पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में चल रही है. इस दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट में राज्य सरकार और अभिषेक बनर्जी के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली. कोर्ट में राज्य सरकार के वकील ने दावा किया कि इस मामले में अभिषेक बनर्जी को एक आरोपी के तौर पर देखा जाना चाहिए.
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत से बताया कि अभिषेक बनर्जी को जांच एजेंसी के सामने पेश होने को कहा गया था, लेकिन वह एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए और न ही उन्होंने कोई दस्तावेज दिए हैं.
इस मामले में अभिषेक बनर्जी को सीआईडी अपने समक्ष पेश होने के लिए कई नोटिस भी भेज चुकी है. लेकिन उनका कोई जवाब नहीं दिया गया है. सीआईडी उनको हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है, लेकिन वे खुद को एक गवाह बना रहे हैं.
अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर उठे सवाल
राजदीप मजूमदार ने हाई कोर्ट को बताया कि इस पूरे मामले में अभिषेक की भूमिका संदिग्ध है. उन्होंने कहा था कि 19 मई को विधायकों की बैठक बुलाई गई थी. इसमें ही विधायकों ने साइन किए थे, लेकिन संबंधित विधायकों ने जांच एजेंसी को बताया है कि कोई बैठक नहीं हुई थी और उन्होंने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. आरोप है कि अभिषेक ने पिछली तारीख डालकर हस्ताक्षर कराए थे.
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मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के वकील सीनियर अधिवक्ता अयान भट्टाचार्य ने कहा कि नोटिस अगर भेजा गया है, तो वह केवल पूछताछ के लिए होना चाहिए, हिरासत के लिए नहीं. उन्होंने कहा कि कथित रूप से पिछली तारीख डालकर हस्ताक्षर करना अपने आप में जालसाजी नहीं माना जा सकता हैं. जांच एजेंसी के सामने पेश न होने के मामले में भी उन्होंने तर्क दिया.
अयान भट्टाचार्य ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को सुबह 10 बजे से रात 10 बजे के बीच किसी भी समय पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है, लेकिन उनपर किसी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
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पांच विधायकों ने दर्ज कराई शिकायत
सुनवाई के दौरान जस्टिस चंदा ने सवाल किया कि कितने लोगों ने हस्ताक्षर फर्जी होने का आरोप लगाया है. इस पर राज्य सरकार ने बताया कि पांच विधायकों ने शिकायत दर्ज कराई है और दस्तावेज में उनके नाम ब्लॉक लेटर्स में लिखे गए थे. इस सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करने और सीआईडी के सामने पेश होने का आदेश दिया.