देहरादून से हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले में धामी सरकार की अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है. इस मामले में सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा से बर्खास्तगी की सिफारिश की है. साथ ही कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है. सरकारी आदेश के अनुसार तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को देखते हुए मेजर पनिशमेंट देने का निर्णय लिया गया है. वहीं तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के आदेश जारी किए गए हैं.
सरकार ने इस पूरे मामले को आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानी DoPT को भेजने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही इस घोटाले से जुड़े 10 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है. यह पूरा मामला अप्रैल 2025 में सामने आए हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले से जुड़ा है. आरोप है कि नगर निगम ने लगभग 14 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदा, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ.
मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को पहले ही निलंबित कर दिया गया था. उत्तराखंड प्रशासनिक इतिहास में यह पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है जिसमें जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और एसडीएम को एक साथ निलंबित किया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच सचिव रणवीर चौहान को सौंपी गई थी. रणवीर चौहान ने हरिद्वार पहुंचकर विस्तृत जांच की और करीब 100 पन्नों की रिपोर्ट शासन को सौंपी. इसी रिपोर्ट के आधार पर अब यह बड़ी कार्रवाई की गई है.
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि भूमि खरीद प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं की गईं. रिपोर्ट के अनुसार भूमि की खरीद प्रक्रिया कृषि भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शुरू की गई थी, लेकिन बाद में इसे वाणिज्यिक दरों पर खरीदा गया. रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि भूमि खरीद के लिए आवश्यक लैंड कमेटी का गठन नहीं किया गया था और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को दरकिनार कर निर्णय लिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि धारा 143 की पूरी प्रक्रिया केवल दो से तीन दिनों में पूरी कर दी गई, जो सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से बिल्कुल असामान्य मानी गई है.
रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन एसडीएम ने फाइल को तेजी से निपटाने के लिए अपने स्टेनो को ही राजस्व अभिमत देने का कार्य सौंप दिया, जो नियमों के खिलाफ था. इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि खरीदी गई भूमि कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और उसकी तत्काल कोई आवश्यकता नहीं थी. इसके बावजूद जमीन का चयन कर सर्किल रेट के आधार पर खरीद प्रक्रिया पूरी की गई.
सरकार ने इस मामले में पहले ही दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया था. अब जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग या नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. यह कार्रवाई राज्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.