
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी PNC इंफ्राटेक एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है. कंपनी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं. एक्सप्रेसवे के निर्माण में गुणवत्ता की धज्जियां उड़ने की तस्वीरें सामने आई हैं. साथ ही कंपनी पर संभावित ब्लैकलिस्टिंग का खतरा भी मंडरा रहा है. इन सबके बावजूद, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया NHAI ने कंपनी पर मेहरबानी दिखाते हुए उसे 3,500 करोड़ रुपये से अधिक के नए प्रोजेक्ट्स सौंप दिए हैं.
इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी BJP के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का पुराना और प्रत्यक्ष कनेक्शन भी सामने आ रहा है, जिससे यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी तूल पकड़ चुका है.
गौरतलब है, PNC इंफ्राटेक की शेयरहोल्डिंग और इतिहास में बीजेपी के राज्यसभा सांसद नवीन जैन का नाम प्रमुखता से जुड़ा रहा है. नवीन जैन खुद इस कंपनी में व्होल-टाइम डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके हैं.
समय के साथ वह राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो गए और वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं, जबकि कंपनी के दैनिक संचालन और नियंत्रण की कमान उनके भाइयों के हाथों में है.
कंपनी के प्रमोटर समूह में नाम शामिल होने के कारण अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या राजनीतिक रसूख और प्रभाव के चलते ही विवादों और जांच के घेरे में रहने के बावजूद कंपनी को लगातार नए प्रोजेक्ट्स का तोहफा मिलता रहा है?

कंपनी का विवादों से है पुराना नाता
PNC इंफ्राटेक का विवादों से पुराना नाता रहा है. कंपनी और उसके अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं. 2024 में CBI ने हाईवे प्रोजेक्ट्स से जुड़े कथित रिश्वत मामले में एक बड़ी FIR दर्ज की थी. इस मामले में NHAI के एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी भी हुई थी. जांच की आंच PNC से जुड़े अधिकारियों तक भी पहुंची थी.
वहीं उत्तर प्रदेश में अवैध खनन से जुड़े एक अन्य मामले में कंपनी पर लगभग ₹104 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना लगाए जाने का मामला भी सामने आ चुका है. इससे पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के करीब 56 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के दौरान भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल और गुणवत्ता संबंधी गंभीर शिकायतें मिली थीं, जिसकी जांच कराई गई थी.
एक्सप्रेसवे पर सड़क सुखाने के लिए लगे टेबल फैन
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खोलने वाली एक बेहद अजीबोगरीब तस्वीर सामने आई थी. एक्सप्रेसवे पर सड़क निर्माण के दौरान नमी को सुखाने के लिए पारंपरिक या तकनीकी उपकरणों की बजाय घरेलू टेबल फैन का इस्तेमाल किया जा रहा है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इन तस्वीरों को शेयर करते हुए सरकार और निर्माण कंपनी पर तीखा तंज कसा था. सड़क निर्माण की इस हास्यास्पद व्यवस्था ने देश भर में प्रोजेक्ट की इंजीनियरिंग और गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.
तमाम विवादों के बीच PNC को मिले ₹3,500 करोड़ के नए प्रोजेक्ट
एक तरफ जहां कंपनी के पुराने कामों की गुणवत्ता जांच के घेरे में है. उस पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, वहीं दूसरी तरफ NHAI ने उसे बड़े प्रोजेक्ट्स से नवाज दिया है. NHAI ने PNC इंफ्राटेक को करीब ₹3,483 करोड़ के दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट सौंपे हैं.
इसमें बाराबंकी-मुस्तफाबाद फोर लेन प्रोजेक्ट (तकरीब ₹1,728 करोड़) और मुस्तफाबाद-बिसवां फोर लेन प्रोजेक्ट (तकरीब ₹1,755 करोड़) शामिल हैं. ये दोनों महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में NH-927 पर बनाए जाने हैं.

अब सवाल ये उठता है कि जब कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे और अन्य प्रोजेक्ट्स में कंपनी के लचर प्रदर्शन, घटिया निर्माण और सीबीआई जांच के रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं, तो क्या नए ठेके देने से पहले कंपनी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया? यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है जो देश के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर उंगली उठाता है.