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फैक्ट चेक: पाकिस्तानी यूजर ने आंध्र प्रदेश की छात्राओं को बताया कश्मीरी, 3 साल पुरानी है ये तस्वीर

तस्वीर में पुलिसवाले एक महिला को घसीटते हुए नजर आ रहे हैं. इसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय सेना की वर्दी में आरएसएस के गुंडे कश्मीरी महिलाओं का अपहरण कर सेक्स स्लेव की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
तस्वीर कश्मीर की है जहां आरएसएस के गुंडे भारतीय सेना की वर्दी पर महिलाओं का अपहरण कर रहे हैं.
फेसबुक यूजर
सच्चाई
वायरल तस्वीर तीन साल पुरानी है और आंध्रप्रदेश में ​हुए SFI स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शन की है.

कश्मीर और फर्जी तस्वीरें, सोशल मीडिया की इन दिनों यही कहानी है. हालिया दिनों में पाकिस्तान के यूजर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं. तस्वीर में पुलिसवाले एक महिला को घसीटते हुए नजर आ रहे हैं. इसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय सेना की वर्दी में आरएसएस के गुंडे कश्मीरी महिलाओं का अपहरण कर सेक्स स्लेव की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

 

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही तस्वीर का कश्मीर से कोई लेना देना नहीं है. यह तस्वीर साल 2016 में आंध्र प्रदेश में हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन इंडिया (SFI) के विरोध-प्रदर्शन के समय खींची गई थी.

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन देखा जा सकता है.

पाकिस्तान के फेसबुक यूजर " " ने दो तस्वीरें पोस्ट करते हुए अंग्रेजी में कैप्शन लिखा जिसका हिंदी अनुवाद है: "इमरान खान ध्यान से देखो क्या यह तुम्हारी बेटी नहीं है? क्या तुम इसके लिए जिम्मेदार नहीं हो? भारतीय सेना की वर्दी में आरएसएस के गुंडे कश्मीरी महिलाओं का अपहरण कर सेक्स स्लेव की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं." पोस्ट में दूसरी तस्वीर एक कार्टून है.

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पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए हमने इस तस्वीर को ध्यान से देखा तो पुलिसकर्मी की वर्दी पर हमें एक लोगो नजर आया. हमने इंटरनेट पर अलग अलग राज्यों की पुलिस का चिह्न खोजा तो पाया कि यह लोगो आंध्र प्रदेश पुलिस का है.

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इंटरनेट पर आंध्र प्रदेश में हुए प्रदर्शन के बारे में सर्च करने पर हमें एक न्यूज मिली, जिसमें स्टूडेंट फेडरेशन इंडिया (SFI) के स्टूडेंट्स के विजयवाड़ा में विरोध प्रदर्शन के बारे में लिखा गया था.

21 जुलाई 2016 को छपी इस खबर के अनुसार एसएफआई के बैनर तले स्टूडेंट्स राज्य में सोशल वेलफेयर हॉस्टल्स के बंद होने का विरोध कर रहे थे, जब पुलिस ने उन्हें खदेड़ना शुरू कर दिया.

हमें सीपीआईएम के आधिकारिक फेसबुक पेज पर 26 जुलाई 2016 का एक पोस्ट भी मिला जिसमें वायरल हो रही तस्वीर के अलावा इस घटना की और भी तस्वीरें मिलीं.

पड़ताल में यह साफ हुआ कि वायरल हो रही तस्वीर कश्मीर की नहीं, बल्कि आंध्रप्रदेश की है और करीब तीन साल पुरानी है.

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