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जब जर्मनी ने ब्रिटेन पर बमबारी शुरू की, 3 महीने तक चली थी लड़ाई

आज के दिन ही दूसरे वर्ल्ड वॉर में ब्रिटेन की लड़ाई शुरू हुई थी. जब जर्मनी ने लंदन के ऊपर भीषण बमबारी शुरू की. संख्या में कम बमवर्षक विमान होने के बावजूद अपनी सूझबूझ की बदौलत ब्रिटेन का पलड़ा भारी रहा था.

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दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी ने आज के दिन ही ब्रिटेन पर शुरू की थी भीषण बमबारी (Photo - Getty)
दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी ने आज के दिन ही ब्रिटेन पर शुरू की थी भीषण बमबारी (Photo - Getty)

10 जुलाई 1940 को जर्मनी ने ग्रेट ब्रिटेन पर बमबारी के लंबे सिलसिले की शुरुआत की. इसी के साथ ब्रिटेन की लड़ाई शुरू हुई, जो साढ़े तीन महीने तक चली. जर्मनी के फ्रांस पर कब्जा करने के बाद , ब्रिटेन को पता था कि धुरी शक्ति का ध्यान इंग्लिश चैनल के पार जाने में है और ऐसा करने में बस कुछ ही समय लगेगा. 10 जुलाई को 120 जर्मन बमवर्षक और लड़ाकू विमानों ने उसी इंग्लिश चैनल में एक ब्रिटिश जहाजी काफिले पर हमला किया, जबकि 70 अन्य बमवर्षकों ने दक्षिण वेल्स में डॉकयार्ड पर हमला किया.

हालांकि, ब्रिटेन के पास जर्मनी की तुलना में लड़ाकू विमानों की संख्या काफी कम थी. ब्रिटेन के पास 600 बमवर्षक थे तो जर्मनी के पास  1,300. लेकिन, ब्रिटेन के पास एक प्रभावी रडार प्रणाली, जिससे जर्मन सीक्रेट अटैक की संभावना कम हो जाती थी. वहीं ब्रिटेन ने बेहतर गुणवत्ता वाले विमान भी बनाए. उसके स्पिटफायर जर्मनी के ME109 की तुलना में अधिक सटीक मोड़ ले सकते थे, जिससे वह पीछा करने वालों से बेहतर तरीके से बच निकलता था.

जर्मन एकल-इंजन लड़ाकू विमानों की उड़ान सीमित थी और उनके बमवर्षक विमानों में अपने लक्ष्यों पर स्थायी विनाश करने के लिए आवश्यक बम ले जाने की क्षमता नहीं थी. ब्रिटेन को इंटीग्रेटेड टारगेट पर ध्यान केंद्रित करने का भी लाभ था, जबकि जर्मनों के आपसी संघर्ष के कारण समय निर्धारण में चूक होती थी. उन्हें खराब खुफिया जानकारी का भी सामना करना पड़ता था.

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बर्तनों को पिघलाकर ब्रिटेन ने बनाए थे विमान
युद्ध के शुरुआती दिनों में, ब्रिटेन को दो चीजों की तत्काल आवश्यकता थी. सामूहिक धैर्य और एल्युमीनियम. सरकार ने विमान उत्पादन मंत्रालय से सभी उपलब्ध एल्युमीनियम सौंपने की अपील की. ​​मंत्रालय ने घोषणा की कि हम आपके बर्तनों को स्पिटफायर और हेरिकेन विमानों में बदल देंगे. और उन्होंने ऐसा ही किया.

अक्टूबर 1940 के अंत तक, हिटलर ने ब्रिटेन पर आक्रमण की अपनी योजना रद्द कर दी और ब्रिटेन की लड़ाई समाप्त हो गई. दोनों पक्षों को भारी जानमाल का नुकसान हुआ. फिर भी, ब्रिटेन ने लूफ्टवाफे को कमजोर कर दिया और जर्मनी को हवाई वर्चस्व हासिल करने से रोक दिया. यह हिटलर के लिए युद्ध की पहली बड़ी हार थी.

हालांकि, फ्रांस के पतन के बाद ब्रिटेन जर्मनी के खिलाफ अकेला खड़ा था, लेकिन ब्रिटेन की लड़ाई में भाग लेने वाले आरएएफ पायलटों में से लगभग एक चौथाई पोलैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चेकोस्लोवाकिया, बेल्जियम, फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका सहित अन्य देशों से थे.

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