न जनता परिवार ठीक से खड़ा हो पा रहा है. न आरजेडी और जेडीयू में गठबंधन हो पा रहा. बिहार में सियासी खेल खेले तो खूब जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ नहीं नजर आ रहा जो पूरी तरह नीतीश के पक्ष में नजर आता हो.
एनडीए को छोड़ लालू प्रसाद से हाथ मिलाने के बाद बस दो मौके आए जब नीतीश के खाते में कामयाबी दर्ज हो पाई. पहला, महागठबंधन से उपचुनावों में सफलता और दूसरा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दोबारा कब्जा.
मौजूदा हालात में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास बस ये पांच ऑप्शन हैं, जिन्हें वो विधानसभा चुनावों में उतरने से पहले आजमा सकते हैं:
1. मांझी से दोस्ती कर लें: मुश्किल तो है, मगर नामुमकिन नहीं. जब वो दुश्मनी की हद तक जा चुके आरजेडी नेता लालू प्रसाद से से दोस्ती कर सकते हैं तो कुछ ही महीने पहले तक अपने आदमी रहे में क्या बुराई है. अगर दोनों चाहें तो समझौता हो सकता है. इसमें नीतीश चाहें तो ताजातरीन जनक्रांति अधिकार मोर्चा बनाने वाले पप्पू यादव की भी मदद मिल सकती है. पप्पू यादव हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा मांझी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं - और उन्हें खुद भी सपोर्ट की जरूरत है. चाहें तो पप्पू को भी साथ ले सकते हैं. ऐसा करके नीतीश एक तीर से दो शिकार कर सकते हैं. लालू प्रसाद और बीजेपी दोनों को झटका दे सकते हैं.
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