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आजादी के 75 साल बाद भी इस गांव में नहीं पहुंच पाई बिजली और सड़क, अंधेरे में रहते हैं लोग

आजादी के 75 साल पूरे हो जाने के बाद भी उत्तराखंड में ऐसा गांव है जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है. इस गांव के लोग आज भी बिजली और सड़क जैसी बुनियादी चीजों के लिए तरस रहे हैं. शाम के 6 बजते ही ये लोग जंगली जानवरों के डर से अपने घरों में दुबक जाते हैं.

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इस गांव में अभी तक नहीं पहुंच पाई है बिजली
इस गांव में अभी तक नहीं पहुंच पाई है बिजली

देश की आजादी के बाद सरकार ने देश के कोने-कोने तक बिजली पहुंचा दी है, लेकिन उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में आज भी ऐसा एक गांव है जहां के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं क्योंकि वहां अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है.

बागेश्वर के पिंडर घाटी में एक ऐसा गांव है जहां आज भी बिजली लोगों के लिए सपने के पूरा होने जैसा ही है. पिंडर घाटी के जैकुनी के ग्रामीण आज भी मोमबत्ती और दिया जलाकर रात काटने को मजबूर है.

सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब बच्चों को पढ़ाई करनी होती है. बिजली नहीं होने से गांव के लोग शाम 6:00 बजे ही घरों में दुबक जाते हैं क्योंकि इस क्षेत्र में  भालू का आतंक रहता है.

बागेश्वर जनपद की कपकोट विधानसभा के जैकुनी गांव में बिजली व्यवस्था नहीं होने से आज भी लोग परेशान हैं. आज तक के सहयोगी चैनल उत्तराखंड तक से बात करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि हमारे गांव के लिए पैदल रास्ता तक नहीं बन पाया है और गांव में बिजली भी नही हैं.  फोन नेटवर्क भी नहीं होने से लोगों को एक दूसरे से संपर्क करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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जैकुनी गांव में आज तक न तो फोन नेटवर्क है और न ही बिजली ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां के लोग कैसे अपना जीवन बसर करते होंगे.

गांव की दिक्कतों को लेकर एक छात्र ने बताया कि यहां पर्यटक भी घूमने आते हैं क्योंकि यह अंतिम गांव है लेकिन फिर भी यहां कोई व्यवस्था नहीं की गई है.

 

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