20 जुलाई 1969 को चांद पर पहली बार इंसानी कदम पड़े थे. पृथ्वी से 240,000 मील दूर स्थित अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने धरती पर अपने घरों में बैठे एक अरब से अधिक लोगों को संबोधित करते हुए ये शब्द कहे - यह मनुष्य के लिए एक छोटा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक विशाल छलांग है. चंद्र मॉड्यूल ईगल से उतरकर , आर्मस्ट्रांग चंद्रमा की सतह पर कदम रखने वाले पहले मानव बने.
अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के अमेरिकी प्रयास की शुरुआत राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा 25 मई 1961 को कांग्रेस के विशेष संयुक्त सत्र में दिए गए एक प्रसिद्ध आह्वान से हुई - मेरा मानना है कि इस राष्ट्र को इस दशक के अंत से पहले चंद्रमा पर मनुष्य को उतारने और उसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए. उस समय, अंतरिक्ष विकास में अमेरिका अभी भी सोवियत संघ से पीछे था और शीत युद्ध के दौर के अमेरिका ने कैनेडी के इस साहसिक प्रस्ताव का स्वागत किया.
1966 में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा पांच वर्षों के परिश्रम के बाद NASA ने प्रस्तावित प्रक्षेपण यान और अंतरिक्ष यान संयोजन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण करने के लिए पहला मानवरहित अपोलो परीक्षण उड़ान संचालित किया. फिर, 27 जनवरी, 1967 को, फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित केप कैनावेरल अंतरिक्ष बल स्टेशन पर एक दुखद घटना घटी, जब अपोलो अंतरिक्ष यान और सैटर्न रॉकेट के मानवयुक्त प्रक्षेपण परीक्षण के दौरान आग लग गई. इस आग में तीन अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गई.
इस झटके के बावजूद, नासा और उसके हजारों कर्मचारियों ने अपना काम जारी रखा और अक्टूबर 1968 में, पहला मानवयुक्त अपोलो मिशन, अपोलो 7, पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए चंद्रमा की यात्रा और लैंडिंग के लिए आवश्यक कई अत्याधुनिक प्रणालियों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. उसी वर्ष दिसंबर में, अपोलो 8 तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दूर के हिस्से के चारों ओर ले गया और वापस लौटने से पहले 10 बार उसकी परिक्रमा की.
मार्च 1969 में अपोलो 9 ने पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए पहली बार चंद्र मॉड्यूल का परीक्षण किया. फिर मई में, अपोलो 10 के तीन अंतरिक्ष यात्रियों ने जुलाई में निर्धारित लैंडिंग मिशन के लिए पूर्वाभ्यास के तौर पर पहले पूर्ण अपोलो अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के चारों ओर 31 परिक्रमाओं में पहुंचाया.
16 जुलाई को सुबह 9:32 बजे, पूरी दुनिया की निगाहों के सामने, अपोलो 11 ने कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से नील आर्मस्ट्रांग, एडविन एल्ड्रिन जूनियर और माइकल कॉलिन्स को लेकर उड़ान भरी. 38 वर्षीय शोध पायलट आर्मस्ट्रांग मिशन के कमांडर थे. 76 घंटों में 240,000 मील की यात्रा पूरी करने के बाद, अपोलो 11 ने 19 जुलाई को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया. अगले दिन, दोपहर 1:46 बजे, आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन द्वारा संचालित चंद्र मॉड्यूल ईगल, कमांड मॉड्यूल से अलग हो गया, जहां कॉलिन्स मौजूद थे.
दो घंटे बाद, ईगल ने चंद्रमा की सतह पर उतरना शुरू किया और शाम 4:18 बजे यह यान सी ऑफ ट्रैंक्विलिटी के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर उतरा. आर्मस्ट्रांग ने तुरंत ह्यूस्टन, टेक्सास में मिशन कंट्रोल को रेडियो पर एक प्रसिद्ध संदेश भेजा- ईगल उतर गया है. रात 10:39 बजे, निर्धारित समय से पांच घंटे पहले, आर्मस्ट्रांग ने चंद्र मॉड्यूल का दरवाजा खोला. जैसे ही वे चंद्र मॉड्यूल की सीढ़ी से नीचे उतरे, उससे जुड़े एक टेलीविजन कैमरे ने उनकी प्रगति को रिकॉर्ड किया और सिग्नल को पृथ्वी पर भेजा, जहां करोड़ों लोग बड़ी उत्सुकता से देख रहे थे.
रात 11:11 बजे एल्ड्रिन चंद्रमा की सतह पर उनसे मिले और उन्होंने साथ मिलकर भूभाग की तस्वीरें लीं. अमेरिकी झंडा फहराया. कुछ सरल वैज्ञानिक परीक्षण किए औरराष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन से बात की. 21 जुलाई को सुबह 1:11 बजे तक, दोनों अंतरिक्ष यात्री चंद्र मॉड्यूल में वापस आ गए थे और हैच बंद कर दिया गया था.
दोनों ने वह रात चंद्रमा की सतह पर बिताई और दोपहर 1:54 बजे ईगल ने कमांड मॉड्यूल की ओर वापस उड़ान भरना शुरू किया. चंद्रमा की सतह पर छोड़ी गई वस्तुओं में एक पट्टिका भी थी, जिस पर लिखा था - यहां पृथ्वी ग्रह के मनुष्यों ने पहली बार चंद्रमा पर कदम रखा - जुलाई 1969 ईस्वी - हम समस्त मानव जाति के लिए शांति के साथ आए थे.
शाम 5:35 बजे, आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन सफलतापूर्वक कॉलिन्स से जुड़ गए और 22 जुलाई को रात 12:56 बजे अपोलो 11 ने अपनी घर वापसी की यात्रा शुरू की. 24 जुलाई को दोपहर 12:51 बजे प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतरा.