भीमा कोरेगांव मामले में पांच वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी हुई, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जेल में रखने के बजाए उन्हीं के घर पर नजरबंद रखने को कहा. वामपंथी विचारों पर पुलिस द्वारा हुई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष मोदी सरकार को घेरने में जुटा है.
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए-2 सरकार के दौरान 128 संगठनों को माओवादी लिंक के चलते एक्शन लेने के लिए कहा गया था. ऐसे में अब जब उन्हीं संगठनों में से पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. राहुल के इस कदम के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. कहीं ये कांग्रेस की राजनीतिक मजबूरी तो नहीं है?
सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि दिसंबर 2012 में तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार ने माओवादियों के साथ संबंध रखने वाले 128 संगठनों की पहचान की थी. इसके लिए मनमोहन सरकार ने सभी राज्यों को इन संगठनों से जुड़े हुए लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी की बात कही थी.
दिलचस्प बात ये है कि पुलिस ने जिन वामपंथी विचारकों के खिलाफ कार्रवाई की है. इनमें सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरिया और वरनोन गोंजाल्वेस शामिल हैं. यूपीए-2 सरकार ने माओवादियों के साथ जिन 128 संगठनों के साथ लिंक जोड़े थे उसमें भी इन्हीं पांच लोगों के नाम शामिल थे.
वरवर राव तेलगू के प्रसिद्ध कवि और रेवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष हैं. सुधा भारद्वाज पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) की महासचिव हैं. वरनोन गोंजाल्वेस सीपीआई (माओवादी) की महाराष्ट्र राज्य समिति के पूर्व सचिव रहे हैं. गोंजाल्वेस को 9 अगस्त 2007 को मनमोहन सरकार के दौरान ही गिरफ्तार किए गया था.
भीमा कोरेगांव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश के लिए इन्हें गिरफ्तार किया गया है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी इनके पक्ष में खड़ी नजर आ रही है. इतना ही नहीं गिरफ्तारी के लिए मोदी सरकार पर निशाना साध रही है.
बीजेपी के प्रवक्ता जफर इस्लाम ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि ये वही लोग हैं जिन्हें कांग्रेस सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था. इनके ऊपर 17-17 केस दर्ज हैं. में जो हलफनामा दायर किया था उसे साफ कहा था कि इनके माओवादियों से लिंक हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं. अब वही कांग्रेस दोहरा मापदंड अपना रही है. इससे साफ हो गया है कि कांग्रेस को आंतरिक सुरक्षा से कोई लेना देना नहीं है.
जफर इस्लाम ने कहा कि कांग्रेस के दो प्रधानमंत्री अपनी जान गवां चुके हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री की जान को खतरे की बात पर राहुल गांधी को इसे समर्थन करना चाहिए था, लेकिन दुखद है कि वे राजनीतिक मजबूरी के चलते इसका समर्थन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस बिना बैशाखी के नहीं चल सकती है. ऐसे में राहुल अपने वजूद को बचाए रखने के लिए माओवादियों के साथ संबंध रखने वाले लोगों के साथ खड़े हैं. राहुल इस बात को भी जानते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हारकर बिल्कुल खत्म हो जाएगी. इसीलिए वो का समर्थन कर रहे हैं.
यूपी अनुसूचित जाति वित्त निगम का अध्यक्ष और दलित चिंतक लालजी प्रसाद निर्मल भी मानते हैं कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्वार्थ के चलते वामपंथी विचारकों के साथ खड़ी है. जबकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर जो कार्रवाई की गई है उस पर किसी तरह का कोई सवाल नहीं खड़ा नहीं करना चाहिए.
निर्मल ने कहा कि राहुल गांधी की बातों को बहुत ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है. कांग्रेस का सूरज डूब रहा है इसीलिए राहुल गांधी और उनकी पार्टी बेचैन है. वे वामपंथी दलों के साथ समर्थन हासिल करने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा दौर में लेफ्ट मुक्त देश हो चुका है.