उत्तर प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर अब और आसान और सुरक्षित होने जा रहा है. 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर मेरठ से प्रयागराज तक की दूरी सिर्फ 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी, लेकिन अगर कोई यात्री रास्ता भटक जाए, गलत लेन में चला जाए या वापस लौटना चाहे तो उसके लिए भी आधुनिक इंटरचेंज सिस्टम तैयार किया गया है.
आजतक की टीम ने गंगा एक्सप्रेसवे पर बने इंटरचेंज सिस्टम का जायजा लिया और समझा कि आखिर किस तरह ये आधुनिक व्यवस्था यात्रियों को राहत देने वाली है. एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग स्थानों पर ऐसे इंटरचेंज बनाए जा रहे हैं, जिनकी मदद से चालक आसानी से दिशा बदल सकते हैं और सही मार्ग पर लौट सकते हैं.
सबसे खास है डबल ट्रंपेट टाइप इंटरचेंज जो लूप और रैंप का संयुक्त ढांचा है. इसके जरिए बाहरी हाईवे से गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़कर मेरठ और प्रयागराज दोनों दिशाओं में जाया जा सकता है. वहीं, एक्सप्रेसवे से उतरकर दूसरे संपर्क मार्गों पर भी आसानी से पहुंचा जा सकता है.
इसी तरह एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुविधा के लिए रैंप टाइप इंटरचेंज भी तैयार किए जा रहे हैं. यहां सिर्फ एक्सप्रेसवे पर सीधे चढ़ने और उतरने के लिए खास रैंप बनाए गए हैं. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ये है कि यात्रियों को अनावश्यक लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि यात्रियों का कीमती वक्त भी बचेगा.
आजतक की टीम ने प्रयागराज से आगे बढ़कर ग्रुप-4 सेक्शन में निर्माण कार्यों की समीक्षा की. इस हिस्से में एक सिंगल ट्रंपेट, दो डबल ट्रंपेट और एक रैंप टाइप इंटरचेंज प्रस्तावित है.
गंगा एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट हेड एसपी श्रीवास्तव का कहना है कि इन इंटरचेंज का मकसद यात्रियों को बिना भटके अपने गंतव्य तक पहुंचाना है. यानी अगर रास्ता गलत भी हो जाए तो अब चिंता की जरूरत नहीं... गंगा एक्सप्रेसवे खुद आपको सही रास्ता दिखा देगा.