उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है. ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए लाखों लोग पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग से लेकर उत्तराखंड के नैनीताल, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और जोशीमठ तक इस समय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है.
पहाड़ों में मौसम सुहावना है, कहीं हल्की बारिश हो रही है तो कहीं बर्फबारी के नजारे देखने को मिल रहे हैं. यही वजह है कि लोग लंबा सफर और घंटों का ट्रैफिक जाम झेलने के बावजूद पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. हालांकि बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कई पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम लग रहे हैं.
मनाली-रोहतांग मार्ग पर 50 किलोमीटर चलने में लग रहे 8 घंटे
हिमाचल प्रदेश के मनाली में इन दिनों पर्यटकों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है. खासतौर पर मई के अंतिम दिनों में भी रोहतांग दर्रे पर बर्फ देखने की चाहत लोगों को अट्रैक्ट कर रही है. समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रा इस समय भी बर्फ की चादर से घिरा हुआ है.
लेकिन बढ़ती भीड़ ने मनाली-रोहतांग रोड की रफ्तार लगभग रोक दी है. शनिवार को इस रास्ते पर करीब 5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया. हालात ऐसे रहे कि सुबह 6 बजे मनाली से निकले कई टूरिस्ट दोपहर 1 से 2 बजे के बीच रोहतांग पहुंच पाए. सामान्य तौर पर लगभग 50 किलोमीटर का यह सफर इन दिनों 7 से 8 घंटे में पूरा हो रहा है.

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पर्यटकों का कहना है कि रास्ते में 3 से 4 घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ रहा है. कोलकाता से आए पर्यटक एस. मित्रा ने बताया कि प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए, क्योंकि नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहन चालकों की वजह से जाम और बढ़ रहा है.
स्थानीय पर्यटन कारोबारी हीरालाल का कहना है कि मढ़ी से ग्रामफू के बीच पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण पर्यटक सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं. इससे ट्रैफिक बाधित होता है और जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है. उनका मानना है कि यदि पार्किंग, टॉयलेट और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए तो समस्या कम हो सकती है.
नैनीताल में हाउसफुल होटल, नैनी झील में बोटिंग के लिए लंबी कतारें
सरोवर नगरी नैनीताल में भी पर्यटकों की भारी भीड़ है. वीकेंड के दौरान शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा. माल रोड, स्नो व्यू, चिड़ियाघर, केव गार्डन और आसपास के स्थलों पर दिनभर सैलानियों की चहल-पहल बनी रही. नैनी झील पर्यटकों से गुलजार है. बोटिंग का आनंद लेने के लिए झील किनारे लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं. सुबह से लेकर देर शाम तक पर्यटक नौकायन करते नजर आ रहे हैं. पहाड़ों की ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है.
पर्यटकों की भारी आमद का सीधा फायदा लोकल टूरिज्म को मिल रहा है. होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे लगभग पूरी क्षमता से संचालित हो रहे हैं. होटल व्यवसायियों और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि लंबे समय बाद कारोबार में ऐसी रौनक देखने को मिल रही है.

हालांकि भीड़ बढ़ने के साथ ट्रैफिक की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. माल रोड, भवाली रोड, कालाढूंगी रोड और शहर में एंट्री करने वाले रास्तों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. कई लोगों को घंटों तक वाहनों में फंसे रहना पड़ रहा है.
कैंचीधाम में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
बाबा नीम करौली महाराज के कैंचीधाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं.
आने वाले दिनों में कैंचीधाम स्थापना दिवस के कार्यक्रमों को देखते हुए भीड़ और बढ़ने की संभावना है. प्रशासन भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है.
चारधाम यात्रा ने बढ़ाया दबाव, जोशीमठ में 20 किलोमीटर तक जाम
उत्तराखंड के चमोली जिले में चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है. बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक औली, नीति-माणा घाटी और अन्य पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं.
इस समय जोशीमठ क्षेत्र सबसे ज्यादा दबाव झेल रहा है. मारवाड़ी से गोविंदघाट तक और जोशीमठ से सेलंग तक कई जगहों पर 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम देखने को मिल रहा है. सुबह से लेकर देर रात तक सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं.
हालांकि प्रशासन ने वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू किया हुआ है, लेकिन भारी भीड़ के कारण यह व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पा रही. कई लोगों को 2 से 3 घंटे तक गेट खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है.
बारिश और बर्फबारी के बीच भी नहीं कम हो रही आस्था
चमोली जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में अभी भी बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है. इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं है. बद्रीनाथ धाम में अब तक 7.25 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि चारधाम यात्रा में कुल यात्रियों की संख्या 24 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है.
हेमकुंड साहिब में भी बर्फबारी के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है. कई जगहों पर यात्रियों को हाथ पकड़कर रास्ता पार करवाया जा रहा है. बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल हो रहे हैं.
यात्रियों का कहना है कि दिल्ली और अन्य मैदानी शहरों में जहां 45 से 50 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है, वहीं पहाड़ों में ठंडी हवाएं और बारिश राहत का अहसास कराती हैं.

होटल इंडस्ट्री को मिला बड़ा फायदा
पर्यटकों और श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या का सीधा फायदा टूरिज्म इंडस्ट्री को मिल रहा है. होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवा, रेस्टोरेंट, लोकल मार्केट और छोटे व्यापारियों को फायदा हो रहा है.
जोशीमठ होटल एसोसिएशन के अनुसार, इस समय अधिकांश होटल पूरी तरह बुक हैं. कई पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग होने के बावजूद ट्रैफिक जाम के कारण समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं. इसके बावजूद पर्यटन कारोबार अपने चरम पर है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो जून महीने में पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है.
चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ के साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आ रही हैं. बद्रीनाथ धाम और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों से सीधे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि यात्रियों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले निचले स्थानों पर कुछ समय रुकना चाहिए, ताकि शरीर वातावरण के अनुसार खुद को ढाल सके.
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के बढ़ते दबाव ने प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्यटकों और यात्रियों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में स्थायी पार्किंग, बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की जरूरत और अधिक महसूस होगी.