बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर सरकारी कर्मचारी के प्रोन्नति में आरक्षण को लेकर निशाना साधा है. मायावती ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रोन्नति में आरक्षण को सही माना है, परन्तु इसे लागू करने में लगातार जटिलता आ रही है.
मायावती ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था पूरे देश में और खासकर उत्तर प्रदेश में निष्क्रिय और निष्प्रभावी बनी हुई है.
उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन करके राज्यसभा में लंबे संघर्ष के बाद बिल पारित हो पाया था, मगर में सरकार के ढीले रवैये के कारण बिल लंबित है. सरकार के इस जातिगत भेदभाव पूर्ण रवैये के कारण एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग का नुकसान हो रहा है. यह इस वर्ग के लोगों के लिए काफी दुखद है.
मायावती ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण का अधिकार सरकार को दिया है. मगर मोदी सरकार भेदभाव पूर्ण रवैया अपना रही है.
बसपा प्रमुख ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा, 'इस सरकार का गरीबों के प्रति रिपोर्ट कार्ड जीरो रहा हैंय ये सरकार केवल पिछली कांग्रेस सरकार की तरह ही लोक लुभावन रवैये पर काम कर रही है. यह सरकार सभी शोषित और पिछड़े लोगों का केवल शोषण करना जानती है. एससी/एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों का संवैधानिक अधिकार भी छीनने की कोशिश कर रही है.
दरअसल, नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण कार्मिक विभाग ने 30 सितंबर 2016 को एक आदेश निकालकर सभी तरह की पदोन्नति पर रोक लगा दी थी, तब से प्रमोशन को लेकर परेशान कर्मचारी इधर से उधर भटक रहे हैं.
आपको बता दें कि एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बदलाव के बाद मोदी सरकार घिरी हुई थी. जिसके बाद देश में दलितों का आक्रोश सामने आया था. हाल ही में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अपने बेटे चिराग के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी. उन्होंने भी एससी/एसटी लोगों के प्रमोशन की बात कही थी.