भूमाता रागिनी ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई ने गुरुवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच हाजी अली की दरगाह पहुंचीं. उन्हें दरगाह में उस जगह तक जाने दिया गया जहां आम महिलाओं को जाने की छूट है. दरगाह के आंतरिक हिस्से में स्थित पवित्र स्थान पर नहीं जाने दिया गया.
दरगाह में जाने के बाद तृप्ति देसाई ने कहा कि वह बिना किसी को सूचित किए वहां गई हैं और माथा टेका. उन्होंने कहा, 'मैं उम्मीद करती हूं कि बाकी महिलाओं को भी दरगाह में जाने की इजाजत मिले.'
At Haji Ali Dargah I prayed that women must be allowed to enter inner sanctum like they did before '11: Trupti Desai
— ANI (@ANI_news)
हर पल साथ में था दरगाह प्रबंधन
हाजी अली दरगाह के प्रबंधन ने बताया कि तृप्ति देसाई को माथा टेकने की इजाजत दी गई थी लेकिन उन्हें दरगाह के आंतरिक स्थान में नहीं जाने दिया गया. पूरे समय उनके साथ दरगाह प्रबंधन के लोग थे. प्रबंधन ने कहा, 'उन्हें दरगाह के अंदर नहीं जाने दिया गया, गेट पर ही माथा टेक कर वह वापस हो गईं. जहां तक हर महिला को जाने की इजाजत है तृप्ति देसाई को भी वहीं तक जाने दिया गया. मुख्य मजार तक जाने की इजाजत नहीं दी गई.' दरगाह प्रबंधन ने कहा कि मुख्य मजार के गेट तक पहुंचने के बाद भी तृप्ति काफी खुश थीं, और फिर वापस लौट गईं.
पिछली बार सड़क से ही लौटी थीं तृप्ति
बता दें कि पिछली बार तृप्ति देसाई ने जब दरगाह में जाने की कोशिश की थी तो उन्हें रास्ते में ही रोक लिया गया था. उस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनका विरोध किया था. मुस्लिम समुदाय के लोग मजार में महिलाओं के प्रवेश को अपनी परंपरा के खिलाफ मानते हैं.