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कॉर्बेट में प्रकृति का 'सुपर डैड': पहली बार दो चूजों की परवरिश करता कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में पहली बार दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप अपने दो चूजों के साथ कैमरे में कैद हुआ है. इसे कॉर्बेट लैंडस्केप का पहला पुष्ट प्रजनन (Confirmed Breeding Record) माना जा रहा है. इस दुर्लभ पक्षी में अंडों और चूजों की देखभाल नर करता है, जबकि मादा अंडे देने के बाद घोंसला छोड़ देती है. विशेषज्ञों ने इसे वन्यजीव संरक्षण और वेटलैंड संरक्षण की बड़ी उपलब्धि बताया है.

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वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने कॉर्बेट लैंडस्केप में दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप दो नन्हे चूजों के साथ कैद किया  (Photo : ITG)
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने कॉर्बेट लैंडस्केप में दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप दो नन्हे चूजों के साथ कैद किया (Photo : ITG)

उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐसी दुर्लभ उपलब्धि सामने आई है, जिसने पक्षी वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है. पहली बार कॉर्बेट लैंडस्केप के कोसी नदी क्षेत्र में दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड स्नाइप (Greater Painted Snipe) अपने दो नन्हे चूजों के साथ कैमरे में कैद हुआ है. इसे इस प्रजाति का कॉर्बेट लैंडस्केप में पहला कन्फर्म्ड ब्रीडिंग रिकॉर्ड माना जा रहा है.

इस खोज को और भी खास बनाती है इस पक्षी की अनोखी जीवनशैली. जहां अधिकांश पक्षियों में अंडों और बच्चों की देखभाल मादा करती है, वहीं ग्रेटर पेंटेड स्नाइप में प्रकृति ने भूमिकाएं बिल्कुल उलट दी हैं. मादा अंडे देने के बाद घोंसला छोड़ देती है, जबकि नर पक्षी अकेले अंडों को सेता है, उनकी सुरक्षा करता है और चूजों का पालन-पोषण भी करता है. प्रकृति के इस दुर्लभ और भावुक दृश्य को प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने अपने कैमरे में शानदार ढंग से रिकॉर्ड किया है. उनके कैमरे में कैद यह दृश्य न सिर्फ वन्यजीव फोटोग्राफी की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला सीएम धामी के साथ

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिकॉर्ड इस बात का मजबूत प्रमाण है कि कॉर्बेट के वेटलैंड और कोसी नदी का पारिस्थितिक तंत्र आज भी दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के प्रजनन के लिए सुरक्षित और अनुकूल बना हुआ है. यह खोज उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता को नई पहचान देने के साथ-साथ वेटलैंड संरक्षण की सफलता को भी रेखांकित करती है.

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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने इसे संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि भविष्य में पक्षी संरक्षण, वेटलैंड इकोलॉजी और वैज्ञानिक शोध के लिए मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि कॉर्बेट केवल बाघों का घर नहीं, बल्कि दुर्लभ पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित आश्रय बनकर उभर रहा है. कॉर्बेट से सामने आया यह दुर्लभ रिकॉर्ड एक बार फिर साबित करता है कि यदि प्राकृतिक आवासों का संरक्षण ईमानदारी से किया जाए, तो प्रकृति अपने सबसे अनमोल रहस्य स्वयं दुनिया के सामने उजागर कर देती है.
 

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