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वो पुश्तैनी रसूख जिसने अमनमणि त्रिपाठी को दिलाया लॉकडाउन में बर्फबारी देखने का लाइसेंस

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्वांचल के बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी के बेटे निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी एक बार फिर विवादों के घेरे में है. अमनमणि लॉकडाउन के बीच पहाड़ों की सैर करने के लिए अपने काफिले के साथ जा रहे थे, जिन्हें बिजनौर में गिरफ्तार कर लिया गया है.

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निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी (फोटो-फेसबुक)
निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी (फोटो-फेसबुक)

  • अमनमणि त्रिपाठी लॉकडाउन में निकले थे पहाड़ों की सैर करने
  • अमनमणि के पिता अमरमणि त्रिपाठी पूर्वांचल के बाहुबली नेता

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्वांचल के बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी के बेटे निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी एक बार फिर विवादों के घेरे में है. लॉकडाउन के बीच अमनमणि 11 लोगों के काफिले के साथ देहरादून से बद्रीनाथ और केदारनाथ जा रहे थे. रास्ते में चमोली बॉर्डर पर उन्हें रविवार रात रोक लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें यूपी बार्डर पर लाकर छोड़ दिया गया. अमनमणि समेत 7 लोगों को सोमवार को बिजनौर में गिरफ्तार किया गया. उन पर लॉकडाउन के उल्लंघन में एफआईआर दर्ज कर ली गई.

यूपी के महाराजगंज की नौतनवा सीट से विधायक अमनमणि लॉकडाउन के बीच पहाड़ों की सैर करने के लिए निकले थे. उनकी एक क्लिप वायरल हो रही है जिसमें अमनमणि बर्फबारी के बार में भी पूछ रहे हैं. अमनमणि के पास के मुताबिक देहरादून से श्रीनगर, श्रीनगर से बद्रीनाथ, बद्रीनाथ से केदारनाथ और फिर केदारनाथ से देहरादून तक का शेड्यूल लिखा था. वहीं पास पर उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश व देहरादून के अपर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर भी थे.

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उत्तराखंड सरकार की ओर से कहा गया है कि पास जारी होने की जांच की जाएगी कि कैसे अमनमणि को ऐसा पास जारी कर दिया गया. वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार का भी कहना है कि अमनमणि त्रिपाठी को उत्तराखंड जाने के लिए अधिकृत ही नहीं किया गया था. ऐसे में सवाल यह है कि ये पास कहां से अमनमणि को मिले और कैसे जारी हुए. हालांकि, उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, लेकिन अमनमणि त्रिपाठी और उनके पिता अमरमणि त्रिपाठी के सियासी रसूख में कोई कमी नहीं रही.

amar-mani-tirpathi_050520085630.jpgअमरमणि त्रिपाठी

अमनमणि त्रिपाठी अपने पिता अमरमणि त्रिपाठी के नक्शेकदम पर चल रहे हैं. अमनमणि के पिता अमरमणि और मां मधुमणि इस समय जेल में हैं. लखनऊ की एक लेखिका मधुमिता शुक्ला की हत्या का उन पर आरोप है. ऐसे ही अमनमणि पर भी अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या का भी आरोप है. 2017 का चुनाव उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जेल में रहकर ही लड़ा था जिसमें वह जीत गए. हालांकि, यूपी में योगी सरकार के बनने के बाद से वे लगातार बीजेपी में शामिल होने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक बात नहीं बनी है.

अमरमणि त्रिपाठी ने हर बदलती सत्ता का सुख भोगा

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बता दें कि अमरमणि त्रिपाठी उन नेताओं में से थे जो उस दौर में हर बदलती सत्ता का जरूरी हिस्सा हुआ करते थे. अमरमणि त्रिपाठी की राजनीति की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के विधायक हरिशंकर तिवारी के साथ हुई. 2001 की बीजेपी सरकार में भी त्रिपाठी मंत्री थे. बस्ती के एक बड़े बिजनेसमैन का पंद्रह साल का लड़का राहुल मदेसिया किडनैप हो गया था. रिहा होने पर पता चला कि किडनैपर्स ने उसे अमरमणि के बंगले में ही छिपा रखा था. अमरमणि को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया गया.

