scorecardresearch
 

वाराणसी: पूर्वांचल में षष्ठी से पहले पूजा पंडाल में स्थापित नहीं हो पाएंगी दुर्गा प्रतिमाएं

षष्ठी यानी छठे दिन के पहले धर्म की नगरी काशी के पूजा पंडालों में मां की प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाएगी. ऐसा इसलिए, क्योंकि मूर्तिकारों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.

पंडाल में षष्ठी तक पहुंचेंगी प्रतिमाएं (फाइल फोटोः पीटीआई) पंडाल में षष्ठी तक पहुंचेंगी प्रतिमाएं (फाइल फोटोः पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रशासन ने देर से दी पूजा की इजाजत
  • देर से शुरू हुआ मूर्ति निर्माण का कार्य
  • देर से आईं कोरोना को लेकर गाइडलाइंस

त्यौहारों के मौसम में पूर्वांचल के लोगों को मां दुर्गा की प्रतिमा का दर्शन करने के लिए इंतजार करना पड़ेगा. धर्म की नगरी काशी समेत पूर्वांचल में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं. नवरात्रि के दौरान पूजा पंडालों में दुर्गा प्रतिमाएं देर से स्थापित होंगी. षष्ठी यानी छठे दिन के पहले धर्म की नगरी काशी के पूजा पंडालों में मां की प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाएगी. ऐसा इसलिए, क्योंकि मूर्तिकारों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं.

ऐसा इसलिए क्योंकि शासन-प्रशासन की ओर से स्पष्ट गाइडलाइंस आने में देर हुई. इस देर को ही पूजा पंडालों में मूर्तियां रखे जाने में देर के पीछे बड़ी वजह बताया जा रहा है. दुर्गा पूजा को लेकर छाई रही अनिश्चितता के कारण तैयारियां प्रभावित हुईं. गाइडलाइंस देर से आने के चलते मूर्तिकारों पर हद से ज्यादा वर्क लोड बढ़ गया.

काशी के मूर्तिकार भी अजीबोगरीब धर्मसंकट में पड़ गए हैं. अगर वे दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण का ऑर्डर नहीं लेते हैं तो आस्था पर चोट पहुंचेगी. अगर लेते हैं तो प्रतिमा का निर्माण समय से पूरा करना भी बड़ी चुनौती बन गया है. कोरोना काल की वजह से पहले शासन और फिर जिला प्रशासन की ओर से मिले देर से दिशा-निर्देशों और मानक अनुसार मूर्ति की अनुमति ने इस बार दुर्गा पूजा के उत्साह को फीका कर दिया है. यही वजह है कि दुर्गा प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकारों ने नवरात्रि के छठे दिन के पहले किसी भी मूर्ति की डिलीवरी कैंसिल कर दी है. नतीजतन अब पंडालों में दुर्गा प्रतिमाएं षष्ठी यानी छठे दिन ही स्थापित हो पाएंगी.

देखें: आजतक LIVE TV

गौरतलब है कि दुर्गा प्रतिमाएं वाराणसी से बनकर पूर्वांचल के अलग-अलग इलाकों तक जाती हैं. दुर्गा पूजा की झांकी देखने पूर्वांचल भर से आस्थावान वाराणसी आते हैं. इसलिए इस बार वाराणसी में दुर्गा पूजा नवरात्रि के छठे दिन से पहले शुरू होती नहीं दिख रही हैं. मूर्तिकार अभिजीत विश्वास के परिवार की तीन पीढ़ियां दुर्गा प्रतिमा के निर्माण से जुड़ी रही हैं. अभिजीत बताते हैं कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक 21 सितंबर से सारे धार्मिक आयोजनों पर छूट मिलनी थी. इससे उम्मीद जगी थी, लेकिन फिर शासन-प्रशासन की ओर से आदेश आया कि वाराणसी में दुर्गा पूजा नहीं होगी. इसके बाद दुर्गा पूजा का जो आदेश आया भी तो काफी देर से.

उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा शुरू होने से ठीक 8-9 दिन पहले आदेश आया और तब दुर्गा पूजा समितियों के लोग प्रतिमा के ऑर्डर देने लगे. मूर्तिकार अभिजीत बताते हैं कि मूर्ति के लिए पांच फीट तक का मानक तय कर दिया गया है, इसलिए मूर्तिकारों के आगे और बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई है. फिर न तो रॉ मैटेरियल ठीक से मिल सका और न ही पश्चिम बंगाल से आने वाले कारीगर. इसलिए रीति-रिवाज के मुताबिक पूजा समिति वाले चतुर्थी-पंचमी को मूर्ति की डिमांड करने लगे. लेकिन हम असमर्थ हो गए और अब षष्ठी यानि छठे दिन ही देंगे. वे सवाल पूछते हैं कि जब सभी राज्यों में छूट दिया गया है तो यूपी में क्यों नहीं. क्योंकि जब सरकार सारी चीजें खोल रही है तो दुर्गा पूजा पर पाबंदी क्यों?

जब पूजा की अनुमति मिली, अंतिम समय में पश्चिम बंगाल से प्रतिमा निर्माण के लिए कारीगर बुलाए गए. इसे लेकर श्रमिक गोपीनाथ पाल ने कहा कि उनको आने के लिए कई बार ट्रेन और बसें बदलनी पड़् और मूर्तिकारों को काफी समस्याएं झेलनी पड़ीं. इसके अलावा सालभर की कमाई एक सीजन की मेहनत से मिल जाती थी. वह भी खत्म हो गई.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें