार रुपये लौटाने, उस पर ब्याज देने और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने का आदेश दिया.

नौकरी की जगह बदली तो खाली करना पड़ा फ्लैट
यह मामला बेंगलुरु में रहने वाले वीरेश्वर महांता का है. वह एक फ्लैट में हर महीने 25 हजार रुपये किराया देते थे. उन्होंने मकान मालिक को 80 हजार रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर दिए थे. यह रकम घर खाली करने के बाद बकाया किराए या दूसरी जायज कटौतियों को हिसाब में लेकर वापस की जानी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, महांता के ऑफिस की जगह नागवारा से व्हाइटफील्ड हो गई थी.

इसके बाद उन्होंने 16 मार्च 2026 को मकान मालिक को फ्लैट खाली करने की जानकारी दी. उन्होंने 30 मार्च को फ्लैट खाली करके उसकी चाबियां भी सौंप दीं. महांता का कहना था कि उन्होंने फ्लैट अच्छी हालत में लौटाया था. इसके बावजूद मकान मालिक ने उनकी सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम वापस नहीं की.

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मकान मालिक ने रखी नए किराएदार की शर्त
महांता के मुताबिक, उन्होंने कई बार मकान मालिक से अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन उन्हें रकम नहीं मिली. 16 अप्रैल को वॉट्सअप कॉल पर मकान मालिक ने कथित तौर पर कहा कि पैसे तभी लौटाए जाएंगे, जब फ्लैट के लिए नया किराएदार मिल जाएगा. महांता का कहना था कि उनके रेंट एग्रीमेंट में ऐसी कोई शर्त नहीं थी कि सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस लेने के लिए नए किराएदार का मिलना जरूरी है.

वहीं, मकान मालिक ने दलील दी कि एग्रीमेंट के मुताबिक, घर खाली करने से तीन महीने पहले नोटिस देना जरूरी था. उसने यह भी कहा कि बकाया किराए, नुकसान या मरम्मत के खर्च जैसी रकम सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटी जा सकती है.

कोर्ट ने क्यों सुनाया किराएदार के पक्ष में फैसला?
पैसे वापस नहीं मिलने पर महांता ने 30 अप्रैल 2026 को मकान मालिक को कानूनी नोटिस भेजा. जब इसके बाद भी समस्या हल नहीं हुई, तो उन्होंने कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया. कमीशन ने रेंट एग्रीमेंट, किराया देने के रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत और फ्लैट की तस्वीरों व वीडियो की जांच की. कमीशन ने पाया कि मकान मालिक यह साबित नहीं कर पाया कि फ्लैट में कोई खास नुकसान हुआ था या किराएदार पर कितनी रकम बकाया थी.

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मकान मालिक ने बिजली बिल, मेंटेनेंस, मरम्मत और दूसरे बकाये का जिक्र तो किया, लेकिन इनके समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं दिए. कमीशन ने साफ कहा कि सिर्फ आरोप लगाने से पैसे रोकने का आधार नहीं बन जाता. इसके बाद कमीशन ने 26 सितंबर 2026 को आदेश दिया कि मकान मालिक महांता को 80 हजार रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाए. साथ ही, 30 मार्च 2026 से रकम वापस मिलने तक 9 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा. मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया गया. मकान मालिक को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय मिला.

किराएदार अपने सिक्योरिटी डिपॉजिट के पैसे कैसे वापस लें?
यह मामला उन लोगों के लिए भी अहम है, जो किराए के मकान में रहते हैं. घर खाली करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने से सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर होने वाले विवाद से बचा जा सकता है.

रेंट एग्रीमेंट पढ़ें: घर खाली करने से पहले नोटिस देने की अवधि और सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने से जुड़ी शर्तें जरूर देखें.

घर की तस्वीरें लें: फ्लैट खाली करते समय दीवारों, फर्श, दरवाजों और दूसरी चीजों की तस्वीरें और वीडियो बना लें. इससे घर की हालत का सबूत रहेगा.

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सभी भुगतान का रिकॉर्ड रखें: किराए, बिजली बिल और सिक्योरिटी डिपॉजिट की रसीद या ऑनलाइन भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखें.

चाबियां सौंपने का सबूत रखें: मकान मालिक को चाबियां सौंपने और घर खाली करने की तारीख का लिखित रिकॉर्ड रखें.

पैसे मांगने के लिए लिखित मैसेज भेजें: अगर मकान मालिक पैसे नहीं लौटाता, तो उससे लिखित में पूछें कि पैसे क्यों रोके गए हैं और कितनी कटौती किस वजह से की जा रही है.

अगर मकान मालिक बिना उचित वजह के पैसे रोकता है, तो किराएदार उससे कटौती का पूरा हिसाब और संबंधित सबूत मांग सकता है. जरूरत पड़ने पर कानूनी नोटिस भेजने या मामले के मुताबिक उचित कानूनी मंच पर शिकायत करने का विकल्प भी मौजूद है. इसका मतलब यह नहीं है कि मकान मालिक किसी भी स्थिति में सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे नहीं काट सकता. अगर किराया बकाया है या किराएदार ने घर को सामान्य इस्तेमाल से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, तो एग्रीमेंट और लागू कानून के मुताबिक जायज कटौती हो सकती है. लेकिन कटौती का ठोस आधार होना चाहिए.

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