उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के गाजणा क्षेत्र के गोरसाड़ा गांव का एक परिवार पिछले करीब आठ साल से अपने बेटे और पिता की घर वापसी का इंतजार कर रहा है. गांव के रहने वाले इंद्रमणि नौटियाल वर्ष 2018 में रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए थे. वहां रियाद की एक निजी कंपनी में वह ट्रक चालक के तौर पर काम कर रहे थे. लेकिन एक सड़क हादसे के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया ने उनकी जिंदगी बदल दी. परिवार के मुताबिक, हादसे के मामले में इंद्रमणि को सऊदी अरब के कानून के तहत करीब एक साल जेल की सजा हुई. उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली, लेकिन इसके बावजूद उनका भारत लौटना संभव नहीं हो सका. अब उनकी स्वदेश वापसी के रास्ते में करीब 9 लाख सऊदी रियाल की देनदारी सबसे बड़ी बाधा बताई जा रही है. भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 2.29 करोड़ रुपये बताई गई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में इंद्रमणि जिस ट्रक को चला रहे थे, उससे सऊदी अरब में गंभीर सड़क दुर्घटना हुई थी. इस मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और उन्हें करीब एक वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई. इंद्रमणि ने यह सजा पूरी कर ली. इसके बाद ट्रक के बीमा और पंजीकरण से जुड़ी कमियों को लेकर कंपनी मालिक पर करीब 9 लाख सऊदी रियाल का जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई. परिवार का कहना है कि हादसे के कई साल गुजर जाने के बावजूद यह रकम जमा नहीं हो सकी. इसी वजह से इंद्रमणि की स्वदेश वापसी का मामला अब तक उलझा हुआ है. परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने इंद्रमणि का पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज अपने पास रखे थे. हालांकि इन आरोपों और पूरे मामले की कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित अधिकारियों और सऊदी अरब की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा.
बेटी ने शुरू किया पिता की वापसी का अभियान
पिता के वर्षों से विदेश में फंसे होने और परिवार की परेशानी को देखते हुए उनकी बेटी दीपिका नौटियाल ने उनकी स्वदेश वापसी के लिए अभियान शुरू किया. दीपिका ने सरकार, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की. सोशल मीडिया के जरिए जब इंद्रमणि का मामला लोगों तक पहुंचा तो उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों के अलावा देश और विदेश में रहने वाले लोगों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया. सामाजिक कार्यकर्ताओं और अलग-अलग संस्थाओं ने भी इस अभियान से जुड़कर सहयोग करना शुरू किया. 15 सितंबर 2026 तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, इंद्रमणि की भारत वापसी के लिए चलाए जा रहे अभियान में करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये जुटाए जा चुके हैं. लक्ष्य करीब 2.29 करोड़ रुपये बताया गया है. यानी अभी करीब 49 लाख रुपये और जुटाने की जरूरत है.
इंद्रमणि की स्वदेश वापसी का मामला अब शासन स्तर तक भी पहुंच चुका है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया है. मुख्यमंत्री ने विदेश मंत्रालय से जरूरी कानूनी और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही इंद्रमणि की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई का आग्रह किया है. इससे पहले अगस्त में मुख्यमंत्री के समन्वयक किशोर भट्ट ने मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात कर इंद्रमणि की वापसी का मामला उठाया था. उस समय मुख्यमंत्री की ओर से विदेश मंत्रालय से पत्राचार करने और जरूरी बातचीत का आश्वासन दिया गया था.
इंद्रमणि के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राज्य स्तर से भी सहायता की जानकारी सामने आई है. मुख्यमंत्री के समन्वयक किशोर भट्ट की ओर से परिवार को एक लाख रुपये की सहायता दिए जाने की रिपोर्ट है. इसके अलावा ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी अपने स्तर पर मदद की गई है. इंद्रमणि की स्वदेश वापसी के अभियान को उत्तराखंड के प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल का भी सहयोग मिला है. रिपोर्टों के अनुसार, जुबिन नौटियाल ने अभियान के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी.
49 लाख रुपये जुटाना अभी बाकी
करीब आठ साल से सऊदी अरब में फंसे इंद्रमणि की कहानी के बीच अब अभियान एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है. करीब 1.80 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगभग 49 लाख रुपये की और जरूरत है. परिवार के सामने अब शेष रकम जुटाने के साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने की चुनौती है. बेटी दीपिका लगातार पिता की सकुशल वापसी के लिए प्रयास कर रही हैं. परिवार की ओर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और जनप्रतिनिधियों से भी मदद की गुहार लगाए जाने की जानकारी सामने आई है.
परिवार और अभियान से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि जनसहयोग और सरकारी प्रयासों से शेष रकम की व्यवस्था हो सकेगी. इसके बाद करीब आठ वर्षों से सऊदी अरब में फंसे इंद्रमणि नौटियाल की स्वदेश वापसी का रास्ता साफ होने की उम्मीद है.