इसके बाद यूपी में मुलायम सिंह की सरकार बनी तो वे सपा के हो गए और फिर बसपा के हाथी पर सवार हो गए और 2012 के चुनाव से पहले सपा की साइकिल पर फिर सवारी कर बैठे. एक समय अमरमणि को पूर्वांचल के नेता हरिशंकर तिवारी का राजनीतिक वारिस कहा जाने लगा था. लगातार 6 बार विधायक रहे और वो जेल से चुनाव जीतने वाले पहले नेताओं में से एक थे. सपा, बसपा और बीजेपी में जो भी लखनऊ के पंचम तल (मुख्यमंत्री दफ्तर) पर आया अमरमणि उसके खास हो गए. अमरमणि के कद के चलते हर पार्टी में उनका इस्तकबाल करने वाले कई लोग थे.

मधुमिता शुक्ला लखीमपुर खीरी की कवियत्री, जो वीर रस की कविता पढ़ने के लिए पहचानी जाती थीं, मई 2003 में लखनऊ की पेपरमिल कॉलोनी में मधुमिता की गोली मार हत्या कर दी गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मधुमिता के प्रेग्नेंट होने का पता लगा था. वो सात महीने की गर्भवती थीं. डीएनए जांच में पता चला कि मधुमिता के पेट में पल रहा बच्चा उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी का है. इस घटना से उत्तर प्रदेश के सियासी हल्कों में भूचाल आ गया.

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मामला सियासी रंग पकड़ चुका था. केस देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट के पास गया. पति और मधुमिता के संबंधों को जानने वाली अमरमणि की पत्नी मधुमणि साजिश में शामिल थी, जिसके चलते उम्रकैद की सजा हुई. सियासी रसूख ऐसा है कि पिछले सात सालों से अमरमणि और उनकी पत्नी जेल के बजाय इलाज के नाम पर अस्पताल में हैं, जहां पूरा दरबार लगता है.

पिता को उम्रकैद की सजा होने के बाद बेटे अमनमणि उनकी सियासत को आगे बढ़ाने के लिये मैदान में उतरे और 2012 के चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन बहुत मामूली वोटों से हार गए. इसके बाद 2017 में निर्दलीय किस्मत आजमाई और विधायक बनने में सफल रहे.

अमनमणि की हिस्ट्रीशीट और पत्नी की हत्या का आरोप

अमरमणि की तरह अमनमणि त्रिपाठी भी सियासत में कदम बढ़ा रहे हैं. अमनमणि को अपहरण के एक मामले में 2017 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश किया गया था, लेकिन अदालत से वो फरार हो गए थे. अमनमणि पर अगस्‍त 2014 को गोरखपुर के ठेकेदार ऋषि पांडेय को अगवा कर पीटने और एक लाख रुपये बतौर रंगदारी का आरोप लगा था.

अमनमणि पर इसके साथ ही साजिश करके अपनी पत्नी सारा की हत्या का भी आरोप है. यही नहीं अपराध छिपाने के लिए उसने इसे सड़क हादसे की शक्ल दे दी. अमनमणि त्रिपाठी की पत्नी सारा की कार हादसे में मौत को उनकी मां सीमा सिंह ने हत्या करार दिया. इसके बाद सीबीआई जांच हुई और उन्हें गिरफ्तार किया गया. फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन केस चल रहा है. पिता अमरमणि को जहां प्रेमिका की हत्या की सजा मिली है तो बेटे अमनमणि त्रिपाठी पर पत्नी की हत्या का आरोप है. इसके बाद भी बाहुबली त्रिपाठी परिवार की राजनीतिक हैसियत में कोई कमी नहीं दिख रही है.

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